Mahabharat Sanskrit Hindi



 महाभारत को "पंचम वेद" कहा जाता है। यह केवल एक युद्ध की गाथा नहीं, बल्कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का संपूर्ण शास्त्र है।

यहाँ महाभारत के कुछ सबसे महत्वपूर्ण अंश, उनके मूल संस्कृत श्लोक और हिंदी अर्थ के साथ दिए गए हैं:

१. श्रीमद्भगवद्गीता (धर्म का सार)

जब अर्जुन कुरुक्षेत्र के मैदान में मोहग्रस्त हो गए, तब भगवान कृष्ण ने यह प्रसिद्ध उपदेश दिया:

संस्कृत:

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥

हिंदी अर्थ:

हे भारत (अर्जुन)! जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अपने रूप की रचना करता हूँ अर्थात अवतार लेता हूँ।

२. कर्म का सिद्धांत

यह श्लोक जीवन के प्रति हमारे दृष्टिकोण को परिभाषित करता है:

संस्कृत:

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि

हिंदी अर्थ:

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए कर्म के फल की चिंता मत करो और कर्म न करने (आलस्य) में भी तुम्हारी आसक्ति न हो।

३. शांति पर्व (भीष्म पितामह का उपदेश)

महाभारत के शांति पर्व में भीष्म पितामह ने राजा के धर्म और सत्य के बारे में बताया है:

संस्कृत:

न राज्यं न च राजाऽसीत् न दण्डो न च दाण्डिक:।
धर्मेणैव प्रजा: सर्वा रक्षन्ति स्म परस्परम् ॥

हिंदी अर्थ:

एक समय ऐसा था जब न कोई राज्य था, न राजा, न कोई दण्ड था और न कोई अपराधी। सभी मनुष्य धर्म के मार्ग पर चलते हुए एक-दूसरे की रक्षा स्वयं करते थे।

४. यक्ष-युधिष्ठिर संवाद (जीवन के रहस्य)

जब यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा कि संसार में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है:

संस्कृत:

अहन्यहनि भूतानि गच्छन्ति यममन्दिरम्।
शेषाः स्थावरमिच्छन्ति किमाश्चर्यमतः परम् ॥

हिंदी अर्थ:

प्रतिदिन अनगिनत प्राणी मृत्यु के मुख में जा रहे हैं, फिर भी जो जीवित हैं, वे हमेशा यहाँ रहने की इच्छा करते हैं (जैसे वे अमर हों)। इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है?

महाभारत का मूल मंत्र (मंगलाचरण)

किसी भी शुभ कार्य या पाठ से पहले इसे पढ़ा जाता है:

संस्कृत:

नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।
देवीं सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत् ॥

हिंदी अर्थ:

भगवान नारायण, ऋषियों में श्रेष्ठ नर-नारायण, देवी सरस्वती और महर्षि वेदव्यास को नमस्कार करके ही 'जय' (महाभारत) का पाठ करना चाहिए।

महाभारत की सांख्यिकी (Quick Facts)

| विवरण | जानकारी 

| रचयिता | महर्षि वेदव्यास |

| कुल श्लोक | लगभग १,००,००० (एक लाख) |

| कुल पर्व | १८ पर्व |

| मुख्य विषय | कौरव-पाण्डव युद्ध और धर्म की स्थापना |

नमस्कार मित्रों आप सभीका स्वागत है, यहां पर हम संपूर्ण महाभारत को संस्कृत और हिन्दी में आप सभी की सुविधा के लिए दे रहें हैं। यह महाभारत की किताब गीताप्रेस गोरखपुर से प्रकाशित हुई है। यदि इस किसी प्रकार का दोष हो तो हमें सुचित करें हमें उसको यथा संभव सुधारने का प्रयाश  करेगें।

धन्यवाद 

मनोज पाण्डेय 

अध्यक्ष ज्ञान विज्ञान ब्रह्मज्ञान

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