मेरी जीवनगाथा: संघर्ष, शरीर और मृत्यु | प्राकृतिक जीवन और पैसे की गुलामी से मुक्ति


मेरी जीवनगाथा: संघर्ष, शरीर और मृत्यु | प्राकृतिक जीवन और पैसे की गुलामी से मुक्ति

मेरी जीवनगाथा: संघर्ष, शरीर और मृत्यु

सामग्री सूची

बचपन और माता-पिता के साथ संघर्ष

क्या यही सत्य है, जैसा कि मैं पहले समझता था—कि मेरे साथ अन्याय हुआ है? जब मैं बच्चा था और अपने माता‑पिता के आश्रित था, तब माँ केवल नाम के लिए ही थी। पिता का ही हमारे छोटे‑से परिवार पर सर्वेसर्वा अधिकार था। इस स्थिति के कारण मेरे साथ अत्याचार की सीमा नहीं रही। इसी अत्याचार के कारण मैंने विद्रोह कर दिया और अपने दम पर संसार में अपने आप को स्थापित करने का संघर्ष शुरू किया।

युवा अवस्था में संघर्ष और आत्मनिर्भरता

संसार में हर बार जब मैं धक्का खाता, मुझे संभालने वाला कोई नहीं होता था। सिवाय मेरे अपने आप के। हमारे जानने वाले लोग भी केवल मुझे दबाने में ही आनंद लेते थे। फिर भी, बड़ी मशक्कत और अथाह दुःखों, पीड़ाओं और क्लेशों के सागर को पार करके, मैंने अपने लिए एक छोटा‑सा मुकाम बनाने में सफलता हासिल की।

शरीर, बीमारियाँ और उपचार

मेरे पास अपने शरीर के अतिरिक्त कुछ भी नहीं था। इसके लिए मैंने लगभग चालीस वर्षों तक परिश्रम किया। बीच‑बीच में मेरे शरीर ने भी अपना बुरा‑सा मुँह दिखाया और मुझसे नाराज़ रहने लगा। मुझे इसके इलाज के लिए कई बार प्रयास करने पड़े, पर बीमारियाँ कभी साथ नहीं छोड़ती थीं। एक के बाद दूसरी बीमारी अपना भयंकर रूप दिखाकर मुझे भयभीत करती रही।

प्राकृतिक जीवन और पैसे की गुलामी से मुक्ति

अब मैं समझता हूँ कि मैं अपने शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं कर सकता। लाखों रुपये खर्च करने, समय देने और कई ऑपरेशनों के बावजूद शरीर कमजोर होता जा रहा है। मेरा सामर्थ्य भी धीरे‑धीरे जवाब देने लगा है। मृत्यु आएगी तो आए, मुझे उसका भय नहीं है। जो कुछ मुझे करना था, वह मैंने कर लिया। जो होना था, वही हुआ।

अंतिम इच्छा और जीवन का मूल्य

जैसे अभिमन्यु ने अपने सामर्थ्य से अधिक कार्य किया और महाभारत के युद्ध में वीरगति को प्राप्त किया, उसी प्रकार मैं भी संसार‑सागर में संघर्ष करते हुए अपने प्रिय शरीर का त्याग करना चाहता हूँ। यह शरीर हर परिस्थिति में मेरा साथ देता रहा। अब यह कमजोर हो चुका है और अधिक कष्ट और बीमारियों की मार सहने में समर्थ नहीं है। इसलिए इसे दोष नहीं देना चाहिए। हमारा धर्म है कि इसके अंतिम समय तक इसे प्रेमपूर्वक और यथासंभव कम से कम पीड़ा और कठिनाइयाँ देते हुए विदा करें। यही मेरी अंतिम इच्छा है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Featured post

आधुनिक कोशिकीय जीव विज्ञान (Cell Biology), शरीर विज्ञान (Anatomy) और क्वांटम चेतना

View of the Site

यह ब्लॉग खोजें