श्रीरामायण पाठ — बालकाण्डम्/सर्गः २०
श्लोक 1
तच्छ्रुत्वा राजशार्दूलो विश्वामित्रस्य भाषितम् । मुहूर्तमिव निःसंज्ञः संज्ञावानिदमब्रवीत ॥१-२०-१॥
हिन्दी व्याख्या: विश्वामित्र के उस कथन को सुनकर राजा दशरथ कुछ मुहूर्त (पल) के लिए अचेत-से हो गए। फिर चेतना आने पर उन्होंने यह बात कही।
English Translation: Hearing those words of Vishwamitra, the tiger among kings remained unconscious for a moment, and regaining consciousness, he spoke thus.
श्लोक 2
ऊनषोडशवर्षो मे रामो राजीवलोचनः । न युद्धयोग्यतामस्य पश्यामि सह राक्षसैः ॥१-२०-२॥
हिन्दी व्याख्या: कमलनेत्र राम अभी सोलह वर्ष से भी कम आयु के हैं। मैं राक्षसों के साथ इनकी युद्ध करने की योग्यता (क्षमता) नहीं देखता हूँ।
English Translation: "My lotus-eyed Rama is less than sixteen years of age. I do not see him as fit to fight with demons."
श्लोक 3
इयमक्षौहिणी सेना यस्याहं पतिरीश्वरः । अनया सहितो गत्वा योद्धाहं तैर्निशाचरैः ॥१-२०-३॥
हिन्दी व्याख्या: यह एक अक्षौहिणी सेना है, जिसका स्वामी और अधिनायक मैं हूँ। मैं इस सेना के साथ जाकर उन निशाचरों (राक्षसों) से युद्ध करूँगा।
English Translation: "This is an akshauhini army of which I am the lord and master. I will go along with it and fight those nocturnal demons."
श्लोक 4
इमे शूराश्च विक्रान्ता भृत्या मेऽस्त्रविशारदाः । योग्या रक्षोगणैर्योद्धुं न रामं नेतुमर्हसि ॥१-२०-४॥
हिन्दी व्याख्या: मेरे ये शूरवीर, पराक्रमी और अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुण सेवक राक्षस-समूहों से युद्ध करने के योग्य हैं। आप राम को ले जाने के योग्य नहीं हैं (राम को मत ले जाइए)।
English Translation: "These brave, valiant, and weapon-skilled servants of mine are fit to fight the hordes of demons. You ought not to take Rama."
श्लोक 5
अहमेव धनुष्पाणिर्गोप्ता समरमूर्धनि । यावत् प्राणान् धरिष्यामि तावद् योत्स्ये निशाचरैः ॥१-२०-५॥
हिन्दी व्याख्या: मैं स्वयं ही हाथ में धनुष धारण कर रणभूमि में इनकी रक्षा करूँगा। जब तक मेरे शरीर में प्राण रहेंगे, तब तक मैं उन निशाचरों से युद्ध करूँगा।
English Translation: "I myself, bow in hand, will be his protector in the vanguard of battle. As long as I retain my breath, I will fight the night-rangers."
श्लोक 6
निर्विघ्ना व्रतचर्या सा भविष्यति सुरक्षिता । अहम् तत्र गमिष्यामि न रामं नेतुमर्हसि ॥१-२०-६॥
हिन्दी व्याख्या: आपकी वह व्रत-चर्या मेरी पूर्ण सुरक्षा में विघ्न-रहित हो जाएगी। मैं स्वयं वहाँ जाऊँगा, आप राम को मत ले जाइए।
English Translation: "That observance of your vow will become well-protected and free from obstacles. I will go there myself; you ought not to take Rama."
श्लोक 7
बालो ह्यकृतविद्यश्च न च वेत्ति बलाबलम् । न चास्त्रबलसंयुक्तो न च युद्धविशारदः ॥१-२०-७॥
हिन्दी व्याख्या: यह बालक है, इसने अभी संपूर्ण शिक्षा नहीं प्राप्त की है, यह सेना के बल और अबल को नहीं जानता है। यह न तो अस्त्र-बल से संयुक्त है और न ही युद्ध में कुशल है।
English Translation: "He is a child, yet untrained in advanced lore, and does not know relative strength and weakness. He is neither equipped with missile power nor skilled in warfare."
श्लोक 8
न चासौ रक्षसां योग्यः कूटयुद्धा हि राक्षसाः । विप्रयुक्तो हि रामेण मुहूर्तमपि नोत्सहे ॥१-२०-८॥
हिन्दी व्याख्या: और न ही वह राक्षसों का मुकाबला करने के योग्य है, क्योंकि राक्षस कूटयुद्ध (छल से युद्ध) करने वाले होते हैं। राम से वियुक्त (अलग) होकर मैं एक मुहूर्त के लिए भी...
English Translation: "Nor is he a match for the demons, for demons fight by treacherous means. Separated from Rama, I cannot endure..."
श्लोक 9
जीवितुं मुनिशार्दूल न रामं नेतुमर्हसि । यदि वा राघवं ब्रह्मन् नेतुमिच्छसि सुव्रत ॥१-२०-९॥
हिन्दी व्याख्या: ...जीवित रहने का उत्साह नहीं रख सकता। हे मुनिश्रेष्ठ! आप राम को न ले जाइए। अथवा हे ब्रह्मन्! हे सुव्रत! यदि आप राम को ले जाना ही चाहते हैं...
English Translation: "...even for a moment to live, O chief of sages. You ought not to take Rama. Or else, O Brahman, O strict observer of vows, if you wish to take Raghava..."
श्लोक 10
चतुरङ्गसमायुक्तं मया सह च तं नय । षष्टिर्वर्षसहस्राणि जातस्य मम कौशिक ॥१-२०-१०॥
हिन्दी व्याख्या: ...तो चतुरङ्गिणी सेना के साथ मुझे भी अपने साथ ले चलिए। हे कौशिक! मेरे जन्म को साठ हजार वर्ष बीत चुके हैं...
English Translation: "...take him along with me, accompanied by the fourfold army. Sixty thousand years have passed since my birth, O Kaushika..."
श्लोक 11
कृच्छ्रेणोत्पादितश्चायं न रामं नेतुमर्हसि । चतुर्णामात्मजानां हि प्रीतिः परमिका मम ॥१-२०-११॥
हिन्दी व्याख्या: ...और बड़े कष्ट से यह पुत्र उत्पन्न हुआ है, इसलिए आप राम को न ले जाइए। मेरे इन चारों पुत्रों के प्रति मेरी परम अगाध प्रीति है।
English Translation: "...and he was produced with great difficulty; you ought not to take Rama. My utmost affection is indeed tied to all four of my sons."
श्लोक 12
ज्येष्ठे धर्मप्रधानेच न रामं नेतुमर्हसि । किंवीर्या राक्षसास्ते च कस्य पुत्राश्च के च ते ॥१-२०-१२॥
हिन्दी व्याख्या: उनमें जो ज्येष्ठ तथा धर्मपरायण हैं, उस राम को आप मत ले जाइए। वे राक्षस कितने पराक्रमी हैं, किसके पुत्र हैं और कौन हैं?
English Translation: "Especially to the eldest, who is righteous, you should not take Rama. What is the prowess of those demons, whose sons are they, and who are they?"
श्लोक 13
कथं प्रमाणाः के चैतान् रक्षन्ति मुनिपुंगव । कथं च प्रतिकर्तव्यं तेषां रामेण रक्षसाम् ॥१-२०-१३॥
हिन्दी व्याख्या: हे मुनिपुंगव! उनका आकार-प्रकार कैसा है, उनकी रक्षा कौन करता है तथा राम उन राक्षसों का प्रतिकार (सामना) किस प्रकार करेंगे?
English Translation: "What is their size, who protects them, O foremost of sages, and how is Rama to retaliate against those demons?"
श्लोक 14
मामकैर्वा बलैर्ब्रह्मन् मया वा कूटयोधिनाम् । सर्वं मे शंस भगवन् कथं तेषां मया रणे ॥१-२०-१४॥
हिन्दी व्याख्या: हे ब्रह्मन्! कपटयुद्ध करने वाले उन राक्षसों के साथ मेरे द्वारा, अथवा मेरी सेना द्वारा रणक्षेत्र में किस प्रकार सामना किया जाना चाहिए? हे भगवन! मुझे यह सब विस्तार से बताइए।
English Translation: "O Brahman, whether by my forces or by me, how should I stand in battle against those treacherous fighters? Tell me everything, O blessed one, how I must act..."
श्लोक 15
स्थातव्यं दुष्टभावानां वीर्योत्सिक्ता हि राक्षसाः । तस्य तद् वचनं श्रुत्वा विश्वामित्रोऽभ्यभाषत ॥१-२०-१५॥
हिन्दी व्याख्या: ...दुष्ट स्वभाव वाले और अपने बल के घमंड में चूर उन राक्षसों के विरुद्ध युद्ध में कैसे टिकना चाहिए?" राजा दशरथ के इस वचन को सुनकर विश्वामित्र जी बोले।
English Translation: "...against those evil-natured, valor-intoxicated demons in battle." Hearing those words of his, Vishwamitra replied.
श्लोक 16
पौलस्त्यवंशप्रभवो रावणो नाम राक्षसः । स ब्रह्मणा दत्तवरस्त्रैलोक्यं बाधते भृशम् ॥१-२०-१६॥
हिन्दी व्याख्या: पुलस्त्य ऋषि के वंश में उत्पन्न रावण नाम का एक राक्षस है, जिसे ब्रह्मा जी से वरदान मिला है और वह तीनों लोकों को बुरी तरह प्रताड़ित कर रहा है।
English Translation: "Born in the lineage of Pulastya is a demon named Ravana, who, granted boons by Brahma, severely torments the three worlds."
श्लोक 17
महाबलो महावीर्यो राक्षसैर्बहुभिर्वृतः । श्रूयते च महाराज रावणो राक्षसाधिपः ॥१-२०-१७॥
हिन्दी व्याख्या: हे महाराज! वह राक्षसों का राजा रावण महाबली, महापराक्रमी और अनेक राक्षसों से घिरा हुआ है, ऐसा सुना जाता है।
English Translation: "He is immensely strong, highly valorous, surrounded by numerous demons, and is heard of, O great king, as the lord of demons—Ravana."
श्लोक 18
साक्षाद्वैश्रवणभ्राता पुत्रो विश्रवसो मुनेः । यदा न खलु यज्ञस्य विघ्नकर्ता महाबलः ॥१-२०-१८॥
हिन्दी व्याख्या: वह मुनि विश्रवा का पुत्र और साक्षात् कुबेर (वैश्रवण) का भाई है। यद्यपि वह महाबली स्वयं यज्ञ का विघ्नकर्ता नहीं है...
English Translation: "He is the younger brother of Vaishravana (Kubera) and the son of the sage Vishrava. While that mighty one himself is not the direct obstructorable of the sacrifice..."
श्लोक 19
तेन संचोदितौ तौ तु राक्षसौ सुमहाबलौ । मारीचश्च सुबाहुश्च यज्ञविघ्नं करिष्यतः ॥१-२०-१९॥
हिन्दी व्याख्या: ...किंतु उसी की प्रेरणा से महाबली राक्षस मारीच और सुबाहु यज्ञ में विघ्न डालते हैं।
English Translation: "...yet, instigated by him, those two extremely mighty demons, Maricha and Subahu, cause obstructions to the sacrifice."
श्लोक 20
इत्युक्तो मुनिना तेन राजोवाच मुनिं तदा । नहि शक्तोऽस्मि संग्रामे स्थातुं तस्य दुरात्मनः ॥१-२०-२०॥
हिन्दी व्याख्या: मुनि विश्वामित्र द्वारा ऐसा कहे जाने पर राजा ने मुनि से कहा—"मैं उस दुरात्मा (रावण या उसके सेनापतियों) के साथ संग्राम में टिकने में समर्थ नहीं हूँ।"
English Translation: Thus addressed by the sage, the king then said to the sage: "I am indeed not capable of standing in battle against that wicked soul."
श्लोक 21
स त्वं प्रसादं धर्मज्ञ कुरुष्व मम पुत्रके । मम चैवाल्पभाग्यस्य दैवतं हि भवान् गुरुः ॥१-२०-२१॥
हिन्दी व्याख्या: अतः हे धर्मज्ञ! आप मेरे इस छोटे से पुत्र पर कृपा कीजिए। मुझ अल्पभाग्य वाले के लिए तो आप ही देवता और गुरु हैं।
English Translation: "Therefore, O knower of righteousness, show grace toward my little son. To me, of meager fortune, you are indeed my deity and preceptor."
श्लोक 22
देवदानवगन्धर्वा यक्षाः पतगपन्नगाः । न शक्ता रावणं सोढुं किं पुनर्मानवा युधि ॥१-२०-२२॥
हिन्दी व्याख्या: देवता, दानव, गंधर्व, यक्ष, पक्षी और नाग भी युद्ध में रावण को सहन (उसका मुकाबला) करने में समर्थ नहीं हैं, फिर मनुष्य तो किस गिनती में हैं?
English Translation: "Gods, demons, Gandharvas, Yakshas, birds, and serpents are not able to endure Ravana in battle; what then can humans do?"
श्लोक 23
स तु वीर्यवतां वीर्यमादत्ते युधि रावणः । तेन चाहं न शक्तोऽस्मि संयोद्धुं तस्य वा बलैः ॥१-२०-२३॥
हिन्दी व्याख्या: वह रावण युद्ध में बड़े-बड़े बलवानों के भी बल को छीन लेता है। इसी कारण न तो मैं उससे और न ही उसकी सेना से युद्ध करने में समर्थ हूँ।
English Translation: "That Ravana takes away the valor of the valiant in battle. Therefore, I am not capable of fighting him or his forces."
श्लोक 24
सबलो वा मुनिश्रेष्ठ सहितो वा ममात्मजैः । कथमप्यमरप्रख्यं संग्रामाणामकोविदम् ॥१-२०-२४॥
हिन्दी व्याख्या: हे मुनिश्रेष्ठ! सेना के साथ या अपने पुत्रों के साथ भी, देवताओं के समान कांति वाले तथा युद्ध से अपरिचित (अकोविद)...
English Translation: "O chief of sages, whether with my army or along with my sons, how can I somehow..."
श्लोक 25
बालं मे तनयं ब्रह्मन् नैव दास्यामि पुत्रकम् । अथ कालोपमौ युद्धे सुतौ सुन्दोपसुन्दयोः ॥१-२०-२५॥
हिन्दी व्याख्या: ...मेरे इस बालक और सुकुमार पुत्र को, हे ब्रह्मन्! मैं आपको कदापि नहीं दूँगा। वे दोनों (मारीच और सुबाहु) तो युद्ध में सुन्द और उपसुन्द के समान काल रूप हैं।
English Translation: "...give my young and tender son, O Brahman, to you? Furthermore, those two in battle are like the time of doom, resembling Sunda and Upasunda."
श्लोक 26
यज्ञविघ्नकरौ तौ ते नैव दास्यामि पुत्रकम् । मारीचश्च सुबाहुश्च वीर्यवन्तौ सुशिक्षितौ ॥१-२०-२६॥
हिन्दी व्याख्या: वे यज्ञ में विघ्न डालने वाले, पराक्रमी और युद्ध-विद्या में सुशिक्षित मारीच और सुबाहु हैं, इसलिए मैं अपने इस पुत्र को आपको नहीं दूँगा।
English Translation: "They are the obstructors of the sacrifice, powerful and well-trained—Maricha and Subahu. I will not give my son to you."
श्लोक 27
तयोरन्यतरं योद्धुं यास्यामि ससुहृद्गणः । अन्यथा त्वनुनेष्यामि भवन्तं सहबान्धवः ॥१-२०-२७॥
हिन्दी व्याख्या: उनमें से किसी एक से युद्ध करने के लिए मैं अपने सगे-सम्बन्धियों और मित्रों के साथ स्वयं जाऊँगा। अथवा इसके विपरीत, मैं अपने सम्बन्धियों के साथ हाथ जोड़कर आपको मनाने का प्रयास करूँगा (किंतु राम को नहीं दूँगा)।
English Translation: "I will go with my retinue of friends to fight either of them. Otherwise, along with my kinsmen, I will implore and persuade you otherwise."
श्लोक 28
इति नरपतिजल्पनात् द्विजेन्द्रं कुशिकसुतं सुमहान् विवेश मन्युः । सुहुत इव मखेऽग्निराज्यसिक्तः समभवदुज्ज्वलितो महर्षिवह्निः ॥१-२०-२८॥
हिन्दी व्याख्या: इस प्रकार राजा दशरथ के बार-बार ऐसा विलापयुक्त अनुरोध करने पर, कुशिकनंदन (विश्वामित्र) द्विजेन्द्र को अत्यंत भारी क्रोध आ गया। यज्ञ में भलीभाँति प्रज्वलित अग्नि पर जैसे घी डाल दिया जाए, उसी प्रकार उन महर्षि का क्रोध रूपी अग्नि और अधिक प्रदीप्त हो उठा।
English Translation: Thus, upon hearing the frantic pleading of the king, supreme among the twice-born, the son of Kushika (Vishwamitra) was filled with immense anger. Like a well-fed fire in a sacrifice sprinkled with clarified butter, the fire of the great sage's wrath blazed forth intensely.
