श्रीरामायण पाठ — बालकाण्डम्/सर्गः १८
श्लोक 1
निर्वृत्ते तु क्रतौ तस्मिन् हयमेधे महात्मनः । प्रतिगृह्यमरा भागान् प्रतिजग्मुर्यथागतम् ॥१-१८-१॥
हिन्दी व्याख्या: महात्मा राजा दशरथ का वह अश्वमेध यज्ञ पूरा होने पर, देवता अपने-अपने भाग (हविष्य) को ग्रहण करके जैसे आए थे वैसे ही वापस लौट गए।
English Translation: When that horse sacrifice of the noble-souled king was completed, the gods, having accepted their shares, returned as they had come.
श्लोक 2
समाप्तदीक्षानियमः पत्नीगणसमन्वितः । प्रविवेश पुरीं राजा सभृत्यबलवाहनः ॥१-१८-२॥
हिन्दी व्याख्या: दीक्षा और नियमों को समाप्त करके, राजा दशरथ अपनी रानियों, सेवकों, सेना और वाहनों सहित अयोध्या नगरी में प्रवेश कर गए।
English Translation: Having completed the vows of consecration, the king, accompanied by his wives, servants, army, and vehicles, entered the city.
श्लोक 3
यथार्हं पूजितास्तेन राज्ञा वै पृथिवीश्वराः । मुदिताः प्रययुर्देशान् प्रणम्य मुनिपुंगवम् ॥१-१८-३॥
हिन्दी व्याख्या: राजा दशरथ द्वारा यथारूप पूजित हुए पृथ्वी के अन्य राजा मुदित होकर और मुनि श्रेष्ठ ऋष्यशृंग को प्रणाम करके अपने-अपने देशों को चले गए।
English Translation: The kings of the earth, worshipped appropriately by King Dasaratha, joyfully departed for their countries after bowing to the foremost of sages.
श्लोक 4
श्रीमतां गच्छतां तेषां स्वगृहाणि पुरात् ततः । बलानि राज्ञां शुभ्राणि प्रहृष्टानि चकाशिरे ॥१-१८-४॥
हिन्दी व्याख्या: उस नगर से अपने-अपने घरों को जाते हुए उन शोभासम्पन्न राजाओं की उज्ज्वल और प्रहर्षित सेनाएँ बहुत सुशोभित हो रही थीं।
English Translation: As those glorious kings departed from the city to their homes, the radiant and joyful armies of the monarchs shone brightly.
श्लोक 5
गतेषु पृथिवीशेषु राजा दशरथः पुनः । प्रविवेश पुरीं श्रीमान् पुरस्कृत्य द्विजोत्तमान् ॥१-१८-५॥
हिन्दी व्याख्या: पृथ्वी के अन्य राजाओं के चले जाने पर, श्रीमान राजा दशरथ श्रेष्ठ ब्राह्मणों को आगे करके पुनः अपनी नगरी के भीतर गए।
English Translation: When the lords of the earth had departed, the glorious King Dasaratha re-entered the city, placing the foremost Brahmins at the forefront.
श्लोक 6
शान्तया प्रययौ सार्धमृशष्यशृङ्गः सुपूजितः । अमुगम्यमानो राज्ञा च सानुयात्रेण धीमता ॥१-१८-६॥
हिन्दी व्याख्या: भलीभाँति पूजित हुए मुनि ऋष्यशृंग अपनी पत्नी शांता के साथ, अपनी पूरी यात्रा-मंडली और धीमान राजा दशरथ द्वारा कुछ दूर तक पहुँचाए जाने पर अपने स्थान को प्रस्थान कर गए।
English Translation: Worshipped well, Rishyashringa departed along with Shanta, being escorted for some distance by the wise king and his retinue.
श्लोक 7
एवं विसृज्य तान् सर्वान् राजा सम्पूर्णमानसः । उवास सुखितस्तत्र पुत्रोत्पत्तिं विचिन्तयन् ॥१-१८-७॥
हिन्दी व्याख्या: इस प्रकार सभी को विदा करके, मनोवाञ्छित फल मिलने से संतुष्ट राजा दशरथ वहाँ पुत्र की उत्पत्ति का विचार करते हुए सुखपूर्वक निवास करने लगे।
English Translation: Having thus dismissed them all, the king, whose mind was fully gratified, lived there happily, contemplating the birth of a son.
श्लोक 8
ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतूनां षट् समत्ययुः । ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ ॥१-१८-८॥
हिन्दी व्याख्या: तदनंतर यज्ञ समाप्त होने के छह ऋतुएँ (एक वर्ष) बीत गईं। इसके बाद बारहवें महीने (चैत्र मास) की नवमी तिथि को...
English Translation: Then, upon the completion of the sacrifice, six seasons passed. Thereafter, in the twelfth month (Chaitra) on the ninth lunar day...
श्लोक 9
नक्षत्रेऽदितिदैवत्ये स्वोच्चसंस्थेषु पञ्चसु । ग्रहेषु कर्कटे लग्ने वाक्पताविन्दुना सह ॥१-१८-९॥
हिन्दी व्याख्या: अदिति देवता वाले पुनर्वसु नक्षत्र में, जब पाँच ग्रह अपनी उच्च राशियों में स्थित थे, कर्क लग्न में, और गुरु (वाक्पति) चंद्रमा के साथ विराजमान थे...
English Translation: ...under the constellation Punarvasu (whose deity is Aditi), with five planets in their exaltation signs, in the Cancer ascendant, while Jupiter was with the Moon...
श्लोक 10
प्रोद्यमाने जगन्नाथं सर्वलोकनमस्कृतम् । कौसल्याजनयद् रामं दिव्यलक्षणसंयुतम् ॥१-१८-१०॥
हिन्दी व्याख्या: ...और अभ्युदय काल चल रहा था, तब कौसल्या जी ने जगत के स्वामी, संपूर्ण लोकों द्वारा नमस्कार किए जाने योग्य, दिव्य लक्षणों से युक्त...
English Translation: ...as the day advanced, Kausalya gave birth to Rama, the lord of the universe, worshipped by all worlds, endowed with divine marks...
श्लोक 11
विष्णोरर्धं महाभागं पुत्रमैक्ष्वाकुनन्दनम् । लोहिताक्षं महाबाहुं रक्तोष्ठं दुन्दुभिस्वनम् ॥१-१८-११॥
हिन्दी व्याख्या: ...भगवान विष्णु के आधे अंश वाले, महाभाग्यशाली, इक्ष्वाकु वंश को आनंदित करने वाले, लाल नेत्रों वाले, विशाल भुजाओं वाले, लाल होठों वाले और दुन्दुभि (नगाड़े) के समान गंभीर स्वर वाले पुत्र (राम) को जन्म दिया।
English Translation: ...the fortunate son who was half of Vishnu, the joy of the Ikshvaku race, red-eyed, long-armed, with red lips and a voice like a war-drum.
श्लोक 12
कौसल्या शुशुभे तेन पुत्रेणामिततेजसा । यथा वरेण देवानामदितिर्वज्रपाणिना ॥१-१८-१२॥
हिन्दी व्याख्या: अमित तेजस्वी उस पुत्र से कौसल्या जी ऐसी सुशोभित हुईं, जैसे वज्रपाणि इंद्र रूपी वर को पाकर देवताओं की माता अदिति सुशोभित होती हैं।
English Translation: Kausalya shone brightly with that son of boundless splendor, just as Aditi shines with Indra, the wielder of the thunderbolt, the best of gods.
श्लोक 13
भरतो नाम कैकेय्यां जज्ञे सत्यपराक्रमः । साक्षाद् विष्णोश्चतुर्भागः सर्वैः समुदितो गुणैः ॥१-१८-१३॥
हिन्दी व्याख्या: कैकेयी के गर्भ से सत्यपराक्रमी, साक्षात् भगवान विष्णु के चतुर्थ अंश और सभी गुणों से संपन्न 'भरत' नामक पुत्र उत्पन्न हुआ।
English Translation: From Kaikeyi was born a son named Bharata, of true valor, being a fourth part of Vishnu himself, endowed with all virtues.
श्लोक 14
अथ लक्ष्मणशत्रुघ्नौ सुमित्राजनयत् सुतौ । वीरौ सर्वास्त्रकुशलौ विष्णोरर्धसमन्वितौ ॥१-१८-१४॥
हिन्दी व्याख्या: तत्पश्चात सुमित्रा जी ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न नामक दो वीर, समस्त अस्त्र-शस्त्रों में कुशल तथा विष्णु के आधे अंश (मिल-जुलकर आधे) से युक्त पुत्रों को जन्म दिया।
English Translation: Then Sumitra gave birth to two sons, Lakshmana and Shatrughna, who were brave, skilled in all weapons, and endowed with half of Vishnu's essence.
श्लोक 15
पुष्ये जातस्तु भरतो मीनलग्ने प्रसन्नधीः । सार्पे जातौ तु सौमित्री कुलीरेऽभ्युदिते रवौ ॥१-१८-१५॥
हिन्दी व्याख्या: प्रसन्न बुद्धि वाले भरत जी पुष्य नक्षत्र और मीन लग्न में उत्पन्न हुए, तथा सुमित्रा के दोनों पुत्र (लक्ष्मण और शत्रुघ्न) आश्लेषा (सार्प) नक्षत्र और कर्क लग्न में सूर्य के उदय होने पर उत्पन्न हुए।
English Translation: Bharata of cheerful mind was born under Pushya Nakshatra in Meena Lagna (Pisces ascendant), while the two sons of Sumitra were born under Ashlesha (Sarpa) Nakshatra when the Sun had risen in Karka Lagna (Cancer).
श्लोक 16
राजः पुत्रा महात्मानश्चत्वारो जज्ञिरे पृथक् । गुणवन्तोऽनुरूपाश्च रुच्या प्रोष्ठपदोपमाः ॥१-१८-१६॥
हिन्दी व्याख्या: राजा दशरथ के वे चारों महाप्राण और महात्मा पुत्र अलग-अलग उत्पन्न हुए। वे सब-के-सब गुणवान, रूपवान और अपनी कांति में पूर्वभाद्रपद (प्रोष्ठपद) नक्षत्र के समान प्रकाशमान थे।
English Translation: Thus four great-souled sons of the king were born separately. They were virtuous, handsome, and comparable in brilliance to the constellation Proshthapada.
श्लोक 17
जगुः कलं च गन्धर्वा ननृतुश्चाप्सरोगणाः । देवदुन्दुभयो नेदुः पुष्पवृष्टिश्च खात् पतत् ॥१-१८-१७॥
हिन्दी व्याख्या: गंधर्व मधुर स्वर में गाने लगे, अप्सराओं के समूह नृत्य करने लगे, देवताओं के नगाड़े बज उठे और आकाश से फूलों की वर्षा होने लगी।
English Translation: Gandharvas sang sweetly, groups of Apsaras danced, celestial drums resounded, and a shower of flowers fell from the sky.
श्लोक 18
उत्सवश्च महानासीदयोध्यायां जनाकुलः । रथ्याश्च जनसम्बाधा नटनर्तकसंकुलाः ॥१-१८-१८॥
हिन्दी व्याख्या: जनता से परिपूर्ण अयोध्या में एक महान उत्सव मनाया गया। मार्ग मनुष्यों की भीड़ से तथा नटों और नर्तकों से भर गए।
English Translation: There was a grand festival in the crowded city of Ayodhya. The streets were packed with people and thronged with actors and dancers.
श्लोक 19
गायनैश्च विराविण्यो वादनैश्च तथापरैः । विरेजुर्विपुलास्तत्र सर्वरत्नसमन्विताः ॥१-१८-१९॥
हिन्दी व्याख्या: वहाँ गाने वालों के गान और विभिन्न प्रकार के वाद्यों की ध्वनियों से गूँजती हुई, सभी रत्नों से सुसज्जित विशाल सड़कें बहुत सुशोभित हो रही थीं।
English Translation: Resounding with singers and various musical instruments, the broad streets there, adorned with all kinds of gems, shone brilliantly.
श्लोक 20
प्रदेयांश्च ददौ राजा सूतमागधवन्दिनाम् । ब्राह्मणेभ्यो ददौ वित्तम् गोधनानि सहस्रशः ॥१-१८-२०॥
हिन्दी व्याख्या: राजा ने सूत, मागध और वंदिजनों (चारणों) को मनचाहे दान दिए तथा ब्राह्मणों को धन और हजारों की संख्या में गौएँ दान में दीं।
English Translation: The king gave generous gifts to bards, genealogists, and panegyrists, and gave wealth and thousands of cows to the Brahmins.
श्लोक 21
अतीत्यैकादशाहं तु नामकर्म तथाकरोत् । ज्येष्ठं रामं महात्मानं भरतं कैकयीसुतम् ॥१-१८-२१॥
हिन्दी व्याख्या: ग्यारह दिन बीत जाने पर (बारहवें दिन) राजा ने नामकरण संस्कार किया। महात्मा ज्येष्ठ पुत्र का नाम 'राम', कैकेयी के पुत्र का नाम 'भरत'...
English Translation: After passing eleven days, he performed the naming ceremony. The eldest, noble-souled son was named Rama, Kaikeyi's son Bharata...
श्लोक 22
सौमित्रिं लक्ष्मणमिति शत्रुघ्नमपरं तथा । वसिष्ठः परमप्रीतो नामानि कुरुते तदा ॥१-१८-२२॥
हिन्दी व्याख्या: ...सुमित्रा के पुत्र का नाम 'लक्ष्मण' और दूसरे पुत्र का नाम 'शत्रुघ्न'—इस प्रकार परम प्रसन्न हुए गुरु वसिष्ठ जी ने उस समय इनके नाम रखे।
English Translation: ...Sumitra's son Lakshmana, and the other as Shatrughna—these names were given at that time by the supremely pleased Sage Vashistha.
श्लोक 23
ब्राह्मणान् भोजयामास पौराजानपदानपि । अददद् ब्राह्मणानां च रत्नौघमलं बहु ॥१-१८-२३॥
हिन्दी व्याख्या: उन्होंने ब्राह्मणों तथा नगर और जनपद के लोगों को भोजन कराया और ब्राह्मणों को अत्यधिक रत्न तथा धन दान में दिया।
English Translation: He fed Brahmins as well as citizens and country folk, and bestowed abundant heaps of gems upon the Brahmins.
श्लोक 24
तेषां जन्मक्रियादीनि सर्वकर्माण्यकारयत् । तेषां केतुरिव ज्येष्ठो रामो रतिकरः पितुः ॥१-१८-२४॥
हिन्दी व्याख्या: राजा ने उनके जन्म-संस्कार आदि सभी कर्म कराए। उनमें ज्येष्ठ पुत्र राम अपने पिता के लिए आनंद बढ़ाने वाले और कुल की ध्वजा (केतु) के समान थे।
English Translation: He caused all ceremonies such as birth rites to be performed for them. Among them, the eldest Rama, who gave joy to his father, was like a banner for the lineage.
श्लोक 25
बभूव भूयो भूतानां स्वयम्भूरिव सम्मतः । सर्वे वेदविदः शूराः सर्वे लोकहिते रताः ॥१-१८-२५॥
हिन्दी व्याख्या: वे समस्त प्राणियों के लिए ब्रह्मा जी के समान अत्यंत आदरणीय हो गए। वे सभी वेदों के ज्ञाता, शूरवीर और संपूर्ण संसार के हित में तत्पर थे।
English Translation: He became as revered by all beings as Svayambhu (Brahma). All of them were knowers of the Vedas, brave, and devoted to the welfare of the world.
श्लोक 26
सर्वे ज्ञानोपसम्पन्नाः सर्वे समुदिता गुणैः । तेषामपि महातेजा रामः सत्यपराक्रमः ॥१-१८-२६॥
हिन्दी व्याख्या: वे सभी ज्ञान से संपन्न और समस्त गुणों से युक्त थे। उनमें भी महातेजस्वी और सत्यपराक्रमी श्री राम...
English Translation: All of them were endowed with knowledge and possessed all virtues. Among them too, the immensely radiant and truly valiant Rama...
श्लोक 27
इष्टः सर्वस्य लोकस्य शशाङ्क इव निर्मलः । गजस्कन्धेऽश्वपृष्ठे च रथचर्यासु सम्मतः ॥१-१८-२७॥
हिन्दी व्याख्या: ...संपूर्ण जगत के प्रिय और निर्मल चंद्रमा के समान थे। वे हाथी की पीठ पर, घोड़े की पीठ पर और रथ चलाने में (सवारी में) अत्यंत कुशल थे।
English Translation: ...was dear to the whole world, pure like the moon, and accomplished in riding elephants and horses, and in chariot driving.
श्लोक 28
धनुर्वेदे च निरतः पितुः शुश्रूषणे रतः । बाल्यात् प्रभृति सुस्निग्धो लक्ष्मणो लक्ष्मिवर्धनः ॥१-१८-२८॥
हिन्दी व्याख्या: वे धनुर्विद्या (धनुर्वेद) में तत्पर और पिता की सेवा में लीन रहते थे। शोभा बढ़ाने वाले लक्ष्मण जी बाल्यावस्था से ही श्रीराम के प्रति अत्यंतस्निग्ध (प्रेमी) थे।
English Translation: He was devoted to archery and to serving his father. Lakshmana, who enhanced prosperity, was very affectionate toward Rama from childhood.
श्लोक 29
रामस्य लोकरामस्य भ्रातुर्ज्येष्ठस्य नित्यशः । सर्वप्रियकरस्तस्य रामस्यापि शरीरतः ॥१-१८-२९॥
हिन्दी व्याख्या: संसार को आनंद देने वाले (लोकराम) अपने ज्येष्ठ भाई श्रीराम के वे सदैव सभी प्रिय कार्य करते थे। यहाँ तक कि वे श्रीराम के शरीर के समान प्रिय थे।
English Translation: Always doing what was dear to his elder brother Rama, who delighted the world, Lakshmana was as dear to Rama as his own body.
श्लोक 30
लक्ष्मणो लक्ष्मिसम्पन्नो बहिःप्राण इवापरः । न च तेन विना निद्रां लभते पुरुषोत्तमः ॥१-१८-३०॥
हिन्दी व्याख्या: लक्ष्मी संपन्न लक्ष्मण जी ऐसे प्रतीत होते थे मानो राम के शरीर से बाहर निकले हुए उनके दूसरे प्राण हों। पुरुषोत्तम राम उनके बिना नींद भी प्राप्त नहीं करते थे।
English Translation: Endowed with auspicious marks, Lakshmana was like Rama's external breath. The best of men (Rama) could not sleep without him.
श्लोक 31
मृष्टमन्नमुपानीतमश्नाति न हि तं विना । यदा हि हयमारूढो मृगयां याति राघवः ॥१-१८-३१॥
हिन्दी व्याख्या: कितना भी स्वादिष्ट भोजन आने पर भी राम लक्ष्मण के बिना भोजन नहीं करते थे। जब कभी राघव (राम) घोड़े पर सवार होकर शिकार खेलने जाते थे...
English Translation: Even when delicious food was brought, he would not eat without him. Whenever Raghava (Rama) mounted a horse and went hunting...
श्लोक 32
अथैनं पृष्ठतोऽभ्येति सधनुः परिपालयन् । भरतस्यापि शत्रुघ्नो लक्ष्मणावरजो हि सः ॥१-१८-३२॥
हिन्दी व्याख्या: ...तब लक्ष्मण जी धनुष लेकर उनकी रक्षा करते हुए उनके पीछे-पीछे चलते थे। शत्रुघ्न जी भरत के छोटे भाई थे...
English Translation: ...then Lakshmana would follow him from behind, armed with a bow and protecting him. Shatrughna was the younger brother of Bharata...
श्लोक 33
प्राणैः प्रियतरो नित्यं तस्य चासीत् तथा प्रियः । स चतुर्भिर्महाभागैः पुत्रैर्दशरथः प्रियैः ॥१-१८-३३॥
हिन्दी व्याख्या: ...जो भरत को अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय थे और शत्रुघ्न को भी भरत उतने ही प्रिय थे। अपने उन चारों महाभाग्यशाली और प्रिय पुत्रों के साथ राजा दशरथ...
English Translation: ...and was ever dearer to him than his life, and Bharata was equally dear to him. With those four immensely fortunate and beloved sons, King Dasaratha...
श्लोक 34
बभूव परमप्रीतो देवैरिव पितामहः । ते यदा ज्ञानसंपन्नाः सर्वे समुदिता गुणैः ॥१-१८-३४॥
हिन्दी व्याख्या: ...ऐसे परम प्रसन्न हुए, जैसे देवताओं के साथ ब्रह्मा जी प्रसन्न होते हैं। जब वे चारों पुत्र ज्ञान संपन्न और सभी गुणों से युक्त हो गए...
English Translation: ...became supremely joyful, just like Brahma with the gods. When those sons became accomplished in knowledge and endowed with all virtues...
श्लोक 35
ह्रीमन्तः कीर्तिमन्तश्च सर्वज्ञा दीर्घदर्शिनः । तेषामेवंप्रभावाणां सर्वेषां दीप्ततेजसाम् ॥१-१८-३५॥
हिन्दी व्याख्या: ...वे लज्जाशील, कीर्तिमान, सर्वज्ञ और दूरदर्शी थे। ऐसे महाप्रभावी और दीप्त तेजस्वी उन सभी पुत्रों को देखकर...
English Translation: ...modest, glorious, omniscient, and farsighted—seeing all those sons of such mighty influence and blazing splendor...
श्लोक 36
पिता दशरथो हृष्टो ब्रह्मा लोकाधिपो यथा । ते चापि मनुजव्याघ्रा वैदिकाध्ययने रताः ॥१-१८-३६॥
हिन्दी व्याख्या: ...लोकपाल ब्रह्मा जी की तरह राजा दशरथ बहुत प्रसन्न थे। वे मनुष्यों में श्रेष्ठ चारों भाई वेदों के अध्ययन में लीन रहते थे।
English Translation: ...their father Dasaratha rejoiced, just like Brahma, the lord of the worlds. Those tigers among men were devoted to the study of the Vedas.
श्लोक 37
पितृशुश्रूषणरता धनुर्वेदे च निष्ठिताः । अथ राजा दशरथस्तेषां दारक्रियां प्रति ॥१-१८-३७॥
हिन्दी व्याख्या: वे पिता की सेवा में तत्पर और धनुर्विद्या में निपुण थे। तदनंतर धर्मात्मा राजा दशरथ अपने गुरु (वसिष्ठ) और संबंधियों के साथ उनके विवाह (दारक्रिया) के विषय में...
English Translation: Devoted to serving their father and proficient in archery, the righteous King Dasaratha, along with his preceptor and relatives, began to think...
श्लोक 38
चिन्तयामास धर्मात्मा सोपाध्यायः सबान्धवः । तस्य चिन्तयमानस्य मन्त्रिमध्ये महात्मनः ॥१-१८-३८॥
हिन्दी व्याख्या: ...विचार करने लगे। जब वे महात्मा राजा मंत्रियों के बीच में बैठे यह विचार कर रहे थे...
English Translation: ...concerning their marriage ceremonies. While that noble-souled king was thus reflecting in the midst of his ministers...
श्लोक 39
अभ्यागच्छन्महातेजो विश्वामित्रो महामुनिः । स राज्ञो दर्शनाकाङ्क्षी द्वाराध्यक्षानुवाच ह ॥१-१८-३९॥
हिन्दी व्याख्या: ...तभी महातेस्वी महामुनि विश्वामित्र वहाँ आ पहुँचे। वे राजा के दर्शन की इच्छा रखते हुए द्वारपालों से बोले—
English Translation: ...the immensely radiant and great sage Vishwamitra arrived. Desiring an audience with the king, he said to the gatekeepers:
श्लोक 40
शीघ्रमाख्यात मां प्राप्तं कौशिकं गाधिनः सुतम् । तच्छ्रुत्वा वचनं तस्य राज्ञो वेश्म प्रदुद्रुवुः ॥१-१८-४०॥
हिन्दी व्याख्या: "शीघ्र जाकर राजा से कहो कि गाधि के पुत्र कौशिक (विश्वामित्र) आए हैं।" उनका यह वचन सुनकर द्वारपाल दौड़ते हुए राजा के भवन में गए।
English Translation: "Promptly announce that I have arrived—Kaushika, the son of Gadhi." Hearing those words, they rushed into the king's palace.
श्लोक 41
संभ्रान्तमनसः सर्वे तेन वाक्येन चोदिताः । ते गत्वा राजभवनं विश्वामित्रमृषिं तदा ॥१-१८-४१॥
हिन्दी व्याख्या: उनके उस वाक्य से प्रेरित होकर वे सभी द्वारपाल संभ्रमित मन से राजभवन में गए और महर्षि विश्वामित्र के आगमन की सूचना दी।
English Translation: Stirred by those words with agitated minds, they went to the royal palace and reported the arrival of the sage Vishwamitra to the king.
श्लोक 42
प्राप्तमावेदयामासुर्नृपायेक्ष्वाकवे तदा । तेषां तद्वचनं श्रुत्वा सपुरोधाः समाहितः ॥१-१८-४२॥
हिन्दी व्याख्या: उन्होंने इक्ष्वाकुवंशी राजा दशरथ से उनके आगमन का निवेदन किया। उनका वह वचन सुनकर पुरोहित (वसिष्ठ) के साथ एकाग्रचित्त हुए राजा...
English Translation: They informed the Ikshvaku king of his arrival. Hearing their words, the king, together with his priest, composed and...
श्लोक 43
प्रत्युज्जगाम संहृष्टो ब्रह्माणमिव वासवः । स दृष्ट्वा ज्वलितं दीप्त्या तापसं संशितव्रतम् ॥१-१८-४३॥
हिन्दी व्याख्या: ...इन्द्र जैसे ब्रह्मा जी की अगवानी करते हैं, वैसे ही अत्यंत प्रसन्न होकर उनकी अगवानी के लिए आगे बढ़े। अपनी दीप्ति से प्रज्वलित और संशितव्रत (कठिन व्रतधारी) उन तपस्वी को देखकर...
English Translation: ...joyfully went forth to meet him, just as Indra approaches Brahma. Seeing that ascetic blazing with splendor and firm in his vows...
श्लोक 44
प्रहृष्टवदनो राजा ततोऽर्घ्यमुपहारयत् । स राज्ञः प्रतिगृह्यार्घ्यं शास्त्रदृष्टेन कर्मणा ॥१-१८-४४॥
हिन्दी व्याख्या: ...प्रसन्न मुख वाले राजा ने उन्हें अर्घ्य समर्पित किया। विश्वामित्र जी ने शास्त्रोक्त विधि से राजा द्वारा दिए गए अर्घ्य को स्वीकार किया।
English Translation: ...the king with a joyful face presented water for welcoming (arghya). Accepting the arghya from the king according to scriptural rites...
श्लोक 45
कुशलं चाव्ययं चैव पर्यपृच्छन्नराधिपम् । पुरे कोशे जनपदे बान्धवेषु सुहृत्सु च ॥१-१८-४५॥
हिन्दी व्याख्या: ...और मुनि ने नराधिप राजा दशरथ से उनके नगर, खजाने, राज्य (जनपद), संबंधियों और मित्रों की कुशलता एवं अव्यय (अक्षुण्णता) के विषय में पूछा।
English Translation: ...the sage asked the monarch about his welfare and prosperity, as well as that of the city, treasury, realm, relatives, and friends.
श्लोक 46
कुशलं कौशिको राज्ञः पर्यपृच्छत् सुधार्मिकः । अपि ते संनताः सर्वे सामन्तरिपवो जिताः ॥१-१८-४६॥
हिन्दी व्याख्या: परम धार्मिक कौशिक (विश्वामित्र) ने राजा से पूछा—"क्या आपके सभी सामंत और शत्रु आपके सामने विनम रूप से जीते (पराजित) हुए हैं?"
English Translation: The highly righteous Kaushika asked the king about his well-being: "Are all your subordinate rulers submissive and your enemies conquered?"
श्लोक 47
दैवं च मानुषं चैव कर्म ते साध्वनुष्ठितम् । वसिष्ठं च समागम्य कुशलं मुनिपुङ्गवः ॥१-१८-४७॥
हिन्दी व्याख्या: "क्या आपके दैवीय और मानवीय कार्य भलीभाँति अनुष्ठित हो रहे हैं?" इसके बाद मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्र ने मुनि वसिष्ठ के पास जाकर उनकी भी कुशलता पूछी।
English Translation: "Are your divine and human undertakings being properly performed?" Having approached Vashistha, the foremost of sages, he also inquired about his welfare.
श्लोक 48
ऋषींश्च तान् यथान्यायं महाभाग उवाच ह । ते सर्वे हृष्टमनसस्तस्य राज्ञो निवेशनम् ॥१-१८-४८॥
हिन्दी व्याख्या: महाभाग्यशाली विश्वामित्र जी ने यथान्याय अन्य ऋषियों का भी कुशल-क्षेम पूछा। राजा द्वारा पूजित हुए वे सभी ऋषि प्रसन्न मन से राजभवन में...
English Translation: The highly fortunate sage then inquired after the other sages in due order. Worshipped by the king, all of them entered the king's palace...
श्लोक 49
विविशुः पूजितास्तेन निषेदुश्च यथार्हतः । अथ हृष्टमना राजा विश्वामित्रं महामुनिम् ॥१-१८-४९॥
हिन्दी व्याख्या: ...प्रवेश कर गए और यथायोग्य अपने आसनों पर बैठ गए। तब परमोदार और हृष्ट-मना राजा दशरथ ने महामुनि विश्वामित्र का आदर-सत्कार करते हुए...
English Translation: ...with joyful minds and seated themselves appropriately. Then the joyful king...
श्लोक 50
उवाच परमोदारो हृष्टस्तमभिपूजयन् । यथामृतस्य सम्प्राप्तिर्यथा वर्षमनूदके ॥१-१८-५०॥
हिन्दी व्याख्या: ...कहा—"जिस प्रकार अमृत की प्राप्ति हो जाए, जिस प्रकार सूखे (जलहीन) क्षेत्र में वर्षा हो जाए..."
English Translation: ...spoke to the great sage Vishwamitra, worshipping him joyfully: "Just as obtaining nectar, just as rain in a waterless land..."
श्लोक 51
यथा सदृशदारेषु पुत्रजन्माप्रजस्य वै । प्रणष्टस्य यथा लाभो यथा हर्षो महोदयः ॥१-१८-५१॥
हिन्दी व्याख्या: "...जिस प्रकार निःसंतान व्यक्ति को योग्य पत्नी से पुत्र की प्राप्ति हो जाए, जिस प्रकार खोई हुई वस्तु मिल जाए और महान हर्ष का लाभ हो..."
English Translation: "...just as the birth of a son to a childless person from a suitable wife, just as the recovery of something lost, just as supreme joy arising..."
श्लोक 52
तथैवागमनं मन्ये स्वागतं ते महामुने । कं च ते परमं कामं करोमि किमु हर्षितः ॥१-१८-५२॥
हिन्दी व्याख्या: "...आपका यह आगमन भी मैं वैसा ही मानता हूँ। हे महामुने! आपका स्वागत है। बताइए, अत्यंत प्रसन्न होकर मैं आपकी कौन सी परम इच्छा पूरी करूँ?"
English Translation: "...just so do I consider your arrival. Welcome to you, O great sage! What supreme desire of yours shall I fulfill, being rejoiced?"
श्लोक 53
पात्रभूतोऽसि मे विप्र दिष्ट्या प्राप्तोऽसि मानद । अद्य मे सफलं जन्म जीवितं च सुजीवितम् ॥१-१८-५३॥
हिन्दी व्याख्या: "हे विप्र! आप मेरे सत्कार के पात्र हैं। सौभाग्य से हे मानद! आप पधारे हैं। आज मेरा जन्म सफल हो गया और मेरा जीवन जीना सार्थक हो गया।"
English Translation: "O Brahmin, you are worthy of my hospitality. By good fortune, O bestower of honor, you have arrived. Today my birth is fruitful and my life is well-lived."
श्लोक 54
यस्माद् विप्रेन्द्रमद्राक्षं सुप्रभाता निशा मम । पूर्वं राजर्षिशब्देन तपसा द्योतितप्रभः ॥१-१८-५४॥
हिन्दी व्याख्या: "चूँकि मैंने आप जैसे श्रेष्ठ विप्र के दर्शन किए हैं, इसलिए आज की मेरी रात्रि (प्रभात) अत्यंत शुभ और सुंदर रूप से उदित हुई है। पूर्वकाल में आप तपस्या के तेज से प्रदीप्त 'राजर्षि' की उपाधि से जाने जाते थे..."
English Translation: "Since I have beheld you, the chief of Brahmins, this night of mine has dawned most auspiciously. Formerly, radiant through penance with the title of Rajarshi..."
श्लोक 55
ब्रह्मर्षित्वमनुप्राप्तः पूज्योऽसि बहुधा मया । तदद्भुतमभूद् विप्र पवित्रं परमं मम ॥१-१८-५५॥
हिन्दी व्याख्या: "...और अब आपने 'ब्रह्मर्षि' पद प्राप्त कर लिया है, इसलिए आप मेरे द्वारा अत्यधिक पूजनीय हैं। हे विप्र! आपका यह आगमन मेरे लिए अत्यंत अद्भुत और परम पवित्र है।"
English Translation: "...you have attained the state of a Brahmarshi, and you are worthy of my utmost worship. That has become wondrous and supremely purifying to me, O Brahmin."
श्लोक 56
शुभक्षेत्रगतश्चाहं तव संदर्शनात् प्रभो । ब्रूहि यत् प्रार्थितं तुभ्यं कार्यमागमनं प्रति ॥१-१८-५६॥
हिन्दी व्याख्या: "हे प्रभो! आपके दर्शन मात्र से मैं पवित्र क्षेत्र (तीर्थ) में पहुँचा हुआ सा अनुभव कर रहा हूँ। आप अपने आगमन का वह कार्य बताइए, जिसकी आपने मुझसे प्रार्थना की है।"
English Translation: "And I consider myself to have reached a holy place simply by your sight, O lord. Tell me what is prayed for by you regarding the purpose of your coming."
श्लोक 57
इच्छाम्यनुगृहीतोऽहं त्वदर्थं परिवृद्धये । कार्यस्य न विमर्शं च गन्तुमर्हसि सुव्रत ॥१-१८-५७॥
हिन्दी व्याख्या: "हे सुव्रत! मैं आपके द्वारा अनुगृहीत होना चाहता हूँ, अतः आप अपने कार्य की सिद्धि के लिए संकोच न करें। आपके कार्य में किसी प्रकार का विचार (विलंब) करना उचित नहीं है।"
English Translation: "I wish to be favored by you for the advancement of your purpose. You ought not to hesitate regarding your task, O strict observer of vows."
श्लोक 58
कर्ता चाहमशेषेण दैवतं हि भवान् मम । मम च अयमनुप्राप्तो महानभ्युदयो द्विज । तवागमनजः कृत्स्नो धर्मश्चानुत्तमो द्विज ॥१-१८-५८॥
हिन्दी व्याख्या: "आप मेरे लिए देवता के समान हैं, अतः आपके इस कार्य को मैं पूर्ण रूप से करूँगा। हे द्विज! आपके आगमन से मुझे महान अभ्युदय (कल्याण) प्राप्त हुआ है और आपके आगमन से उत्पन्न होने वाला सारा उत्तम धर्म भी मुझे प्राप्त हो गया है।"
English Translation: "I am the doer of it entirely, for you are indeed a deity to me. And a great prosperity has come to me, O Brahmin, along with the supreme merit born from your visit."
श्लोक 59
इति हृदयसुखं निशम्य वाक्यं श्रुतिसुखमात्मवता विनीतमुक्तम् । प्रथितगुणयशा गुणैर्विशिष्टः परमऋषिः परमं जगाम हर्षम् ॥१-१८-५९॥
हिन्दी व्याख्या: आत्मा को संतुष्ट करने वाले, कानों को प्रिय लगने वाले, आत्मवान (धैर्यवान) राजा दशरथ के इस विनीत और हृदयग्राही वचन को सुनकर, अपने यशस्वी गुणों से विशिष्ट परमऋषि (विश्वामित्र) को अत्यंत प्रसन्नता हुई।
English Translation: Hearing these heart-pleasing and ear-delighting words spoken with humility by the self-controlled king, the supreme sage, renowned for his virtues and distinction, experienced supreme joy.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे अष्टादशः सर्गः ॥१-१८॥
