अरुणगिरिध्यानस्तुतिः
अरुणगिरिरिहेड्यः स्कन्द सत्कीर्तिसूक्ति-
प्रकटितनिजभक्तिः निस्पृहः शुद्धसत्वः ।
अनुदिनमगजातासूनुधामाटनोद्यद्-
रतिरखिल सुपूज्यः साञ्जलिर्भूतिभूषः ॥
इति अरुणगिरिध्यानस्तुतिः समाप्ता ।
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मुझे लगता है अब बहुत अधिक पढ़ना नहीं चाहते हैं पढ़ने वालों का भी दो तीन वर्ग है एक अ…
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