अदारसृद्भवतु देव सोमास्मिन् यज्ञे - श्लोक 1
मा नो विददभिभा मो अशस्तिर्मा नो विदद्वृजिना द्वेष्या या ॥१॥
हे देव सोम! हमारे इस यज्ञ में शांति और सुख स्थापित हो। हमारे ऊपर किसी प्रकार का भय, दोष या द्वेष न आए।
English:
O Deva Soma! May this sacrifice bring peace and well-being. May no fear, fault, or enmity afflict us.
अदारसृद्भवतु = शांति हो | देव = देव | सोमास्मिन् यज्ञे = सोम के यज्ञ में | मरुतो = वायु देव | मृडता = सुख | नः = हमारे लिए | मा नो = न हमारे | विददभिभा = भय दें / न दें | मो अशस्तिः = दोष / अव्यवस्था | मा नो विदद्वृजिना = शत्रुजन्य दोष न दें | द्वेष्या या = जो द्वेष करती है
युवं तं मित्रावरुणावस्मद्यावयतं परि ॥२॥
जो आज सेन्य होकर बुरे कर्मों को अंजाम देते हैं, उन पर मित्र और वरुण का संरक्षण हो।
English:
May those who act harmfully today as soldiers be under the protection of Mitra and Varuna.
यो = जो | अद्य = आज | सेन्यो = सेन्य / सैनिक | वधः = हत्यारा / जो मारते हैं | अघायूनाम् = बुरे कर्म करने वालों का | उदीरते = अंजाम देते हैं | युवं = आप | तं = उन्हें | मित्रा = मित्र देव | वरुणा = वरुण देव | अस्मद्यावयतं = हमारे पास | परि = संरक्षण करें
वि महच्छर्म यच्छ वरीयो यावया वधम् ॥३॥
जो भी इस प्रकार का वध हो, उसे वरुण नियंत्रित करें। हमारे चारों ओर जो श्रेष्ठ कर्म हों, उन्हें स्थिर करें।
English:
Whatever killing or harmful act occurs, may Varuna control it; may the superior deeds around us remain stable.
इतश्च = यह | यदमुतश्च = और वह | यद्वधं = हत्याएँ | वरुण = वरुण देव | यावय = नियंत्रित करें | वि महच्छर्म = हमारे चारों ओर श्रेष्ठ कर्म | यच्छ वरीयो = श्रेष्ठ | यावया वधम् = हानिकारक कृत्य
न यस्य हन्यते सखा न जीयते कदा चन ॥४॥
हे महामित्र! ऐसा आदेश दो कि कोई मित्र न मरे और कोई कभी पराजित न हो।
English:
O Great Friend! Command that no ally be killed and none ever defeated.
शास = आदेश दे | इत्था = ऐसा | महामस्यमित्रसाहः = महान मित्र | अस्तृतः = स्थापित हो | न यस्य = जिसका नहीं | हन्यते = मारा जाए | सखा = मित्र | न जीयते = न जीते | कदा = कभी | चन = भी
