रामायणम्/बालकाण्डम्/सर्गः ३२

रामायणम्/बालकाण्डम्/सर्गः ३२

श्रीरामायण पाठ — बालकाण्डम्/सर्गः ३२

श्रीमद्वाल्मीकियरामायणे बालकाण्डे द्वात्रिंशः सर्गः ॥१-३२॥

श्लोक 1

ब्रह्मयोनिर्महानासीत् कुशो नाम महातपाः । अक्लिष्टव्रतधर्मज्ञः सज्जनप्रतिपूजकः ॥१-३२-१॥

हिन्दी व्याख्या: विश्वामित्र जी ने कहा—हे राम! ब्रह्मा की योनि (वंश) में महातपस्वी कुश नामक एक महान राजा हुए, जो अक्लिष्ट व्रत (बिना कष्ट के व्रत पालने वाले), धर्मज्ञ और सज्जनों का आदर करने वाले थे।

English Translation: Vishwamitra said: O Rama, in the lineage of Brahma, there was a great ascetic named King Kusha, who practiced pure vows, knew the law, and honoured the virtuous.

श्लोक 2

स महात्मा कुलीनायां युक्तायां सुमहाबलान् । वैदर्भ्यां जनयामास चतुरः सदृशान् सुतान् ॥१-३२-२॥

हिन्दी व्याख्या: उन महात्मा कुश ने विदर्भ देश की उच्चकुल में उत्पन्न राजकुमारी के साथ विवाह करके अपने ही समान चार महाबलों वाले पुत्रों को उत्पन्न किया।

English Translation: That great-souled Kusha, having married a princess of noble birth from Vidarbha, begot four sons of great strength who were his exact equals.

श्लोक 3

कुशाम्बं कुशनाभं च असूर्तरजसं वसुम् । दीप्तियुक्तान् महोत्साहान् क्षत्रधर्मचिकीर्षया ॥१-३२-३॥

हिन्दी व्याख्या: क्षत्रधर्म का पालन करने की इच्छा से उन्होंने कुशाम्ब, कुशनाभ, असूर्तरजस और वसु—इन चार दीप्तिमान् तथा महोत्साही पुत्रों को उत्पन्न किया।

English Translation: Wishing to uphold the duties of the warrior class (kshatriya-dharma), he begot Kushamba, Kushanabha, Asurtarajas, and Vasu—four radiant and intensely energetic sons.

श्लोक 4

तानुवाच कुशः पुत्रान् धर्मिष्ठान् सत्यवादिनः । क्रियतां पालनं पुत्रा धर्मं प्राप्स्यथ पुष्कलम् ॥१-३२-४॥

हिन्दी व्याख्या: धर्मिष्ठ और सत्यवादी उन पुत्रों से कुश ने कहा—"पुत्रो! तुम लोग प्रजा का पालन करो, इससे तुम्हें प्रचुर धर्म की प्राप्ति होगी।"

English Translation: Kusha spoke to those dutiful and truthful sons: "My sons, undertake the protection [of the realm], and you shall attain abundant righteousness."

श्लोक 5

कुशस्य वचनं श्रुत्वा चत्वारो लोकसत्तमाः । निवेशं चक्रिरे सर्वे पुराणां नृवरास्तदा ॥१-३२-५॥

हिन्दी व्याख्या: कुश के उस वचन को सुनकर लोक में श्रेष्ठ उन चारों नृश्रेसू (श्रेष्ठ राजाओं) ने अपनी-अपनी राजधानियों (नगरों) की स्थापना की।

English Translation: Hearing the words of Kusha, those four foremost of men and best of kings established their respective cities.

श्लोक 6

कुशाम्बस्तु महातेजाः कौशाम्बीमकरोत् पुरीम् । कुशनाभस्तु धर्मात्मा पुरं चक्रे महोदयम् ॥१-३२-६॥

हिन्दी व्याख्या: महातेजस्वी कुशाम्ब ने 'कौशाम्बी' नामक पुरी बसाई, और धर्मात्मा कुशनाभ ने 'महोदय' (कनौज) नामक महान नगर की स्थापना की।

English Translation: The immensely radiant Kushamba founded the city of Kaushambi, while the righteous Kushanabha built the great city of Mahodaya.

श्लोक 7

असूर्तरजसो नाम धर्मारण्यं महीपतिः । चक्रे पुरवरं राजा वसुनाम गिरिव्रजम् ॥१-३२-७॥

हिन्दी व्याख्या: असूर्तरजस नामक राजा ने 'धर्मारण्य' पुरी बसाई और वसु राजा ने श्रेष्ठ नगर 'गिरिव्रज' की स्थापना की।

English Translation: The king named Asurtarajas founded Dharmaranya, and King Vasu established the excellent city of Girivraja.

श्लोक 8

एषा वसुमती राम वसोस्तस्य महात्मनः । एते शैलवराः पञ्च प्रकाशन्ते समन्ततः ॥१-३२-८॥

हिन्दी व्याख्या: हे राम! उन्हीं महात्मा वसु की यह 'वसुमती' (पृथ्वी या पुरी) है, जिसके चारों ओर ये पाँच श्रेष्ठ पर्वत शोभा पा रहे हैं।

English Translation: This, O Rama, is the realm (Vasumati) of that great-souled Vasu, where these five principal mountains shine brilliantly on all sides.

श्लोक 9

सुमागधी नदी रम्या मागधान् विश्रुताऽऽययौ । पञ्चानां शैलमुख्यानां मध्ये मालेव शोभते ॥१-३२-९॥

हिन्दी व्याख्या: मागध देश में प्रसिद्ध रमणीय सुमागधी नदी बहती है, जो उन पाँचों मुख्य पर्वतों के बीच में ऐसी सुशोभित होती है मानो उनकी माला हो।

English Translation: The charming and renowned river Sumagadhi flows through Magadha, shining like a garland in the midst of those five foremost mountains.

श्लोक 10

सैषा हि मागधी राम वसोस्तस्य महात्मनः । पूर्वाभिचरिता राम सुक्षेत्रा सस्यमालिनी ॥१-३२-१०॥

हिन्दी व्याख्या: हे राम! महात्मा वसु की वही यह मागधी नदी है, जो प्राचीन काल से प्रवाहित है, उपजाऊ क्षेत्रों से युक्त और फसलों से सुसज्जित है।

English Translation: This very river Magadhi, O Rama, belongs to that great-souled Vasu; it has flowed from ancient times, O Rama, blessed with fertile fields and rich in crops.

श्लोक 11

कुशनाभस्तु राजर्षिः कन्याशतमनुत्तमम् । जनयामास घृताच्यां रघुनन्दन ॥१-३२-११॥

हिन्दी व्याख्या: हे रघुनन्दन! राजर्षि कुशनाभ ने अप्सरा घृताची के गर्भ से सौ उत्तम कन्याओं को उत्पन्न किया।

English Translation: The royal sage Kushanabha, O delight of the Raghu race, begot a hundred peerless daughters through the nymph Ghritachi.

श्लोक 12

तास्तु यौवनशालिन्यो रूपवत्यः स्वलङ्कृताः । उद्यानभूमिमागम्य प्रावृषीव शतह्रदाः ॥१-३२-१२॥

हिन्दी व्याख्या: वे सभी कन्याएँ यौवन से संपन्न, सुंदर रूप वाली और आभूषणों से अलंकृत थीं। वे उद्यान में ऐसे सुशोभित हुईं जैसे वर्षा ऋतु में बिजली चमकती है।

English Translation: Endowed with youth, beautiful, and richly adorned, they came to the garden grounds like flashes of lightning in the rainy season.

श्लोक 13

गायन्त्यो नृत्यमानाश्च वादयन्त्यस्तु राघव । आमोदं परमं जग्मुर्वराभरणभूषिताः ॥१-३२-१३॥

हिन्दी व्याख्या: हे राघव! वे उत्तम आभूषणों से भूषिता कन्याएँ गाती हुई, नाचती हुई और वाद्ययंत्र बजाती हुई परम आनंद को प्राप्त हो रही थीं।

English Translation: Singing, dancing, and playing musical instruments, O Raghava, those maidens adorned with choice ornaments experienced supreme joy.

श्लोक 14

अथ ताश्चारुसर्वाङ्ग्यो रूपेणाप्रतिमा भुवि । उद्यानभूमिमागम्य तारा इव घनान्तरे ॥१-३२-१४॥

हिन्दी व्याख्या: पृथ्वी पर जिनके सभी अंग सुंदर थे और जो रूप में अनुपम थीं, वे सब जब उद्यान में आईं, तो ऐसे प्रतीत हुईं जैसे बादलों के बीच तारे चमक रहे हों।

English Translation: Those whose limbs were exquisitely formed and whose beauty was unmatched on earth, upon entering the garden grounds, appeared like stars amidst the clouds.

श्लोक 15

ताः सर्वा गुणसम्पन्ना रूपयौवनसंयुताः । दृष्ट्वा सर्वात्मको वायुरिदं वचनमब्रवीत ॥१-३२-१५॥

हिन्दी व्याख्या: उन सभी गुणसंपन्न, रूप और यौवन से युक्त कन्याओं को देखकर सर्वस्वरूप वायुदेव ने उनसे यह वचन कहा—

English Translation: Seeing them all endowed with virtues, beauty, and youth, the all-pervading wind god (Vayu) spoke these words to them:

श्लोक 16

अहं वः कामये सर्वा भार्या मम भविष्यथ । मानुषस्त्यज्यतां भावो दीर्घमायुरवाप्स्यथ ॥१-३२-१६॥

हिन्दी व्याख्या: "मैं तुम सबकी कामना करता हूँ, तुम सब मेरी पत्नियाँ बन जाओ। मनुष्य होने का भाव छोड़ दो, इससे तुम दीर्घायु प्राप्त करोगी।"

English Translation: "I desire all of you; you shall become my wives. Abandon the mortal state, [and] you shall attain long life."

श्लोक 17

चलं हि यौवनं नित्यं मानुषेषु विशेषतः । अक्षययं यौवनं प्राप्ता अमर्यश्च भविष्यथ ॥१-३२-१७॥

हिन्दी व्याख्या: "मनुष्यों में यौवन विशेष रूप से अत्यंत चंचल (नश्वर) होता है। तुम लोग अक्षय यौवन को प्राप्त होकर अमर हो जाओगी।"

English Translation: "Youth among mortals is ever fleeting, especially so. Having attained imperishable youth, you shall also become immortals."

श्लोक 18

तस्य तद्वचनं श्रुत्वा वायोरक्लिष्टकर्मणः । अपहास्य ततो वाक्यं कन्याशतमथाब्रवीत् ॥१-३२-१८॥

हिन्दी व्याख्या: अक्लिष्टकर्मा वायुदेव के उस वचन को सुनकर उन सौ कन्याओं ने हँसते हुए उनसे यह उत्तर दिया—

English Translation: Hearing those words of Vayu of unfailing deeds, the hundred maidens laughed and spoke this reply:

श्लोक 19

अन्तश्चरसि भूतानां सर्वेषां सुरसतम । प्रभावज्ञाश्च ते सर्वाः किमर्थमवमन्यसे ॥१-३२-१९॥

हिन्दी व्याख्या: "हे सुरसत्तम! आप समस्त प्राणियों के भीतर संचार करने वाले (अंतरयामी) हैं, इसलिए हम सभी आपके प्रभाव को जानती हैं। फिर आप ऐसा उपहास क्यों कर रहे हैं?"

English Translation: "O foremost of gods, you move within all beings, and we all know your power. Why do you mock us thus?"

श्लोक 20

कुशनाभसुता देव सर्वाः समस्ताः सुरसत्तम । स्थानाच्च्यावयितुं देवं रक्षामस्तु तपो वयम् ॥१-३२-२०॥

हिन्दी व्याख्या: "हे सुरसत्तम! हम सब राजा कुशनाभ की पुत्रियाँ हैं। हे देव! हम आपके प्रभाव से अपने स्थान (धर्म) से विचलित नहीं होना चाहतीं, हमारी रक्षा हो और हमारा तप नष्ट न हो।"

English Translation: "O foremost of gods, we are all daughters of Kushanabha, O god. We do not wish to be dislodged from our position; may our austerity be protected."

श्लोक 21

मा भूत् स कालो दुर्मेधः पितरं सत्यवादिनम् । अवमन्य स्वधर्मेण स्वयं वरमुपास्महे ॥१-३२-२१॥

हिन्दी व्याख्या: "हे दुर्मिद्ध! ऐसा समय कभी न आए कि हम सत्यवादी पिता की अवहेलना करके स्वधर्म के विरुद्ध स्वयं ही अपने पति का वरण कर लें।"

English Translation: "May that time never come, O misguided one, when—disregarding our truthful father—we choose a husband ourselves, contrary to our righteous duty."

श्लोक 22

पिता हि प्रभुरस्माकं दैवतं परमं च सः । यस्य नो दास्यति पिता स नो भर्ता भविष्यति ॥१-३२-२२॥

हिन्दी व्याख्या: "हमारे पिता ही हमारे प्रभु हैं और वे ही हमारे परम देवता हैं। हमारे पिता जिसे हमारा दान करेंगे, वही हमारे पति होंगे।"

English Translation: "Our father is indeed our lord and our supreme deity. Whomever our father gives us to, he shall be our husband."

श्लोक 23

तासां तु वचनं श्रुत्वा हरिः परमकोपनः । प्रविश्य सर्वगात्राणि बभञ्ज भगवान् प्रभुः ॥१-३२-२३॥

हिन्दी व्याख्या: उन कन्याओं का यह वचन सुनकर भगवान वायुदेव अत्यधिक क्रोधित हो गए और उनके सभी अंगों में प्रवेश करके उन्हें टेढ़ा (भंग) कर दिया।

English Translation: Hearing their words, Lord Vayu, supremely wrathful, entered all their limbs and broke them, O lord.

श्लोक 24

अरत्निमात्राकृतयो भग्नगात्रा भयार्दिताः । ताः कन्या वायुना भग्ना विविशुर्नृपतेर्गृहम् । प्रविश्य च सुसम्भ्रान्ताः सलज्जाः सास्रलोचनाः ॥१-३२-२४॥

हिन्दी व्याख्या: वायु के कोप से जिनके अंग टूट गए थे और जो कोहनी भर (अरत्निमात्र) छोटी हो गई थीं (कुब्जा बन गई थीं), वे भय से आर्त, संभ्रान्त, लज्जित और आँसू भरी आँखों वाली कन्याएँ राजा (अपने पिता) के महल में गईं।

English Translation: Their bodies broken by Vayu so that they were reduced to the length of a forearm, their limbs fractured and tormented by fear, those maidens, broken by the wind god, entered the king's palace—greatly agitated, ashamed, and with tearful eyes.

श्लोक 25

स च ता दयिता भग्नाः कन्याः परमशोभनाः । दृष्ट्वा दीनास्तदा राजा सम्भ्रान्त इदमब्रवीत् ॥१-३२-२५॥

हिन्दी व्याख्या: अत्यंत सुंदर उन प्रिय कन्याओं को इस प्रकार भग्न (कुब्जा) और दीन अवस्था में देखकर राजा कुशनाभ संभ्रान्त होकर बोले—

English Translation: Seeing those beloved, supremely beautiful daughters thus broken and distressed, the king, greatly agitated, spoke these words:

श्लोक 26

किमिदं कथ्यतां पुत्र्यः को धर्ममवमन्यते । कुब्जाः केन कृताः सर्वाश्चेष्टन्त्यो नाभिभाषथ । एवं राजा विनिःश्वस्य समाधिं संदधे ततः ॥१-३२-२६॥

हिन्दी व्याख्या: "हे पुत्रियो! यह क्या हुआ? मुझे बताओ, धर्म का अनादर कौन कर रहा है? तुम सबको कुब्जा (टेढ़ा) किसने किया है? तुम चेष्टा तो कर रही हो, पर बोलती क्यों नहीं?" ऐसा कहकर राजा ने लंबी साँस ली और ध्यान (समाधि) के द्वारा उस रहस्य को जानने का प्रयास किया।

English Translation: "What is this, my daughters, tell me? Who is violating the law? Who has made you all hunchbacked? You are moving about, yet you do not speak." Thus sighing deeply, the king then concentrated his mind [to discover the cause].


इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे द्वात्रिंशः सर्गः ॥१-३२॥