सावधानी हटी दुर्घटना घटी मृत्यु के पंजे हर शख्स फंसा है,

जिस समाज में आप रहते हैं, यहाँ लोग पागल हो रहे हैं, इनसे सावधान रहे, यह सब मिल कर आपके लिए बड़ी समस्या खड़ी करेगे, क्योंकि इन्हे आपकी सफलता से द्रोह है, यह सब आप से ईर्ष्या करते है, इससे भी बड़ी बात है आप अपनी


जिस समाज में आप रहते हैं, यहाँ लोग पागल हो रहे हैं, इनसे सावधान रहे, यह सब मिल कर आपके लिए बड़ी समस्या खड़ी करेगे, क्योंकि इन्हे आपकी सफलता से द्रोह है, यह सब आप से ईर्ष्या करते है, इससे भी बड़ी बात है आप अपनी शरीर का खयाल रखना होगा क्योंकि यह जिंदगी एक भयंकर समस्या है, और यह इस नस्वर शरीर के ही आश्रित है, आपको अपने शरीर को मजबूत बनाने के लिए परिश्रम करना होगा। 

    मृत्यु के पंजे हर शख्स फंसा है, और वह एक एक पल जिंदगी के ऐसे ही प्राप्त कर रहा है जैसे दिया अंधेरे में प्रकाश देता तेल के सहारे, तेल यहाँ मानव शरीर का प्राण है, अंधेरा यह जगत का अज्ञानी मनुष्य है, दिपक जिसका सहारा या आसरा ले कर दिया बत्ती और तेल प्रकाश फैलाने का कार्य करते हैं, माचीस जो इस शरीर को जलाती है वह आपके विचार हैं, 

   यह आपके विचार आपके लिए इस अंधकार पूर्ण संसार में प्रकाश का मार्ग दिखा सकते हैं, और आपके लिए ऐसी मृत्यु की काल कोठरी बना सकते हैं जहाँ से संसार रूपी शरीर का अंत यातनापूर्ण कष्टों को सह सह कर बेहाल आप अर्थात आत्मा रूप होकर बेहोशी की दशा में अपने मृत्यु के पिजड़े अर्थात शरीर का अंत करके जिसे संसार समाज में देहांत कहते उसको उपलब्ध करते हैं |

     इस मृत्यु के पिंजड़े अर्थात अपनी शरीर का जीव अर्थात आप को बड़ा मोह होता है। होना भी चाहिए क्योंकि वास्तविक रूप से आपका सच्चा घर यही है, इसे प्राप्त करने में असहनिय दर्द प्राप्त होने पर इसके रख रखाव में दर्द और अंत में इसको त्यागने में भी दर्द भयानक दर्द होता है, कभी किसी मरते हुए आदमी को देखें, कितनी असहनिय पिड़ा को वह झेलता है, यहाँ तक आदमी होश में मर नहीं पाता इसलिए बेहोश हो जाता है। 

 यह मृत्यु का पिंजरा अपने साथ कितनी उलझनो दिक्कतों और कष्टों को परेशानियों अपने साथ लाता है, लोग इसको सुलझाते-सुलझाते स्वयं को इसमें बुरी तरह से उलझा लेते हैं, तो क्या इस मृत्यु के पिंजरा अर्थात शरीर की सारी समस्याएं समाप्त होने वाली नहीं है। है लेकिन वह मार्ग आसान नहीं है जिंदगी की जितनी समस्या यह शरीर अपने साथ लाती है, उतने समाधान भी लाती है। समाधान समाधि का मार्ग तो हमारे महापुरुषों ने खोज रखा है, उसकी कस्ट साध्य साधना को देखते हुये लोग बाग उससे दूर ही रहते हैं| 

      क्या सच में योग का मार्ग कठीन और दुष्कर है जिस पर चलना असंभव है 

     योग का कठिन मार्ग: क्या आप तैयार हैं?

     महर्षि अरविंद का दर्शन आध्यात्मिक पथ पर चलने वालों के लिए एक मार्मिक संदेश देता है। यह हमें यह आत्म-मंथन करने के लिए प्रेरित करता है कि क्या हम वास्तव में इस कठिन यात्रा के लिए तैयार हैं।

     योग की शुरुआत में, यह चेतावनी दी जाती है कि आध्यात्मिक पथ पर चलने का आह्वान यदि केवल अहंकार की वजह से है, तो परिणाम विनाशकारी हो सकता है। यह सच्ची आस्था और आत्मा की पुकार से ही प्रेरित होना चाहिए।

     योग दर्शन बताता है कि योग का मार्ग सरल नहीं है। यह लंबा, कठिन, खतरनाक और जटिल है। हर कदम पर घात लगाए दुश्मन मौजूद हैं। ये दुश्मन हमारी अज्ञानता और कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। जब हम एक बाधा पार करते हैं, तो दूसरी खड़ी हो जाती है।

    योग दर्शन आध्यात्मिक रास्ते में आने वाली चुनौतियों का ज्वलंत वर्णन करता है। रास्ते में नर्क के राक्षस बाधाएं उत्पन्न करते हैं, वहीं स्वर्ग भी कठिन परीक्षाओं से गुजरने को मजबूर करता है। कई बार ऐसा लगेगा कि हम अकेले हैं, ऊपर वाले देवता भी हमारी सहायता के लिए तैयार नहीं।

   अंधकार और अज्ञानता के पक्षधर शक्तिशाली और क्रूर होते हैं। वहीं दूसरी ओर, दिव्य शक्तियां हमारी सहायता के लिए धीमी और कम आती हैं। हर कदम एक युद्ध है। हमें ऊंचाइयों को छूना है और गहरी खाइयों को पार करना है। हर जीत के बाद और भी कठिन चुनौतियां हमारा इंतजार कर रही होती हैं।

    क्या वह इस कठिन रास्ते के लिए तैयार है। क्या वह उस दिव्य कृपा के लिए निरंतर समर्पित रह सकता है, जिसे पाना अमृत या कुबेर के खजाने से भी दुर्लभ है?

     योग दर्शन यह भी चेतावनी देता है कि कभी-कभी ईश्वर भी अपना मुख छुपा लेते हैं और हमें अकेले संघर्ष करना पड़ता है। उनकी कृपा शीतल सूर्य की तरह हो सकती है, जो हमें तूफान और कठिनाइयों से बचाने में असमर्थ होती है।

    हालांकि, उनकी सहायता निरंतर विद्यमान रहती है, भले ही वह महसूस न हो।

   क्या अमरता एक खेल है या दिव्य जीवन बिना प्रयास के मिलने वाला पुरस्कार है? यह हमें सिखाता है कि सही दिशा में प्रयास करने और विश्वास बनाए रखने की आवश्यकता है। लेकिन, योग का कठिन नियम है और इसे कोई टाल नहीं सकता।

   आत्मिक जागरण के लिए आह्वान:

  सुनिश्चित करें कि आपका आह्वान सच्चा है, अहंकार या क्षणिक भावनाओं से प्रेरित नहीं।

केवल दृढ़ आत्मिक इच्छा और अदम्य उत्साह ही सफलता दिला सकते हैं।

योग मार्ग की कठिनाइयाँ:

यह एक लंबा, कठिन और खतरनाक रास्ता है।

हर कदम पर घात और जाल बिछे होंगे।

हजारों अदृश्य शत्रु आपका फायदा उठाएंगे।

आपको अकेलापन, राक्षसों का प्रकोप और देवताओं की उदासीनता का सामना करना पड़ सकता है।

प्राचीन और शक्तिशाली अंधकारमय शक्तियां आपके विरोध में खड़ी होंगी।

सहायता मिलना दुर्लभ है।

हर कदम एक युद्ध है।

आपको ऊंचे शिखरों को पार करना होगा और हर जीत के बाद और भी कठिन लड़ाइयाँ आपका इंतजार कर रही होंगी।

सफलता की कुंजी:

सच्ची कोशिश और दृढ़ विश्वास।

ईश्वर की कृपा प्राप्त करना और उसे बनाए रखना।

संदेह, अकेलापन और कठिनाइयों का सामना करने की तैयारी।

योग मार्ग कठिन है, लेकिन दृढ़ निश्चय और प्रयास से सफलता प्राप्त की जा सकती है।

    हलाकि संजीवनी मंत्र का जाप निरंतर इस मार्ग में आपकी सहायता करेगा। कोई आए ना आए लेकिन संजीवनी मंत्र की शक्ति हमेशा आपके साथ खड़ी रहेगी। यह शक्ति आपकी अंदर की शक्ति को जागृत कर देगी। जो संसार की किसी भी देवीय शक्ति से ज्यादा ताकतवर होती है।



मानव मन निराशा आशा का ऐसा सागर है जिसका थाह लेना असंभव है।

मुझे इस संसार और यहां पर रहने वाले लोगों के साथ रहते हुए लगभग आधा जीवन व्यतीत हो चुका है, फिर भी हमने यहां पर स्वयं को लेकर इस संसार में स्वयं के साथ एक युद्ध चल रहा है मैं स्वयं को ले कर संसार से लड़ रहा हूं यह संसार कितना ज्यादा खतरनाक इसकी कल्पना मैंने कभी नहीं की थी लेकिन मुझे इसका ज्ञान हो चुका है मैंने जीना सीख लिया है लेकिन आसान यह बिल्कुल नहीं है। क्योंकि यहां पर किसी मनुष्य का मनुष्य होना ही सबसे बड़ा अपराध है, और यहां सत्य ईमानदारी के साथ जीना बहुत अधिक कठिन है, यहां कोई किसी का साथ नहीं देने वाला नहीं है यहां पर हर किसी का अपना मतलब और स्वार्थ हैं लोग झूठे और धूर्त किस्म के हैं, यहां संसार में कहीं कोई सुख नहीं हर सुख के साथ दुःख मिश्रित है। दुःख जो किसी सुख की कल्पना देता है लेकिन साथ में बड़े दुःख को ले कर आता है यहां पर हर व्यक्ति अपनी भ्रष्टता को श्रेष्ठता सिद्ध करने में लगा हैं लोग बहुत अधिक जटिल हैं, यहां पर एक दूसरे के जीवन के साथ खेल रहें हैं, आप स्वयं अपने साथ खेल रहे हैं आपका जीवन हर समय खत्म हो रहा है और आप दूसरे को खत्म करके स्वयं को बचाना चाहते हैं, लेकिन आप स्वयं को बचा नहीं सकते हैं फिर भी आप स्वयं को बचाने के लिए निरंतर संघर्ष कर रहें हैं, इसी कार्य में मैं भी लगा हूं कभी मुझे में आशा का प्रबल वेग चढ़ जाता है तो कभी निराशा का घोर बादल छा जाता है, ऐसा लगता है की यह अंधकार स्वयं को ले कर डूब जायेगा। कभी लगता है की मैंने दुनिया को जीत लिया है, अगले ही पल हमें लगता है की मैं स्वयं को धोखा दे रहा हूं क्योंकि यहां पर कोई मेरी मृत्यु का इंतजार कर रहा हैं, यहां तक ऐसा मौका अपने हाथ से कभी नहीं छोड़ता जिससे मेरा सर्वनाश हो जाए, ऐसा मेरे साथ ही नहीं सब के साथ ऐसा ही हो रहा है, ऐसा क्यों हो रहा है? क्या हमारे लिए यहीं संसार का निर्वाण किया गया है, जहां पर रगड़ घिस करना पड़ता है, लोग सुखी और प्रसन्न दिखाई देते हैं, वास्तव में लोग झूठे हैं, मैं भी इनके साथ ऐसा ही हो गया हूं, लेकिन मेरा मन मेरी वास्तविक जानता है, वह मुझ से कहता  हैं की तुम गलत हो तुम झूठे हो मैं इसको कभी अस्वीकृत नहीं कर सकता हूं, सत्य को भी मैं जानता हूं समाज की बनावट कुछ ऐसी है जहां पर रुग्णता का साम्राज्य स्थापित हो चुका है।

मैं यह जानता हूं की यह सारा संसार मृत्यु के सागर में गोते खा रहा है, लेकिन कोई इसी स्वीकार नहीं करने वाला नहीं है, लोग मृत्यु को चकमा देने के लिए प्रयास कर रहें हैं, मैं ऐसा नहीं कर रहा हूं क्योंकि मैं जानता हूं की इससे बचने का कोई उपाय इस पृथ्वी पर किसी ने निर्मित नहीं किया है मुझे ऐसे मार्ग का निर्वाण करना है, मैंने लगभग कर भी लिया है, मैं लोगों को मृत्यु से बचाना नहीं चाहता हूं यद्यपि मैं चाहता हूं की लोग मरने की कला को सीख ले और यह कार्य बहुत अधिक कठिन नहीं हैं। यह बहुत अधिक सरल है, लेकिन समाज में ऐसे लोग नहीं जो मरने के लिए तैयार हो लोग जीने के लिए परेशान हैं यदि लोग मरने के लिए परेशान रहने लगे तो जीवन के लिए किसी प्रकार की अधिक चिंता की जरूरत नहीं पड़ेगी। मरना ही हमारी भारतीय संस्कृत हैं यही हमारी परंपरा है, हम मरना चाहते हैं अपनी वासना से अपनी इच्छा से अपनी झूठी शान शौकत अपनी आशा से अपनी निराशा से अपने सत्य से अपने यह हमें सब हमारी प्रकृति सीखा रही है, प्रकृति कठोर दिखती है वास्तव में प्रकृति सरल है मानव जब से प्रकृति से दूर हुआ हैं तभी से यह मानसिक रूप से बीमार हो चुका है, इसको स्वस्थ स्वयं यह प्रकृति ही कर सकती है।