रामायणम्/बालकाण्डम्/सर्गः ४५

रामायणम्/बालकाण्डम्/सर्गः ४५

श्रीरामायण पाठ — बालकाण्डम्/सर्गः ४५

श्रीमद्वाल्मीकियरामायणे बालकाण्डे पञ्चचत्वारिंशः सर्गः ॥१-४५॥

१. विश्वामित्रवचः श्रुत्वा राघवः सहलक्ष्मणः। विस्मयं परमं गत्वा विश्वामित्रमथाब्रवीत् ॥१॥

  • हिन्दी व्याख्या: विश्वामित्रजी के वचन सुनकर लक्ष्मणजी सहित श्रीराम ने परम विस्मय (आश्चर्य) को प्राप्त होकर विश्वामित्रजी से कहा—
  • English Translation: Having heard the words of Vishwamitra, Rama, along with Lakshmana, being filled with supreme wonder, spoke thus to Vishwamitra:

२. अत्यद्भुतमिदं ब्रह्मन् कथितं परमं त्वया। गङ्गावतरणं पुण्यं सागरस्यापि पूरणम् ॥२॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे ब्रह्मन्! आपके द्वारा यह गंगावतरण और सागर के पूरण की अत्यंत अद्भुत एवं पवित्र कथा कही गई है।"
  • English Translation: "'O Brahmana, this supreme and highly wondrous account of the descent of Ganga and the filling of the ocean has been narrated by you.'"

३. क्षणभूतेव नौ रात्रिः संवृत्तेयं परंतप। इमां चिन्तयतोः सर्वां निखिलेन कथां तव ॥३॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे शत्रुओं को संतप्त करने वाले! आपकी इस संपूर्ण कथा का स्मरण करते हुए हम दोनों की यह रात्रि एक क्षण के समान बीत गई है।"
  • English Translation: "'O tormentor of foes, while we were contemplating this entire narrative of yours, this night passed for us as if it were just a single moment.'"

४. तस्य सा शर्वरी सर्वा मम सौमित्रिणा सह। जगाम चिन्तयानस्य विश्वामित्र कथां शुभाम् ॥४॥

  • हिन्दी व्याख्या: सौमित्रि (लक्ष्मण) के साथ विश्वामित्रजी की इस शुभ कथा का चिंतन करते हुए ही श्रीराम की वह संपूर्ण रात्रि बीत गई।
  • English Translation: Along with Saumitri (Lakshmana), that entire night passed for Rama as he kept meditating upon the auspicious narrative of Vishwamitra.

५. ततः प्रभाते विमले विश्वामित्रं तपोधनम्। उवाच राघवो वाक्यं कृताह्निकमरिन्दमः ॥५॥

  • हिन्दी व्याख्या: तदनन्तर निर्मल प्रभात होने पर, शत्रुओं का दमन करने वाले और दैनिक कृत्यों से निवृत्त हुए श्रीराम ने तपोधन विश्वामित्रजी से यह वचन कहा—
  • English Translation: Then, at the break of the pure morning, the subduer of foes, Rama, having completed his daily morning duties, spoke these words to the ascetic Vishwamitra:

६. गता भगवती रात्रिः श्रोतव्यं परमं श्रुतम्। तराम सरितां श्रेष्ठां पुण्यां त्रिपथगां नदीम् ॥६॥

  • हिन्दी व्याख्या: "भगवती रात्रि बीत चुकी है। अब हमें परम श्रवणीय (सुनने योग्य) पवित्र नदियों में श्रेष्ठ तथा त्रिपथगा (गंगाजी) को पार करना चाहिए।"
  • English Translation: "'The blessed night has passed. We must now cross the foremost of rivers, the sacred and thrice-flowing (Tripathaga) stream.'"

७. नौरेषा हि सुखास्तीर्णा ऋषीणां पुण्यकर्मणाम्। भगवन्तमिह प्राप्तं ज्ञात्वा त्वरितमागता ॥७॥

  • हिन्दी व्याख्या: "पुण्यकर्म करने वाले ऋषियों की यह नौका, जो सुखपूर्वक बैठने योग्य है, यहाँ भगवन् (आप) के आगमन को जानकर त्वरित गति से चली आ रही है।"
  • English Translation: "'This comfortably padded boat of the righteous rishis, knowing that Your Reverence has arrived here, has come quickly.'"

८. तस्य तद् वचनं श्रुत्वा राघवस्य महात्मनः। सन्तारं कारयामास सर्षिसङ्घस्य कौशिकः ॥९/८॥

  • हिन्दी व्याख्या: महात्मा राघव के उन वचनों को सुनकर कौशिक (विश्वामित्र) ने ऋषियों के संघ सहित सबको नदी पार कराई।
  • English Translation: Hearing those words of the high-souled Raghava, Kaushika (Vishwamitra) had the entire gathering of rishis cross the river.

९. उत्तरं तीरमासाद्य सम्पूज्यर्षिगणं ततः। गङ्गाकूले निविष्टास्ते विशालां ददृशुः पुरीम् ॥९॥

  • हिन्दी व्याख्या: उत्तर तट पर पहुँचकर और ऋषिगणों का पूजन करके, गंगा के तट पर स्थित उन लोगों ने विशाला नगरी को देखा।
  • English Translation: Having reached the northern bank and worshipped the assemblage of rishis, they rested on the banks of Ganga and beheld the city of Vishala.

१०. ततो मुनिवरस्तूर्णं जगाम सहराघवः। विशालां नगरीं रम्यां दिव्यां स्वर्गोपमां तदा ॥१०॥

  • हिन्दी व्याख्या: तदनन्तर मुनिवर विश्वामित्र श्रीराम के साथ शीघ्रतापूर्वक उस रमणीय, दिव्य और स्वर्ग के समान सुंदर विशाला नगरी को गए।
  • English Translation: Thereafter, the preeminent sage, along with Raghava, quickly proceeded to the charming, divine, and heaven-like city of Vishala.

११. अथ रामो महाप्राज्ञो विश्वामित्रं महामुनिम्। पप्रच्छ प्राञ्जलिर्भूत्वा विशालामुत्तमाम पुरीम् ॥११॥

  • हिन्दी व्याख्या: तब महाप्राज्ञ श्रीराम ने हाथ जोड़कर महामुनि विश्वामित्र से उस उत्तम विशाला नगरी के संबंध में पूछा—
  • English Translation: Then the highly wise Rama, folding his hands in reverence, asked the great sage Vishwamitra about that supreme city of Vishala:

१२. कतमो राजवंशोऽयं विशालायां महामुने। श्रोतुमिच्छामि भद्रं ते परं कौतूहलं हि मे ॥१२॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे महामुने! आपका कल्याण हो, इस विशाला नगरी में किस राजवंश का राज्य रहा है? मैं इसे सुनना चाहता हूँ, क्योंकि मेरे मन में इसके प्रति अत्यधिक कौतूहल है।"
  • English Translation: "'O great sage, may you be blessed, which royal dynasty belongs to Vishala? I wish to hear about it, for I have a supreme curiosity.'"

१३. तस्य तद् वचनं श्रुत्वा रामस्य मुनिपुङ्गवः। आख्यातुं तत्समारेभे विशालायाः पुरातनम् ॥१३॥

  • हिन्दी व्याख्या: श्रीराम के उस वचन को सुनकर मुनियों में श्रेष्ठ (विश्वामित्र) विशाला नगरी के प्राचीन इतिहास का वर्णन करना आरंभ किया।
  • English Translation: Hearing those words of Rama, the foremost among sages began to narrate the ancient history of Vishala.

१४. श्रूयतां राम शक्रस्य कथां कथयतः श्रुताम्। अस्मिन् देशे हि यद् वृत्तं शृणु तत्त्वेन राघव ॥१४॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे राम! सुनो, इंद्र के द्वारा कही गई और मेरे द्वारा सुनी हुई कथा का वर्णन करता हूँ। इस देश में जो कुछ घटित हुआ था, हे राघव! उसे यथार्थ रूप से सुनो।"
  • English Translation: "'Hearken, O Rama, to the account I heard while Indra was narrating it. Hear truly, O Raghava, what transpired in this land.'"

१५. पूर्वं कृतयुगे राम दितेः पुत्रा महाबलाः। अदितेश्च महाभागा वीर्यवन्तः सुधार्मिकाः ॥१५॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे राम! पूर्वकाल में कृतयुग मेंदिति के पुत्र महाबली थे और अदिति के पुत्र महाभागा, पराक्रमी तथा अत्यंत धर्मात्मा थे।"
  • English Translation: "'Formerly in Krita Yuga, O Rama, the sons of Diti were exceedingly mighty, and the highly fortunate sons of Aditi were valiant and deeply righteous.'"

१६. ततस्तेषां नरव्याघ्र बुद्धिरासीन्महात्मनाम्। अमरा विजराश्चैव कथं स्यामो निरामयाः ॥१६॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे नरव्याघ्र! तब उन महात्माओं की बुद्धि में यह विचार आया कि हम किस प्रकार अमर, अजर और रोगमुक्त (निरामय) हो सकते हैं।"
  • English Translation: "'Then, O tiger among men, the thought arose in the minds of those great souls: "How can we become immortal, free from old age, and free from diseases?"'"

१७. तेषां चिन्तयतां तत्र बुद्धिरासीद् विपश्चिताम्। क्षीरोदमथनं कृत्वा रसं प्राप्स्याम तत्र वै ॥१७॥

  • हिन्दी व्याख्या: "विचार करते हुए उन बुद्धिमानों को यह बुद्धि सूझी कि हम क्षीरसागर (दूध के समुद्र) का मंथन करके वहाँ से अमृत (रस) प्राप्त करेंगे।"
  • English Translation: "'While they were pondering this, the wise ones arrived at the plan: "By churning the ocean of milk, we shall indeed obtain the nectar there."'"

१८. ततो निश्चित्य मथनं योक्त्रं कृत्वा च वासुकिम्। मन्थानं मन्दरं कृत्वा ममन्थुरमितौजसः ॥११८॥

  • हिन्दी व्याख्या: "तदनन्तर मंथन का निश्चय करके, अमित तेजस्वी उन देव-असुरों ने वासुकि नाग को मथानी की रस्सी (नेती) बनाया और मन्दराचल पर्वत को मथानी बनाकर समुद्र का मंथन किया।"
  • English Translation: "'Then, resolving upon the churning, those of boundless energy made Vasuki the churning rope and Mandara the churning rod, and churned [the ocean].'"

१९. अथ वर्षसहस्रेण योक्त्रसर्पशिरांसि च। वमन्तोऽतिविषं तत्र ददंशुर्दशनैः शिलाः ॥१९॥

  • हिन्दी व्याख्या: "इस प्रकार सहस्रों वर्षों तक मंथन करते रहने पर, नेती बनाए गए सर्प (वासुकी) के मुखों से अत्यंत विष उगलते हुए उसने पत्थरों को अपने दाँतों से काट लिया।"
  • English Translation: "'Then, over the course of a thousand years, the serpent serving as the churning rope vomited deadly poison from its heads and bit the rocks with its fangs.'"

२०. उत्पपाताग्निसंकाशं हालाहलमहाविषम्। तेन दग्धं जगत् सर्वं सदेवासुरमानुषम् ॥२०॥

  • हिन्दी व्याख्या: "वहाँ से अग्नि के समान प्रकाशमान हालाहल नामक महाविष उत्पन्न हुआ। उस विष से देवता, असुर और मनुष्य सहित समस्त संसार जलने लगा।"
  • English Translation: "'There emerged the great poison Hahalal, resembling fire. By it, the entire world including gods, demons, and humans was scorched.'"

२१. अथ देवा महादेवं शङ्करं शरणार्थिनः। जग्मुः पशुपतिं रुद्रं त्राहीति तुष्टुवुः ॥२१/२१॥

  • हिन्दी व्याख्या: "तब शरण की इच्छा रखने वाले देवता महादेव, पशुपति, रुद्र की शरण में गए और 'हमारी रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए' कहकर उनकी स्तुति करने लगे।"
  • English Translation: "'Then the gods, seeking refuge, approached Mahadeva, the lord of creatures, Rudra, and praised him, crying, "Save us, save us!"""

२२. एवमुक्तस्ततो देवैर्देवदेवेश्वरः प्रभुः। प्रादुरासीत् ततोऽत्रैव शङ्खचक्रधरो हरिः ॥२२॥

  • हिन्दी व्याख्या: "देवताओं द्वारा ऐसा कहे जाने पर, देवों के भी ईश्वर प्रभु शंख-चक्र धारण करने वाले भगवान हरि वहीं प्रकट हो गए।"
  • English Translation: "'Thus addressed by the gods, the lord and sovereign of the gods, Hari, bearing the conch and discus, manifested right there.'"

२३. उवाचैनं स्मितं कृत्वा रुद्रं शूलधरं हरिः। दैवतैर्मथ्यमाने तु यत्पूर्वं समुपस्थितम् ॥२३॥

  • हिन्दी व्याख्या: "शूल धारण करने वाले रुद्र से भगवान हरि ने मंदमुस्कान के साथ कहा—'हे सुरश्रेष्ठ! देवताओं द्वारा समुद्र मंथन करते समय जो यह सबसे पहले उत्पन्न हुआ है—'"
  • English Translation: "'Smiling gently, Hari said to Rudra, who holds the trident: "O best of gods, whatever has emerged first while the deities were churning—'"

२४. तत् त्वदीयं सुरश्रेष्ठ सुराणामग्रतो हि यत्। अग्रपूजामिह स्थित्वा गृहाणेदं विषं प्रभो ॥२४॥

  • हिन्दी व्याख्या: "'—वह सब आपका ही भाग है, क्योंकि आप देवताओं में अग्रगण्य हैं। हे प्रभो! आप यहाँ स्थित होकर इस विष को अपनी अग्रपूजा (प्रथम सम्मान) के रूप में ग्रहण कीजिए।'"
  • English Translation: "'—that belongs to you, O chief of gods, since you are foremost among the deities. Standing here, accept this poison as your primary worship, O Lord."'"

२५. इत्युक्त्वा च सुरश्रेष्ठस्तत्रैवान्तरधीयत। देवतानां भयं दृष्ट्वा श्रुत्वा वाक्यं तु शार्ङ्गिणः ॥२५॥

  • हिन्दी व्याख्या: "सुरश्रेष्ठ भगवान हरि ऐसा कहकर वहीं अंतर्ध्यान हो गए। देवताओं का भय देखकर और शार्ङ्ग धनुषधारी भगवान (हरि) के वचन को सुनकर—"
  • English Translation: "'Having spoken thus, the supreme god vanished right there. Seeing the fear of the gods and hearing the words of the bearer of the Sharanga bow—'"

२६. हालाहलं विषं घोरं संजग्राहामृतोपमम्। देवान् विसृज्य देवेशो जगाम भगवान् हरः ॥२६॥

  • हिन्दी व्याख्या: "—भगवान हर (शिव) ने उस घोर हालाहल विष को अमृत के समान निगल लिया। इसके पश्चात देवेश्वर भगवान हर देवताओं को विदा करके अपने धाम चले गए।"
  • English Translation: "'—Lord Hara swallowed that terrible and fierce Hahalal poison as if it were nectar. Having reassured the gods, the lordly Hara departed.'"

२७. ततो देवासुराः सर्वे ममन्थू रघुनन्दन। प्रविवेशाथ पातालं मन्थानः पर्वतोत्तमः ॥२७॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे रघुनन्दन! तदनन्तर सभी देव और असुरों ने पुनः समुद्र का मंथन किया। (मंथन के दौरान) वह पर्वतोत्तम मन्दराचल पाताल में धँसने लगा।"
  • English Translation: "'Then all the gods and demons resumed the churning, O Raghunandana. Thereupon the best of mountains, the churning rod, began sinking into the netherworld.'"

२८. ततो देवाः सगन्धर्वास्तुष्टुवुर्मधुसूदनम्। त्वं गतिः सर्वभूतानां विशेषेण दिवौकसाम् ॥२८॥

  • हिन्दी व्याख्या: "तब गन्धर्वों सहित देवताओं ने मधुसूदन (भगवान विष्णु) की स्तुति की—'हे महाबाहो! आप ही समस्त प्राणियों की और विशेष रूप से स्वर्गवासियों की गति हैं।'"
  • English Translation: "'Then the gods along with the gandharvas praised Madhusudana: "You are the ultimate refuge of all beings, and especially of the dwellers of heaven."'"

२९. पालयास्मान् महाबाहो गिरिमुद्धर्तुमर्हसि। इति श्रुत्वा हृषीकेशः कामठं रूपमास्थितः ॥२९॥

  • हिन्दी व्याख्या: "'आप हमारी रक्षा कीजिए और इस पर्वत को ऊपर उठाने की कृपा कीजिए।' ऐसा सुनकर हृषीकेश (भगवान विष्णु) ने कछुए (कूर्म/कामठ) का रूप धारण किया।"
  • English Translation: "'Protect us, O mighty-armed one, and be pleased to lift up the mountain." Hearing this, Hrishikesha assumed the form of a tortoise.'"

३०. पर्वतं पृष्ठतः कृत्वा शिष्ये तत्रोदधौ हरिः। पर्वताग्रं तु लोकात्मा हस्तेनाक्रम्य केशवः ॥३०॥

  • हिन्दी व्याख्या: "भगवान हरि ने उस पर्वत को अपनी पीठ पर रखकर समुद्र में शयन किया। संपूर्ण लोकों के आत्मा केशव ने अपने हाथ से पर्वत के शिखर को थाम लिया।"
  • English Translation: "'Placing the mountain upon his back, Hari lay down in that ocean. Keshav, the soul of all worlds, grasping the peak of the mountain with his hand—'"

३१. देवानां मध्यतः स्थित्वा ममन्थ पुरुषोत्तमः। ततो वर्षसहस्रेण आयुर्वेदमयः पुमान् ॥३१॥

  • हिन्दी व्याख्या: "पुरुषोत्तम भगवान देवताओं के मध्य में स्थित होकर समुद्र मंथन करने लगे। इस प्रकार सहस्रों वर्षों के उपरांत आयुर्वेद के ज्ञाता एवं प्रणेता—"
  • English Translation: "'—positioned in the midst of the gods, the supreme Purushottama churned. Then, after a thousand years, a personification of the science of medicine (Ayurveda)—'"

३२. उदतिष्ठत् सुधर्मात्मा सदण्डः सकमण्डलुः। पूर्वं धन्वन्तरिर्नाम अप्सराश्च सुवर्चसः ॥३२॥

  • हिन्दी व्याख्या: "—सुधर्मात्मा, हाथ में दंड और कमंडल लिए हुए धन्वन्तरि नामक पुरुष सबसे पहले प्रकट हुए। उनके पश्चात् सुवर्चस (तेजस्वी) अप्सराएँ उत्पन्न हुईं।"
  • English Translation: "'—the highly righteous Dhanvantari appeared first, carrying a staff and a water-pot. Following him came radiant apsaras—'"

३३. अप्सु निर्मथनादेव रसात् तस्माद् वरस्त्रियः। उत्पेतुर्मनुजश्रेष्ठ तस्मादप्सरसोऽभवन् ॥३३॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे मनुजश्रेष्ठ! जल के उस रस से (मंथन के दौरान) वे श्रेष्ठ स्त्रियाँ जल से उत्पन्न हुई थीं, इसी कारण वे 'अप्सरा' कहलाईं।"
  • English Translation: "'—O best of men, those noble women arose precisely from the watery essence during the churning, and therefore they came to be known as Apsaras.'"

३४. षष्टिः कोट्योऽभवंस्तासामप्सराणां सुवर्चसाम्। असंख्येयास्तु काकुत्स्थ यास्तासां परिचारिकाः ॥३४॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे काकुत्स्थ! उन तेजस्विनी अप्सराओं की संख्या साठ करोड़ थी और उनकी परिचारिकाएँ (दासियाँ) तो असंख्य थीं।"
  • English Translation: "'O Kakutstha, those radiant apsaras numbered sixty crores, and their attendant maids were countless.'"

३५. न ताः स्म प्रतिगृह्णन्ति सर्वे ते देवदानवाः। अप्रतिग्रहणादेव ता वै साधारणाः स्मृताः ॥३५॥

  • हिन्दी व्याख्या: "उन अप्सराओं को किसी भी देव या दानव ने अपनी पत्नी के रूप में ग्रहण नहीं किया। किसी के द्वारा परिग्रह न किए जाने के कारण ही वे 'साधारणा' (सार्वजनिक) मानी गईं।"
  • English Translation: "'None of those gods and demons accepted them as wives. Because of this non-acceptance, they came to be known as common (shared) entities.'"

३६. वरुणस्य ततः कन्या वारुणी रघुनन्दन। उत्पपात महाभागा मार्गमाणा परिग्रहम् ॥३६॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे रघुनन्दन! इसके पश्चात वरुण की महाभागा कन्या वारुणी उत्पन्न हुई और वह अपने लिए पति (परिग्रह) की तलाश करने लगी।"
  • English Translation: "'Then, O Raghunandana, Varuna's highly fortunate daughter, Varuni, emerged, seeking a consort.'"

३७. दितेः पुत्रा न तां राम जगृहुर्वरुणात्मजाम्। अदितेस्तु सुता वीर जगृहुस्तामनिन्दिताम् ॥३७॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे राम! दिति के पुत्रों (असुरों) ने वरुण की उस पुत्री को ग्रहण नहीं किया, किंतु हे वीर! अदिति के पुत्रों (देवताओं) ने उस अनिंदिता वारुणी को स्वीकार कर लिया।"
  • English Translation: "'O Rama, the sons of Diti did not accept that daughter of Varuna, but O hero, the sons of Aditi accepted that faultless maiden.'"

३८. असुरास्तेन दैतेयाः सुरास्तेनादितेः सुताः। हृष्टाः प्रमुदिताश्चासन् वारुणीग्रहणात् सुराः ॥३८॥

  • हिन्दी व्याख्या: "दैत्य (दिति के पुत्र) असुर कहलाए और अदिति के पुत्र सुर (देवता) कहलाए। वारुणी को ग्रहण करने के कारण देवता अत्यंत हर्षित और प्रमुदित हुए।"
  • English Translation: "'The sons of Diti thus became known as Asuras, and the sons of Aditi became Suras. The Suras were overjoyed and delighted by the acceptance of Varuni.'"

३९. उच्चैःश्रवा हयश्रेष्ठो मणिरत्नं च कौस्तुभम्। उदतिष्ठन्नरश्रेष्ठ तथैवामृतमुत्तमम् ॥४०/३९॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे नरश्रेष्ठ! इसके बाद श्रेष्ठ घोड़ा उच्चैःश्रवा, कौस्तुभ मणिरत्न और उसी प्रकार उत्तम अमृत उत्पन्न हुआ।"
  • English Translation: "'O best of men, thereafter arose the supreme horse Uchchaihshravas, the Kaustubha gem, and similarly the peerless nectar.'"

४०. अथ तस्य कृते राम महानासीत् कुलक्षयः। अदितेस्तु ततः पुत्रा दितिपुत्रानयोधयन् ॥४०॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे राम! तब उस अमृत के लिए दोनों पक्षों में महान कुलक्षय (घोर युद्ध) हुआ। अदिति के पुत्रों ने दिति के पुत्रों के साथ युद्ध किया।"
  • English Translation: "'Then, O Rama, a massive destruction of lineages took place on account of that [nectar]. The sons of Aditi waged war against the sons of Diti.'"

४१. एकतामगमन् सर्वे असुरा राक्षसैः सह। युद्धमासीन्महाघोरं वीर त्रैलोक्यमोहनम् ॥४१॥

  • हिन्दी व्याख्या: "सभी असुर राक्षसों के साथ एक हो गए। हे वीर! वह युद्ध अत्यंत घोर और तीनों लोकों को मोहित (विभ्रमित) करने वाला था।"
  • English Translation: "'All the Asuras united together with the Rakshasas. O hero, that battle was exceedingly fierce and bewildering to the three worlds.'"

४२. यदा क्षयं गतं सर्वं तदा विष्णुर्महाबलः। अमृतं सोऽहरत् तूर्णं मायामास्थाय मोहिनीम् ॥४२॥

  • हिन्दी व्याख्या: "जब सब कुछ क्षय होने लगा (युद्ध में प्रलय जैसी स्थिति आ गई), तब महाबली विष्णु ने मोहिनी माया का आश्रय लेकर शीघ्र ही अमृत को वहाँ से ले लिया।"
  • English Translation: "'When everything was facing destruction, the immensely mighty Vishnu, assuming a captivating illusion (Mohini Maya), quickly carried away the nectar.'"

४३. ये गताभिमुखं विष्णुमक्षरं पुरुषोत्तमम्। सम्पिष्टास्ते तदा युद्धे विष्णुना प्रभविष्णुना ॥४३॥

  • हिन्दी व्याख्या: "जो-जो असुर अक्षर और पुरुषोत्तम भगवान विष्णु के सम्मुख गए, वे सब उस युद्ध में प्रभु विष्णु द्वारा पीस डाले गए (नष्ट कर दिए गए)।"
  • English Translation: "'Those who advanced toward the imperishable Purushottama Vishnu were crushed in that battle by the almighty Vishnu.'"

४४. अदितेरात्मजा वीरा दितेः पुत्रान् निजघ्निरे। अस्मिन् घोरे महायुद्धे दैतेयादित्ययोर्भृशम् ॥४४॥

  • हिन्दी व्याख्या: "अदिति के वीर पुत्रों ने इस घोर महायुद्ध में दिति के पुत्रों (दैत्यों) का पूरी तरह संहार कर दिया।"
  • English Translation: "'The valiant sons of Aditi utterly slaughtered the sons of Diti in this fierce and great war between the Daityas and the Adityas.'"

४५. निहत्य दितिपुत्रांस्तु राज्यं प्राप्य पुरंदरः। शशास मुदितो लोकान् सर्षिसङ्घान् सचारणान् ॥४५॥

  • हिन्दी व्याख्या: "इस प्रकार दिति के पुत्रों का वध करके और राज्य प्राप्त करके इंद्र (पुरंदर) ने ऋषियों और चारणों के संघ सहित समस्त लोकों पर प्रसन्नतापूर्वक शासन किया।"
  • English Translation: "'Having slain the sons of Diti and obtained sovereignty, Purandara (Indra) joyfully ruled over the worlds along with the hosts of rishis and charanas.'"

अंतिम परामर्श (Follow-up Question): क्या आप इस कथा के अगले प्रसंग (विश्वामित्र द्वारा श्रीराम को विशाला नगरी और इक्ष्वाकु वंश का इतिहास सुनाना) को भी आगे पढ़ना चाहेंगे?


इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे पञ्चचत्वारिंशः सर्गः ॥१-४५॥