रामायणम्/बालकाण्डम्/सर्गः २१

श्रीरामायण पाठ — बालकाण्डम्/सर्गः २१

श्रीमद्वाल्मीकियरामायणे बालकाण्डे एकविंशः सर्गः ॥१-२१॥

श्लोक 1

तच्छ्रुत्वा वचनं तस्य स्नेहपर्याकुलाक्षरम् । समन्युः कौशिको वाक्यं प्रत्युवाच महीपतिम् ॥१-२१-१॥

हिन्दी व्याख्या: स्नेह के कारण जिनके अक्षर (शब्द) व्याकुल हो रहे थे, राजा दशरथ के उस वचन को सुनकर क्रोध से युक्त कौशिक (विश्वामित्र) ने राजा से यह बात कही।

English Translation: Hearing those words of the king, whose syllables were overwhelmed with affection, the angry Kaushika (Vishwamitra) replied to the monarch.

श्लोक 2

पूर्वमर्थं प्रतिश्रुत्य प्रतिज्ञां हातुमिच्छसि । राघवाणामयुक्तोऽयं कुलस्यास्य विपर्ययः ॥१-२१-२॥

हिन्दी व्याख्या: "पहले वचन देकर (हाँ कहकर) अब तुम अपनी प्रतिज्ञा को छोड़ना चाहते हो। रघुवंशियों के इस कुल में यह विपरीत आचरण (प्रतिज्ञा भंग) अत्यंत अनुचित है।"

English Translation: "Having promised the matter beforehand, you now wish to abandon your pledge. This perversion of conduct does not befit this lineage of the Raghus."

श्लोक 3

यदीदं ते क्षमं राजन् गमिष्यामि यथागतम् । मिथ्याप्रतिज्ञः काकुत्स्थ सुखी भव सुह्द्वृतः ॥१-२१-३॥

हिन्दी व्याख्या: "हे राजन्! यदि तुम्हें यही उचित लगता है, तो मैं जैसे आया था वैसे ही वापस चला जाता हूँ। हे काकुत्स्थ! तुम झूठी प्रतिज्ञा वाले बनकर अपने मित्रों और सगे-सम्बन्धियों के साथ सुखपूर्वक रहो।"

English Translation: "O king, if this is agreeable to you, I shall return the way I came. O descendant of Kakutstha, being false to your promise, live happily surrounded by your friends."

श्लोक 4

तस्य रोषपरीतस्य विश्वामित्रस्य धीमतः । चचाल वसुधा कृत्स्ना देवानां च भयं महत् ॥१-२१-४॥

हिन्दी व्याख्या: क्रोध से घिरे हुए उन बुद्धिमान विश्वामित्र के इस प्रकार क्षुब्ध होने पर संपूर्ण पृथ्वी काँप उठी और देवताओं के मन में भी महान भय उत्पन्न हो गया।

English Translation: When that wise Vishwamitra became filled with wrath, the entire earth trembled and a great fear seized the gods.

श्लोक 5

त्रस्तरूपं तु विज्ञाय जगत्सर्वं महानृषिः । नृपतिं सुव्रतो धीरो वसिष्ठो वाक्यमब्रवीत् ॥१-२१-५॥

हिन्दी व्याख्या: सम्पूर्ण जगत को भयभीत रूप में जानकर, दृढ़ व्रती और धीर महाऋषि वसिष्ठ ने राजा दशरथ से यह वचन कहा।

English Translation: Realizing that the entire world was terrified, the steadfast, patient, and great sage Vashistha spoke these words to the king.

श्लोक 6

इक्ष्वाकूणां कुले जातः साक्षाद् धर्म इवापरः । धृतिमान् सुव्रतः श्रीमान् न धर्मं हातुमर्हसि ॥१-२१-६॥

हिन्दी व्याख्या: "आप इक्ष्वाकुओं के कुल में उत्पन्न हुए हैं और साक्षात दूसरे धर्म के समान हैं। आप धैर्यवान, सुव्रत और श्रीमान हैं, अतः आपको धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए।"

English Translation: "Born in the lineage of the Ikshvakus, you are virtually righteousness incarnate. Endowed with fortitude, noble vows, and splendor, you ought not to abandon righteousness."

श्लोक 7

त्रिषु लोकेषु विख्यातो धर्मात्मा इति राघवः । स्वधर्मं प्रतिपद्यस्व नाधर्मं वोढुमर्हसि ॥१-२०-७ (1-21-7)॥

हिन्दी व्याख्या: "तीनों लोकों में राघव (दशरथ) धर्मात्मा के रूप में विख्यात हैं। आप अपने स्वधर्म का पालन कीजिए, अधर्म को अपने सिर पर ढोना आपके लिए उचित नहीं है।"

English Translation: "Raghava is renowned across the three worlds as a righteous soul. Follow your own sacred duty; you do not deserve to bear unrighteousness."

श्लोक 8

प्रतिश्रुत्य करिष्येति उक्तं वाक्यमकुर्वतः । इष्टापूर्तवधो भूयात् तस्माद् रामं विसर्जय ॥१-२१-८॥

हिन्दी व्याख्या: "'मैं करूँगा' ऐसा वचन देकर जो व्यक्ति अपनी बात को पूरा नहीं करता, उसके यज्ञ (इष्ट) और कुएँ-तालाब बनवाने आदि के पुण्य कर्मों (पूर्त) का नाश हो जाता है। इसलिए आप राम को विदा कर दीजिए।"

English Translation: "The sacrificial and charitable merits of one who promises 'I will do it' but fails to fulfill his word are destroyed. Therefore, send forth Rama."

श्लोक 9

कृतास्त्रमकृतास्त्रं वा नैनं शक्ष्यन्ति राक्षसाः । गुप्तं कुशिकपुत्रेण ज्वलनेनामृतं यथा ॥१-२१-९॥

हिन्दी व्याख्या: "चाहे राम अस्त्र-विद्या में निपुण हों या अभी अकुशल हों, राक्षस इन्हें छू भी नहीं सकेंगे; क्योंकि ये कुशिकपुत्र (विश्वामित्र) द्वारा उसी प्रकार सुरक्षित हैं जैसे अग्नि द्वारा अमृत सुरक्षित रहता है।"

English Translation: "Whether trained in weapons or not, the demons will not be able to harm him, for he is protected by the son of Kushika just as nectar is protected by fire."

श्लोक 10

एष विग्रहवान् धर्म एष वीर्यवतां वरः । एष विद्याधिको लोके तपसश्च परायणम् ॥१-२१-१०॥

हिन्दी व्याख्या: "ये (विश्वामित्र) साक्षात मूर्तिमान धर्म हैं, पराक्रमी पुरुषों में श्रेष्ठ हैं, संसार में विद्याओं में अत्यंत उन्नत हैं और तपस्या के परम आश्रय स्थल हैं।"

English Translation: "He is righteousness incarnate, the foremost among the valiant, supremely accomplished in lore in this world, and the ultimate refuge of penance."

श्लोक 11

एषोऽस्त्रान् विविधान् वेत्ति त्रैलोक्ये सचराचरे । नैनमन्यः पुमान् वेत्ति न च वेत्स्यन्ति केचन ॥१-२०-११ (1-21-11)॥

हिन्दी व्याख्या: "ये तीनों लोकों और चराचर जगत के सभी प्रकार के अस्त्रों को जानते हैं। जितना ये जानते हैं, उतना दूसरा कोई पुरुष नहीं जानता और न भविष्य में कोई जान सकेगा।"

English Translation: "He knows the various celestial weapons across the moving and unmoving three worlds. No other man knows them as he does, nor will anyone ever know."

श्लोक 12

न देवा नर्षयः केचिन्नामरा न च राक्षसाः । गन्धर्वयक्षप्रवराः सकिन्नरमहोरगाः ॥१-२१-१२॥

हिन्दी व्याख्या: "(विश्वामित्र जी के समान ज्ञान और अस्त्र-विद्या को) न देवता जानते हैं, न कोई ऋषि, न अमर, न राक्षस, न श्रेष्ठ गंधर्व, यक्ष, किन्नर और न ही महाउरग ही जानते हैं।"

English Translation: "Neither gods nor any sages, neither immortals nor demons, nor chief Gandharvas, Yakshas, Kinnaras, and great serpents..."

श्लोक 13

सर्वास्त्राणि कृशाश्वस्य पुत्राः परमधार्मिकाः । कौशिकाय पुरा दत्ता यदा राज्यं प्रशासति ॥१-२१-१३॥

हिन्दी व्याख्या: "प्रजापति कृशाश्व के परम धार्मिक पुत्र रूपी सभी अस्त्र प्राचीन काल में विश्वामित्र को तब प्रदान किए गए थे जब वे राज्य का शासन करते थे।"

English Translation: "...all the weapons, which are the sons of Krishashwa and highly righteous, were formerly given to Kaushika when he was ruling the kingdom."

श्लोक 14

तेऽपि पुत्राः कृशाश्वस्य प्रजापतिसुतासुताः । नैकरूपा महावीर्या दीप्तिमन्तो जयावहाः ॥१-२१-१४॥

हिन्दी व्याख्या: वे कृशाश्व के पुत्र (जो प्रजापति की पुत्रियों से उत्पन्न हुए थे) अनेक रूपों वाले, महापराक्रमी, देदीप्यमान और विजय प्रदान करने वाले हैं।

English Translation: Those sons of Krishashwa (born from the daughters of Prajapati) assume multiple forms, possess great valor, shine brightly, and bestow victory.

श्लोक 15

जया च सुप्रभा चैव दक्षकन्ये सुमध्यमे । ते सुवातेऽस्त्रशस्त्राणि शतं परमभास्वरम् ॥१-२१-१५॥

हिन्दी व्याख्या: दक्ष प्रजापति की सुंदर कटि वाली दो कन्याएँ थीं—जया और सुप्रभा। उन दोनों ने परम प्रकाशमान सौ अस्त्र-शस्त्रों को उत्पन्न किया।

English Translation: Jaya and Suprabha, the slender-waisted daughters of Daksha, gave birth to a hundred supreme and radiant weapons and missiles.

श्लोक 16

पञ्चाशतं सुताँल्लेभे जया लब्धवरा वरान् । वधायासुरसैन्यानामप्रमेयानुरूपिणः ॥१-२०-१६ (1-21-16)॥

हिन्दी व्याख्या: उनमें जया ने वरदान प्राप्त करके असुरों की सेनाओं का वध करने वाले, अप्रमेय और सुंदर रूप वाले पचास श्रेष्ठ पुत्रों (अस्त्रों) को प्राप्त किया।

English Translation: Jaya obtained fifty superior, immeasurable, and well-formed sons (weapons) capable of slaying demon armies, having secured boons.

श्लोक 17

सुप्रभाजनयच्चापि पुत्रान् पञ्चाशतं पुनः । संहारान् नाम दुर्धर्षान् दुराक्रामान् बलीयसः ॥१-२०-१७ (1-21-17)॥

हिन्दी व्याख्या: इसी प्रकार सुप्रभा ने भी 'संहार' नामक दुर्धर्ष (जिसे जीतना कठिन हो), दुराक्राम और अत्यंत बलवान पचास पुत्रों (अस्त्रों) को उत्पन्न किया।

English Translation: Suprabha likewise generated another fifty sons named 'Samhara', who are formidable, unassailable, and exceedingly powerful.

श्लोक 18

तानि चास्त्राणि वेत्त्येष यथावत् कुशिकात्मजः । अपूर्वाणां च जनने शक्तो भूयश्च धर्मवित् ॥१-२१-१८॥

हिन्दी व्याख्या: धर्मज्ञ कुशिकात्मज (विश्वामित्र) उन सभी अस्त्रों को भਲੀ-भाँति जानते हैं और नए अस्त्रों को उत्पन्न करने में भी पूरी तरह समर्थ हैं।

English Translation: The knower of righteousness, the son of Kushika, properly knows all those weapons and is fully capable of generating even new ones.

श्लोक 19

तेनास्य मुनिमुख्यस्य धर्मज्ञस्य महात्मनः । न किञ्चिदस्त्यविदितं भूतं भव्यम् च राघव ॥१-२०-१९ (1-21-19)॥

हिन्दी व्याख्या: इसलिए हे राघव! उन श्रेष्ठ मुनि, धर्मज्ञ और महात्मा के लिए भूत और भविष्य का कुछ भी अज्ञात नहीं है (वे सब कुछ जानते हैं)।

English Translation: Therefore, O Raghava, for that foremost of sages, knower of righteousness and great soul, nothing past or future remains unknown.

श्लोक 20

एवंवीर्यो महातेजा विश्वामित्रो महायशाः । न रामगमने राजन् संशयं गन्तुमर्हसि ॥१-२१-२०॥

हिन्दी व्याख्या: "ऐसे महान पराक्रमी, महातेजस्वी और महायशस्वी विश्वामित्र के साथ राम को भेजने में, हे राजन्! आपको तनिक भी संदेह नहीं करना चाहिए।"

English Translation: "Such is the prowess, immense radiance, and great fame of Vishwamitra. O king, you ought not to harbor any doubt regarding Rama's departure with him."

श्लोक 21

तेषां निग्रहणे शक्तः स्वयं च कुशिकात्मजः । तव पुत्रहितार्थाय त्वामुपेत्याभियाचते ॥१-२१-२१॥

हिन्दी व्याख्या: "वे कुशिकात्मज स्वयं उन राक्षसों का निग्रह (संहार) करने में समर्थ हैं, किंतु आपके पुत्र के कल्याण के लिए ही वे आपके पास आकर यह याचना कर रहे हैं।"

English Translation: "The son of Kushika is himself fully capable of subduing them; yet, for the welfare of your son, he has come to you and is pleading."

श्लोक 22

इति मुनिवचनात् प्रसन्नचित्तो रघुवृषभः च मुमोद पार्थिवाग्र्यः । गमनमभिरुरोच राघवस्य प्रथितयशाः कुशिकात्मजाय बुद्ध्या ॥१-२१-२२॥

हिन्दी व्याख्या: मुनि वसिष्ठ के इन वचनों को सुनकर राजाओं में श्रेष्ठ, प्रख्यात यशस्वी रघुवंश के मुख्य वीर (दशरथ) का चित्त प्रसन्न हो गया और उन्होंने हर्षित होकर अपनी बुद्धि से राम को विश्वामित्र के साथ भेजने की सहमति दे दी।

English Translation: Hearing these words of the sage, the preeminent king of the Raghus felt gratified at heart and rejoiced. With a wise mind, the renowned monarch gladly consented to the departure of Raghava with the son of Kushika.


इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदि्काव्ये बालकाण्डे एकविंशः सर्गः ॥१-२१॥