अध्याय III, खंड III, अधिकरण XXXIV



अध्याय III, खंड III, अधिकरण XXXIV

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अधिकरण सारांश: ब्रह्म से संबंधित विद्याओं में से अपनी इच्छानुसार किसी एक का ही चयन करना चाहिए

ब्रह्म सूत्र 3,3.59

विकल्पः, विशिष्ट-फलत्वात् ॥ 59 ॥

विकल्पः – विकल्प; अविशिष्ट-फलत्वात् – (सभी विद्याओं का ) एक ही परिणाम होने के कारण।

59. (विविधताओं के सम्बन्ध में) विकल्प है, क्योंकि (सभी विद्याओं का) परिणाम एक ही है।

चूँकि सभी विद्याओं का परिणाम ब्रह्म की प्राप्ति है , इसलिए यदि कोई अपनी पसंद के अनुसार उनमें से किसी एक को अपना ले और लक्ष्य तक पहुँचने तक उस पर अड़ा रहे तो यह पर्याप्त है। और एक बार इन विद्याओं में से एक के माध्यम से ब्रह्म की प्राप्ति हो जाने पर, दूसरी विद्या का सहारा लेना बेकार है। इसके अलावा, एक समय में एक से अधिक ध्यान का अभ्यास करने से केवल व्यक्ति का मन विचलित होगा और इस तरह उसकी प्रगति में बाधा आएगी। इसलिए व्यक्ति को खुद को एक विशेष विद्या तक ही सीमित रखना चाहिए ।

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आधुनिक कोशिकीय जीव विज्ञान (Cell Biology), शरीर विज्ञान (Anatomy) और क्वांटम चेतना

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