Rigveda/1/184/5 | Ved Portal - Search & Read

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एष वां स्तोमो अश्विनावकारि मानेभिर्मघवाना सुवृक्ति। यातं वर्तिस्तनयाय त्मने चागस्त्ये नासत्या मदन्ता ॥

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