हिरण्यवर्णाः शुचयः पावका यासु जातः - श्लोक 1
या अग्निं गर्भं दधिरे सुवर्णास्ता न आपः शं स्योना भवन्तु ॥१॥
हे देवों! ये सभी हिरण्यवर्ण वाले, शुद्ध और पावक हैं। जो अग्नि गर्भ में हैं, वे सुरक्षित रहें और हमारी आयु और समृद्धि बढ़ाएँ।
English:
O gods! These golden-colored, pure, and fiery beings, who reside in the womb of fire, may they be protected and bless us with longevity and prosperity.
हिरण्यवर्णाः = सुनहरे रंग के | शुचयः = शुद्ध | पावका = पवित्र / अग्नि के समान | यासु जातः = जिनमें जन्मा | सविता = सूर्य / जीवनदाता | यास्वग्निः = जो अग्नि के समान हैं | या अग्निं गर्भं दधिरे = जो अग्नि गर्भ में हैं | सुवर्णास्ता = सुनहरी | न आपः शं स्योना भवन्तु = हमारे लिए शुभ और सुरक्षित रहें
या अग्निं गर्भं दधिरे सुवर्णास्ता न आपः शं स्योना भवन्तु ॥२॥
जो अग्नि गर्भ में है, वे राजा वरुण के मार्ग से जाती हैं। जो सत और असत्य को जानकर लोगों के बीच जाते हैं, वे सुरक्षित रहें।
English:
Those in the womb of fire move along the path of King Varuna, seeing truth and falsehood among humans; may they remain safe.
यासां = जो जाती हैं | राजा = राजा | वरुणो याति = वरुण के मार्ग से जाती हैं | मध्ये = बीच में | सत्यानृते = सत्य और असत्य | अवपश्यन् = देखते हुए | जनानाम् = लोगों के | या अग्निं गर्भं दधिरे = जो अग्नि में हैं | सुवर्णास्ता न आपः = सुनहरे, सुरक्षित और शुभ रहें
या अग्निं गर्भं दधिरे सुवर्णास्ता न आपः शं स्योना भवन्तु ॥३॥
जो देवता आकाश में भक्षण (भोजन) करते हैं और कई जगहों पर स्थित हैं, वे भी सुरक्षित रहें।
English:
Those gods who consume offerings in the sky and are present in many places, may they remain safe.
यासां = जो | देवा = देवता | दिवि = आकाश में | कृण्वन्ति = करते हैं | भक्षं = भोजन | या अन्तरिक्षे = जो आकाश में हैं | बहुधा भवन्ति = कई जगहों में हैं | या अग्निं गर्भं दधिरे = जो अग्नि में हैं | सुवर्णास्ता न आपः = सुरक्षित रहें
घृतश्चुतः शुचयो याः पावकास्ता न आपः शं स्योना भवन्तु ॥४॥
हे शिव! मेरी आंखों से देखें, हे शिव! मेरे शरीर को छूएँ और घृत से शुद्ध करें। जो पवित्र और पावक हैं, वे सुरक्षित रहें।
English:
O Shiva! Look through my eyes, touch my body, and purify with ghee. May those who are pure and fiery be safe.
शिवेन = शिव द्वारा | मा चक्षुषा पश्यत = मेरी आंखों से देखें | अपः शिवया = हे शिव | तन्वा उप स्पृशत त्वचं = शरीर को छूएँ | मे = मेरे | घृतश्चुतः = घृत द्वारा शुद्ध करें | शुचयः = शुद्ध | पावका = पावक / अग्नि | ता न आपः शं स्योना भवन्तु = सुरक्षित और शुभ रहें
