याज्ञवल्क्यस्मृतिः/व्यवहाराध्यायः/विक्रीयासंप्रदानप्रकरणम्

गृहीतमूल्यं यः पण्यं क्रेतुर्नैव प्रयच्छति ।
सोदयं तस्य दाप्योऽसौ दिग्लाभं वा दिगागते । । २.२५४ । ।

विक्रीतं अपि विक्रेयं पूर्वक्रेतर्यगृह्णति ।
हानिश्चेत्क्रेतृदोषेण क्रेतुरेव हि सा भवेत् । । २.२५५ । ।

राजदैवोपघातेन पण्ये दोषं उपागते ।
हानिर्विक्रेतुरेवासौ याचितस्याप्रयच्छतः । । २.२५६ । ।

अन्यहस्ते च विक्रीय दुष्टं वादुष्टवद्यदि ।
विक्रीणीते दमस्तत्र मूल्यात्तु द्विगुणो भवेत् । । २.२५७ । ।

क्षयं वृद्धिं च वणिजा पण्यानां अविजानता ।
क्रीत्वा नानुशयः कार्यः कुर्वन्षड्भागदण्डभाक् । । २.२५८ ।

वयं स्याम पतयो रयीणाम्

ऋग्वेद 10/121/10

हम धन-ऐश्वर्यों के स्वामी होवें

रयि=धन= विद्या-धन, यश-धन, अर्थ-धन, तप-धन, पशु-धन, वीर्य, पुष्टि, सोम, श्री, ऐश्वर्य, चक्रवर्त्ति राज्य आदि धन, सुवर्ण के स्वामी हों।

धनतेरस बर्तन व गहने खरीदने का दिन नही| 

 अपितु वैद्य धन्वंतरि जयंती है! जिन्होंने दुनिया को आयुर्वेद का ज्ञान दिया: कुछ ने बिजनेस की नियत से जनता को गुमराह कर धनवंतरी शब्द का अपभ्रंश करके धनतेरस कर दिया. धनतेरस वास्तव में ऋषि धन्वंतरि का जन्मदिन है, जो आयुर्वेद के जनक है, किन्तु गुलामी काल मे हम इस दिन का वास्तविक अर्थ भूल गये और इसे वस्तुएं खरीदने का दिन बना दिया। ऋषि कहते हैं आयुर्वेद का पालन करो तो तुम्हारे जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि, आरोग्य, सुख, वैभव, अक्षय, यश, अपार धन बना रहेंगा!! इन्हीं कामनाओं के साथ मनाये जाने वाले " धनतेरस (धन्वंतरि ) पर्व, आयुर्वेद के जनक, आरोग्य के देवता, भगवान " धन्वंतरि जी के जन्मदिवस की सभी मित्र, इष्टजनों को अनंत शुभकामनायें

धन-तेरस(त्रयोदशी) की शुभकामनायें 🙏

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