रामायणम्/बालकाण्डम्/सर्गः २६

रामायणम्/बालकाण्डम्/सर्गः २६

श्रीरामायण पाठ — बालकाण्डम्/सर्गः २६

श्रीमद्वाल्मीकीयरामायणे बालकाण्डे षड्विंशः सर्गः ॥१-२६॥

श्लोक 1

मुनेर्वचनमक्लीबं श्रुत्वा नरवरात्मजः । राघवः प्राञ्जलिर्भूत्वा प्रत्युवाच दृढव्रतः ॥१-२६-१॥

हिन्दी व्याख्या: मुनि के उस तेजस्विपूर्ण (अक्लीब - पुरुषार्थयुक्त) वचन को सुनकर, नरश्रेष्ठ दशरथ के पुत्र, दृढ़व्रती राघव (राम) ने हाथ जोड़कर यह उत्तर दिया।

English Translation: Hearing that resolute speech of the sage, the prince among men, Raghava of firm vows, joining his palms, replied:

श्लोक 2

पितुर्वचननिर्देशात् पितुर्वचनगौरवात् । वचनं कौशिकस्येति कर्तव्यमविशङ्कया ॥१-२६-२॥

हिन्दी व्याख्या: "पिता के आदेश के निर्देश से तथा पिता के वचनों के गौरव से, कौशिक (विश्वामित्र) जी का यह वचन बिना किसी संकोच या शंका के अवश्य पूरा किया जाना चाहिए।"

English Translation: "By the command of my father and out of reverence for my father's word, the speech of Kaushika must be executed without hesitation."

श्लोक 13 (मूल क्रम के अनुसार)

अनुशिष्टोऽस्म्ययोध्यायां गुरुमध्ये महात्मना । पित्रा दशरथेनाहं नावज्ञेयं हि तद्वचः ॥१-२६-१३ (क्रमांक पाठ भेद अनुसार 3)॥

हिन्दी व्याख्या: "अयोध्या में गुरुजनों के मध्य महात्मा पिता दशरथ द्वारा मैं भली-भाँति अनुशासित किया गया हूँ, अतः उनके वचन की अवहेलना कदापि नहीं की जा सकती।"

English Translation: "I have been duly instructed in Ayodhya amidst the elders by my high-souled father Dasharatha, and his word can never be disregarded."

श्लोक 4

सोऽहं पितुर्वचः श्रुत्वा शासनाद् ब्रह्मवादिनः । करिष्यामि न संदेहस्ताटकावधमुत्तमम् ॥१-२६-४॥

हिन्दी व्याख्या: "इसलिए मैं पिता के वचन को सुनकर और ब्रह्मवादी (विश्वामित्र) की आज्ञा पाकर, ताटका का उत्तम वध अवश्य करूँगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।"

English Translation: "Therefore, hearing my father's word and at the command of the expounder of Brahman, I shall without a doubt perform the excellent slaying of Tataka."

श्लोक 5

गोब्राह्मणहितार्थाय देशस्य च हिताय च । तव चैवाप्रमेयस्य वचनं कर्तुमुद्यतः ॥१-२६-५॥

हिन्दी व्याख्या: "गौ और ब्राह्मणों के हित के लिए, देश के कल्याण के लिए तथा आप जैसे अप्रमेय (असीम प्रभावशाली) महामुनि के वचन का पालन करने के लिए मैं उद्यत हूँ।"

English Translation: "For the welfare of cows and brahmins, for the good of the country, and to fulfill the word of your immeasurable self, I am prepared to act."

श्लोक 6

एवमुक्त्वा धनुर्मध्ये बद्ध्वा मुष्टिमरिन्दमः । ज्याघोषमकरोत् तीव्रं दिशः शब्देन नादयन् ॥१-२६-६॥

हिन्दी व्याख्या: ऐसा कहकर, शत्रुनाशक राम ने अपने धनुष के मध्य भाग को मुट्ठी से पकड़ा और उसकी प्रत्यंचा (ज्येा) का तीव्र शब्द करके दसों दिशाओं को गूँजा दिया।

English Translation: Having spoken thus, the subduer of foes grasped the middle of his bow and made a sharp twang with the bowstring, making the directions resound with the sound.

श्लोक 7

तेन शब्देन वित्रस्तास्ताटकावनवासिनः । ताटका च सुसंक्रुद्धा तेन शब्देन मोहिता ॥१-२६-७॥

हिन्दी व्याख्या: उस शब्द से ताटका वन में रहने वाले जीव भयभीत हो गए और स्वयं ताटका उस शब्द से अत्यंत क्रोधित तथा मोहित (क्षुब्ध) हो उठी।

English Translation: Terrified by that sound, the inhabitants of Tataka's forest—and Tataka herself—became extremely furious and bewildered by that noise.

श्लोक 8

तं शब्दमभिनिध्याय राक्षसी क्रोधमूर्छिता । श्रुत्वा चाभ्यद्रवत् क्रुद्धा यत्र शब्दो विनिःसृतः ॥१-२६-८॥

हिन्दी व्याख्या: उस शब्द का संधान (पता) लगाकर क्रोध से मूर्छित हुई वह राक्षसी क्रुद्ध होकर उस ओर दौड़ी, जिधर से वह शब्द आया था।

English Translation: Locating that sound, the female demon, maddened by anger, furiously rushed toward the place from where the sound had emanated.

श्लोक 9

तां दृष्ट्वा राघवः क्रुद्धां विकृतां विकृताननाम् । प्रमाणेनातिवृद्धां च लक्ष्मणं सोऽभ्यभाषत ॥१-२६-९॥

हिन्दी व्याख्या: क्रोध में भरी हुई, विकृत रूप वाली, विकृत मुख वाली और आकार में अत्यधिक विशाल उस ताटका को देखकर राघव (राम) ने लक्ष्मण से कहा—

English Translation: Seeing her enraged, distorted, with a disfigured face, and immensely huge in size, Raghava spoke to Lakshmana:

श्लोक 10

पश्य लक्ष्मण यक्षिण्या भैरवं दारुणं वपुः । भिद्येरन् दर्शनादस्या भीरूणां हृदयानि च ॥१-२६-१०॥

हिन्दी व्याख्या: "हे लक्ष्मण! इस यक्षिणी के भयानक और दारुण शरीर को देखो। इसके दर्शन मात्र से डरपोक मनुष्यों के हृदय विदीर्ण हो सकते हैं।"

English Translation: "Behold, O Lakshmana, the terrifying and dreadful form of this female Yaksha. At the mere sight of her, the hearts of the timid would shatter."

श्लोक 11

एतां पश्य दुराधर्षां मायाबलसमन्विताम् । विनिवृत्तां करोम्यद्य हृतकर्णाग्रनासिकाम् ॥१-२६-११॥

हिन्दी व्याख्या: "इस दुराधर्ष (जिसे जीतना कठिन हो) और माया-बल से युक्त राक्षसी को देखो। आज मैं इसके कान और नाक के अग्रभाग को काटकर इसे शक्तिहीन (विनिवृत्ता) कर देता हूँ।"

English Translation: "Behold this unassailable one, endowed with illusory power. Today I shall render her incapacitated by severing the tips of her ears and nose."

श्लोक 12

न ह्येनामुत्सहे हन्तुं स्त्रीस्वभावेन रक्षिताम् । वीर्यं चास्या गतिं चैव हन्यामिति हि मे मतिः ॥१-२६-१२॥

हिन्दी व्याख्या: "मैं स्त्री-स्वभाव से रक्षित होने के कारण इसे मारने का साहस नहीं कर रहा हूँ, बल्कि मेरा विचार इसके पराक्रम (वीर्य) और गति को नष्ट करने का है।"

English Translation: "Indeed, I do not dare to slay her, protected as she is by her female nature; rather, my intention is to destroy her prowess and mobility."

श्लोक 13

एवं ब्रुवाणे रामे तु ताटका क्रोधमूर्छिता । उद्यम्य बाहू गर्जन्ती राममेवाभ्यधावत ॥१-२६-१३॥

हिन्दी व्याख्या: राम के ऐसा कहते ही क्रोध से मूर्छित ताटका अपनी दोनों भुजाओं को ऊपर उठाकर गर्जना करती हुई राम की ओर ही झपटी।

English Translation: While Rama was thus speaking, Tataka, maddened with rage, raising her arms and roaring, charged straight at Rama.

श्लोक 14

विश्वामित्रस्तु ब्रह्मर्षिर्हुंकारेणाभिभर्त्स्य ताम् । स्वस्ति राघवयोरस्तु जयं चैवाभ्यभाषत ॥१-२६-१४॥

हिन्दी व्याख्या: ब्रह्मर्षि विश्वामित्र ने 'हुंकार' शब्द से उसे डाँटा और 'राघव द्वय का कल्याण हो तथा विजय हो' ऐसा आशीर्वाद दिया।

English Translation: The Brahmarshi Vishwamitra chided her with a stern roar and pronounced, "May well-being be unto the two Raghavas, and may victory be theirs."

श्लोक 15

उद्धुन्वाना रजो घोरं ताटका राघवावुभौ । रजोमेघेन महता मुहूर्तं सा व्यमोहयत ॥१-२६-१५॥

हिन्दी व्याख्या: ताटका ने भयानक धूल उड़ाई और एक विशाल धूल के मेघ (गुबार) से मुहूर्त भर के लिए दोनों राम-लक्ष्मण को भ्रमित कर दिया।

English Translation: Kicking up dreadful dust, Tataka momentarily bewildered both the Raghavas with a massive cloud of dust.

श्लोक 16

ततो मायां समास्थाय शिलावर्षेण राघवौ । अवाकिरत् सुमहता ततश्चुक्रोध राघवः ॥१-२६-१६॥

हिन्दी व्याख्या: तब अपनी माया का आश्रय लेकर उसने दोनों भाइयों पर भारी पत्थरों की वर्षा (शिलावर्ष) की, जिससे राघव (राम) को क्रोध आ गया।

English Translation: Then, resorting to illusion, she showered a massive rain of stones upon the two Raghavas, whereupon Raghava grew angry.

श्लोक 17

शिलावर्षं महत् तस्याः शरवर्षेण राघवः । प्रतिवार्योपधावन्त्याः करौ चिच्छेद पत्रिभिः ॥१-२६-१७॥

हिन्दी व्याख्या: राघव ने उसके पत्थरों की भारी वर्षा को बाणों की वर्षा से रोक दिया और अपनी ओर दौड़ती हुई उस राक्षसी के दोनों हाथों को तीखे बाणों से काट डाला।

English Translation: Raghava warded off her heavy shower of stones with a shower of arrows, and with his feathered shafts, he severed the hands of her as she rushed toward him.

श्लोक 18

ततश्च्छिन्नभुजां श्रान्तामभ्याशे परिगर्जतीम् । सौमित्रिरकरोत् क्रोधाद्धृतकर्णाग्रनासिकाम् ॥१-२६-१८॥

हिन्दी व्याख्या: तब भुजाएँ कट जाने के कारण थकी हुई और पास आकर गर्जना करती हुई उस ताटका के कान और नाक के अग्रभाग को सौमित्रि (लक्ष्मण) ने क्रोध वश काट दिया।

English Translation: Then, with her arms severed, exhausted and roaring nearby, Saumitri (Lakshmana) in his anger deprived her of the tips of her ears and nose.

श्लोक 19

कामरूपधरा सा तु कृत्वा रूपाण्यनेकशः । अन्तर्धानं गता यक्षी मोहयन्ती स्वमायया ॥१-२६-१९॥

हिन्दी व्याख्या: कामावरूप धारण करने में सक्षम वह यक्षी अनेक प्रकार के रूप बदलकर अपनी माया से सबको मोहित करती हुई अंतर्धान हो गई।

English Translation: Capable of changing her form at will, that female Yaksha, assuming numerous forms and bewildering [them] with her illusion, vanished from sight.

श्लोक 20

अश्मवर्षं विमुञ्चन्ती भैरवं विचचार सा ॥ ततस्तावश्मवर्षेण कीर्यमाणौ समन्ततः ॥१-२६-२०॥

हिन्दी व्याख्या: वह भयानक पत्थरों की वर्षा करती हुई चारों ओर विचरने लगी। तब उन दोनों भाइयों पर चारों ओर से पत्थरों की वर्षा होने लगी...

English Translation: She roamed about, hurling a dreadful rain of stones. Then, as the two were pelted from all sides by the rain of stones...

श्लोक 21

दृष्ट्वा गाधिसुतः श्रीमानिदं वचनमब्रवीत् । अलंकार ते घृणया राम पापैषा दुष्टचारिणी ॥१-२६-२१॥

हिन्दी व्याख्या: ...यह देखकर श्रीमान गाधिनंदन (विश्वामित्र) ने यह वचन कहा—"हे राम! अब दया (घृणा) छोड़ो। यह दुष्ट आचरण वाली पापिनी यक्षी है।"

English Translation: ...seeing this, the glorious son of Gadhi spoke these words: "Enough of your hesitation, O Rama; this evil-behaving one is sinful."

श्लोक 22

यज्ञविघ्नकरी यक्षी पुरा वर्धेत मायया । वध्यतां तावदेवैषा पुरा संध्या प्रवर्तते ॥१-२६-२२॥

हिन्दी व्याख्या: "यह यज्ञ में विघ्न डालने वाली यक्षी कहीं अपनी माया से और अधिक न बढ़ जाए। इससे पहले कि संध्या (साँझ) हो जाए, इसका वध कर डालो।"

English Translation: "Lest this female Yaksha, an obstacle to sacrifices, grow further through her illusion, slay her right now before evening sets in."

श्लोक 23

रक्षांसि संध्याकाले तु दुर्धर्षाणि भवन्ति हि । इत्युक्तः स तु तां यक्षीमश्मवृष्ट्याभिवर्षणीम् ॥१-२६-२३॥

हिन्दी व्याख्या: "संध्याकाल में राक्षस दुर्धर्ष (अजेय और अत्यंत शक्तिशाली) हो जाते हैं।" मुनि के ऐसा कहने पर, पत्थरों की वर्षा कर रही उस यक्षी पर राम ने...

English Translation: "For demons become formidable at the time of dusk." Thus addressed, [he turned] upon that female Yaksha who was showering stones...

श्लोक 24

दर्शयञ्शब्दवेधित्वं तां रुरोध स सायकैः । सा रुद्धा बाणजालेन मायाबलसमन्विता ॥१-२६-२४॥

हिन्दी व्याख्या: शब्दवेधी बाण चलाने की अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए उसे अपने बाणों से रोक दिया। माया-बल से युक्त वह ताटका बाणों के जाल से घिर गई।

English Translation: ...and demonstrating his skill in sound-guided archery, he restrained her with his arrows. Entangled in the net of arrows, that illusion-wielding female...

श्लोक 25

अभिदुद्राव काकुत्स्थं लक्ष्मणं च विनेषुदी । तामापतन्तीं वेगेन विक्रान्तामशनीमिव ॥१-२६-२५॥

हिन्दी व्याख्या: ...और गर्जना करती हुई काकुत्स्थ (राम) तथा लक्ष्मण की ओर झपटी। वेगपूर्वक गिरती हुई बिजली के समान उस पराक्रमी राक्षसी को...

English Translation: ...roaring, rushed toward Kakutstha (Rama) and Lakshmana. As she charged forward with the speed and fury of a falling thunderbolt...

श्लोक 26

शरेणोरसि विव्याध सा पपात ममार च । तां हतां भीमसंकाशां दृष्ट्वा सुरपतिस्तदा ॥१-२६-२६॥

हिन्दी व्याख्या: ...राम ने अपने बाण से उसके वक्षःस्थल को बींध दिया। वह गिर पड़ी और मर गई। उस भयानक आकृति वाली ताटका को मरा हुआ देखकर देवराज इंद्र तथा...

English Translation: ...Rama pierced her chest with an arrow; she fell down and died. Seeing her of terrifying appearance slain, the Lord of Gods (Indra) then...

श्लोक 27

साधु साध्विति काकुत्स्थं सुराश्चाप्यभिपूजयन् । उवाच परमप्रीतः सहस्राक्षः पुरन्दरः ॥१-२६-२७॥

हिन्दी व्याख्या: ...सभी देवताओं ने 'साधु! साधु!' कहकर काकुत्स्थ (राम) की पूजा (प्रशंसा) की। परम प्रसन्न हुए सहस्राक्ष पुरन्दर (इन्द्र) ने कहा—

English Translation: ...and all the gods lauded Kakutstha, crying "Excellent, excellent!" Supremely pleased, the thousand-eyed Purandara (Indra) spoke:

श्लोक 28

सुराश्च सर्वे संहृष्टा विश्वामित्रमथाब्रुवन् । मुने कौशिक भद्रं ते सेन्द्राः सर्वे मरुद्गणाः ॥१-२६-२८॥

हिन्दी व्याख्या: सभी देवता अत्यंत हर्षित होकर विश्वामित्र से बोले—"हे मुनि कौशिक! आपका कल्याण हो। हम इंद्र सहित सभी मरुद्गण..."

English Translation: All the gods, overjoyed, then said to Vishwamitra: "O sage Kaushika, may you be blessed. We, along with Indra and all the Maruts..."

श्लोक 29

तोषिताः कर्मणानेन स्नेहं दर्शय राघवे । प्रजापतेः कृशाश्वस्य पुत्रान् सत्यपराक्रमान् ॥१-२६-२९॥

हिन्दी व्याख्या: "...इस कर्म से अत्यंत संतुष्ट हुए हैं। आप राघव पर अपना स्नेह प्रदर्शित करें। प्रजापति कृशाश्व के सत्यपराक्रमी पुत्रों (अस्त्रों) को..."

English Translation: "...are immensely gratified by this deed. Show your affection toward Raghava. Present the truthful and valorous sons of Prajapati Krishashwa..."

श्लोक 30

तपोबलभृतो ब्रह्मन् राघवाय निवेदय । पात्रभूतश्च ते ब्रह्मंस्तवानुगमने रतः ॥१-२६-३०॥

हिन्दी व्याख्या: "...जो तपस्या के बल से युक्त हैं, हे ब्रह्मन्! राघवाय (राम को) प्रदान कीजिए। हे ब्रह्मन्! ये (राम) आपके पात्र हैं और आपकी सेवा (अनुगमन) में तत्पर हैं।"

English Translation: "...endowed with the power of penance, O brahmin, to Raghava. For O brahmin, he is a worthy vessel and is devoted to following you."

श्लोक 31

कर्तव्यं सुमहत् कर्म सुराणां राजसूनुना । एवमुक्त्वा सुराः सर्वे जग्मुर्हृष्टा विहायसम् ॥१-२६-३१॥

हिन्दी व्याख्या: "इस राजपुत्र (राम) द्वारा देवताओं का एक बहुत बड़ा कार्य किया जाना है।" ऐसा कहकर सभी देवता प्रसन्नचित्त हो आकाश मार्ग से प्रस्थान कर गए।

English Translation: "A very great task of the gods is yet to be performed by this prince." Having spoken thus, all the gods joyfully departed to the skies.

श्लोक 32

विश्वामित्रं पूजयन्तस्ततः संध्या प्रवर्तते । ततो मुनिवरः प्रीतस्ताटकावधतोषितः ॥१-२६-३२॥

हिन्दी व्याख्या: विश्वामित्र जी की स्तुति करते हुए देवता गए और उधर संध्याकाल उपस्थित हो गया। तब ताटका के वध से संतुष्ट और प्रसन्न हुए मुनिवर विश्वामित्र ने...

English Translation: Honoring Vishwamitra, [they departed], and then dusk set in. Thereafter, the excellent sage, delighted by the slaying of Tataka...

श्लोक 33

मूर्ध्नि राममुपाघ्राय इदं वचनमब्रवी्त । इहाद्य रजनीं राम वसाम शुभदर्शन ॥१-२६-३३॥

हिन्दी व्याख्या: ...राम के मस्तक को सूँघकर (प्यार करके) उनसे यह वचन कहा—"हे शुभदर्शन राम! आज की रात हम यहीं निवास करें।"

English Translation: ...smelling Rama's head in affection, spoke these words: "Let us reside here tonight, O Rama of auspicious appearance."

श्लोक 34

श्वः प्रभाते गमिष्यामस्तदाश्रमपदं मम । विश्वामित्रवचः श्रुत्वा हृष्टो दशरथात्मजः ॥१-२६-३४॥

हिन्दी व्याख्या: "कल प्रातःकाल हम मेरे आश्रम-पद के लिए चलेंगे।" विश्वामित्र के इस वचन को सुनकर दशरथ के पुत्र (राम) बहुत हर्षित हुए।

English Translation: "Tomorrow at dawn we shall proceed to the precincts of my hermitage." Hearing the words of Vishwamitra, the son of Dasharatha was gladdened.

श्लोक 35

उवास रजनीं तत्र ताटकाया वने सुखम् । मुक्तशापं वनं तच्च तस्मिन्नेव तदाहनि । रमणीयं विबभ्राज यथा चैत्ररथं वनम् ॥१-२६-३५॥

हिन्दी व्याख्या: उन्होंने ताटका के उस वन में सुखपूर्वक वह रात बिताई। उसी दिन शाप मुक्त होने के कारण वह वन कुबेर के चैत्ररथ वन के समान अत्यंत रमणीय और सुशोभित हो गया।

English Translation: They spent that night very comfortably in Tataka's forest. Freed from the curse on that very day, that forest shone forth delightfully, resembling the Chaitraratha garden (of Kubera).

श्लोक 36

निहत्य तां यक्षसुतां स रामः प्रशस्यमानः सुरसिद्धसङ्घैः । उवास तस्मिन् मुनिना सहैव प्रभातवेलां प्रतिबोध्यमानः ॥१-२६-३६॥

हिन्दी व्याख्या: देवताओं और सिद्धों के समूहों द्वारा प्रशंसित उन राम ने, यक्ष-पुत्री ताटका को मारकर, मुनि के साथ ही उसी वन में निवास किया और प्रातःकाल मुनि द्वारा जगाए गए।

English Translation: Having slain that daughter of a Yaksha, and being praised by hosts of gods and Siddhas, Rama dwelt right there in that forest along with the sage, being awakened at the break of dawn.


इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे षड्विंशः सर्गः ॥१-२६॥