अमूः पारे पृदाक्वस्त्रिषप्ता - श्लोक 1
तासां जरायुभिर्वयमक्ष्यावपि व्ययामस्यघायोः परिपन्थिनः ॥१॥
यह श्लोक कहता है कि ये जीव अपने मार्ग पर अडिग रहते हैं और जीवन की बाधाओं और समय के साथ उत्पन्न होने वाले दोषों से पार पाते हैं।
English:
This verse says that these beings remain steadfast on their path, overcoming obstacles of life and the inherent faults that emerge with time.
अमूः = चलते हैं | पारे = पार | पृदाक्वस्त्रिषप्ता = मार्ग / रास्ता | निर्जरायवः = बाधाओं से मुक्त | तासां = उनके | जरायुभिः = समय और दोषों द्वारा | व्ययामस्यघायोः = क्षय और दोषों से | परिपन्थिनः = मार्ग पर अडिग रहने वाले
विष्वक्पुनर्भुवा मनोऽसमृद्धा अघायवः ॥२॥
वे अपने कर्म को दृढ़ता से निभाते हैं, जैसे कि धनुष को संभालते हैं, और उनका मन अघात और अशांति से मुक्त रहता है।
English:
They carry out their duties firmly, like handling a bow, and their mind remains free from harm and unrest.
विषूच्येतु = वह संभालते हैं | कृन्तती = निष्पादित करते हैं | पिनाकम् = धनुष | इव = जैसे | बिभ्रती = वह धारण करते हैं | विष्वक्पुनर्भुवा = मन / सम्पूर्ण मन | असमृद्धा = अशांति मुक्त | अघायवः = हानिरहित
वेणोरद्गा इवाभितोऽसमृद्धा अघायवः ॥३॥
वे किसी की तुलना में अधिक शक्तिशाली नहीं हैं, परंतु उनकी शक्ति संतुलित और सुरक्षित रहती है, जैसे एक घोड़ा गाड़ी खींचता है।
English:
They are not stronger than others but their strength is balanced and secure, like a horse pulling a chariot.
न = नहीं | बहवः = अधिक | समशकन् = सक्षम | नार्भका = किसी | अभि दाधृषुः = तुलना करते हुए धारण | वेणोरद्गा = घोड़ा और गाड़ी | इव = जैसे | अभितः = सुरक्षित | असमृद्धा = संतुलित | अघायवः = हानिरहित
इन्द्रान्येतु प्रथमाजीतामुषिता पुरः ॥४॥
वे अपने मार्ग में कदम बढ़ाते हुए प्रकाश फैलाते हैं और अपने घरों और परिवारों को संरक्षित करते हुए आगे बढ़ते हैं।
English:
They advance on their path, spreading light and protecting their homes and families.
प्रेतं = आगे बढ़ते हुए | पादौ = कदम | प्र = प्रकाशित | स्फुरतं = चमक / प्रकाश | वहतं = वह ले जाते हैं | पृणतो = संरक्षित | गृहान् = घर | इन्द्रान्येतु = अग्रणी देवता | प्रथमाजीतामुषिता = पहले विजयी | पुरः = नगर / मार्ग
