रामायणम्/बालकाण्डम्/सर्गः ४०

रामायणम्/बालकाण्डम्/सर्गः ४०

श्रीरामायण पाठ — बालकाण्डम्/सर्गः ४०

श्रीमद्वाल्मीकियरामायणे बालकाण्डे चत्वारिंशः सर्गः ॥१-४०॥

१. देवतानां वचः श्रुत्वा भगवान् वै पितामहः । प्रत्युवाच सुसंत्रस्तान् कृतान्तबलमोहित्तान् ॥१-४०-१॥

  • हिन्दी व्याख्या: देवताओं के वचन सुनकर भगवान पितामह (ब्रह्माजी) ने मृत्यु के बल से मोहित और अत्यंत भयभीत हुए उन देवताओं से उत्तर में कहा—
  • English Translation: Hearing the words of the gods, Lord Pitamaha (Brahma), addressing the highly terrified deities who were infatuated by the power of destiny, replied—

२. यस्येयं वसुधा कृत्स्ना वासुदेवस्य धीमतः । महिषी माधवस्यैषा स एव भगवन् प्रभुः ॥१-४०-२॥

  • हिन्दी व्याख्या: "यह संपूर्ण पृथ्वी जिनकी पटरानी (महिषी) है, वे ही बुद्धिमान वासुदेव (माधव) भगवान और प्रभु हैं।"
  • English Translation: "'The wise Vasudev is the master of this entire earth; this earth is the queen of Madhava, and He alone is the Lord and master.'"

३. कापिलं रूपमास्थाय धारयत्यनिशं धराम् । तस्य कोपाग्निना दग्धा भविष्यन्ति नृपात्मजाः ॥१-४०-३॥

  • हिन्दी व्याख्या: "वे ही कपिल रूप धारण करके निरंतर इस पृथ्वी को धारण करते हैं। उन्हीं के कोपाग्नि से राजा सगर के ये सभी पुत्र जलकर भस्म हो जाएँगे।"
  • English Translation: "'Assuming the form of Kapila, He constantly sustains the earth. Burned by the fire of His anger, these royal princes shall perish.'"

४. पृथिव्याश्चापि निर्भेदो दृष्ट एव सनातनः । सगरस्य च पुत्राणां विनाशो दीर्घदर्शिनाम् ॥१-४०-४॥

  • हिन्दी व्याख्या: "पृथ्वी का यह भेदन भी सनातन नियम के अनुसार ही देखा गया है और दीर्घदर्शी सगर के पुत्रों का विनाश भी निश्चित है।"
  • English Translation: "'This piercing of the earth has also been ordained since eternity, as well as the destruction of Sagara's sons, who lack true foresight.'"

५. पितामहवचः श्रुत्वा त्रयस्त्रिंशदरिंदमाः । देवाः परमसंहृष्टाः पुनर्जग्मुर्यथागतम् ॥१-४०-५॥

  • हिन्दी व्याख्या: पितामह ब्रह्मा के वे वचन सुनकर शत्रुओं का दमन करने वाले तेरह (आदित्य, वसु, रुद्र और अश्विनीकुमार मिलाकर तैंतीस कोटि) देवता अत्यंत प्रसन्न होकर जैसे आए थे, वैसे ही लौट गए।
  • English Translation: Hearing the words of Pitamaha, the thirty-three triumphant gods were overjoyed and returned the way they had come.

६. सगरस्य च पुत्राणां प्रादुरासीन्महास्वनः । पृथिव्यां भिद्यमानायां निर्घातसमनिस्वनः ॥१-४०-६॥

  • हिन्दी व्याख्या: जब पृथ्वी को काटा जा रहा था, तब सगर के उन पुत्रों द्वारा वज्रपात (निर्घात) के समान एक अत्यंत भयंकर महान शब्द प्रकट हुआ।
  • English Translation: As the earth was being cleaved by the sons of Sagara, a tremendous roar resembling a thunderbolt resounded.

७. ततो भित्त्वा महीं सर्वां कृत्वा चापि प्रदक्षिणम् । सहिताः सागराः सर्वे पितरं वाक्यमब्रुवन् ॥१-४०-७॥

  • हिन्दी व्याख्या: तदनन्तर संपूर्ण पृथ्वी को खोदकर और उसकी परिक्रमा करके, सगर के वे सभी पुत्र एक साथ एकत्र हुए और अपने पिता से बोले—
  • English Translation: Then, having excavated the entire earth and circumambulated it, all the sons of Sagara gathered together and spoke these words to their father:

८. परिक्रान्ता मही सर्वा सत्त्ववन्तश्च सूदिताः । देवदानवरक्षांसि पिशाचोरगपन्नगाः ॥१-४०-८॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हमने संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा कर ली है और इसमें रहने वाले देव, दानव, राक्षस, पिशाच, उरग तथा नाग आदि सभी बलवान जीवों को नष्ट (या पराजित) कर डाला है।"
  • English Translation: "'We have circumambulated the entire earth and vanquished the mighty beings residing therein—gods, danavas, rakshasas, pishachas, uragas, and nagas.'"

९. न च पश्यामहेऽश्वं ते अश्वहर्तारमेव च । किं करिष्याम भद्रं ते बुद्धिरत्र विचार्यताम् ॥१-४०-९॥

  • हिन्दी व्याख्या: "'किंतु न तो हमें वह अश्व ही दिखाई दे रहा है और न ही उसका चुराने वाला। हे तात! आपका कल्याण हो, अब बताइए हम क्या करें, इस विषय में विचार कीजिए।'"
  • English Translation: "'Yet we do not see the horse, nor do we find the thief who stole it. May you be blessed; what shall we do? Let some wisdom be applied here.'"

१०. तेषां तद्वचनं श्रुत्वा पुत्राणां राजसत्तमः । समन्युरब्रवीद् वाक्यं सगरो रघुनन्दन ॥१-४०-१०॥

  • हिन्दी व्याख्या: हे रघुनन्दन! अपने उन पुत्रों का वह वचन सुनकर राजाओं में उत्तम राजा सगर ने क्रोधपूर्वक यह बात कही—
  • English Translation: O Raghunandana, hearing those words of his sons, the best among kings, Sagara, spoke angrily:

११. भूयः खनत भद्रं वो विभेद्य वसुधातलम् । अश्वहर्तारमासाद्य कृतार्थाश्च निवर्तत ॥१-४०-११॥

  • हिन्दी व्याख्या: "'तुम्हारा कल्याण हो, पृथ्वी के तल को और अधिक चीरकर खोजो। घोड़े के चोर को पाकर ही कृतार्थ होकर लौटना।'"
  • English Translation: "'May you be blessed; break through the surface of the earth and dig further. Having found the horse-thief and accomplished your purpose, return.'"

१२. पितुर्वचनमासाद्य सगरस्य महात्मनः । षष्टिः पुत्रसहस्राणि रसातलमभिद्रवन् ॥१-४०-१२॥

  • हिन्दी व्याख्या: महात्मा सगर का वह वचन पाकर साठ हजार पुत्र पाताल लोक (रसातल) की ओर दौड़ पड़े।
  • English Translation: Receiving that command from the noble-souled Sagara, the sixty thousand sons rushed toward the netherworld (Rasatala).

१३. खन्यमाने ततस्तस्मिन् ददृशुः पर्वतोपमम् । दिशागजं विरूपाक्षं धारयन्तं महीतलम् ॥१-४०-१३॥

  • हिन्दी व्याख्या: इसके बाद जब वे पाताल को खोद रहे थे, तब उन्होंने पर्वत के समान विशाल, पृथ्वी को धारण करने वाले 'विरूपाक्ष' नामक दिग्गज को देखा।
  • English Translation: While they were excavating, they beheld a mountain-sized directional elephant named Virupaksha, who was supporting the surface of the earth.

१४. सपर्वतवनां कृत्स्नां पृथिवीं रघुनन्दन । धारयामास शिरसा विरूपाक्षो महागजः ॥१-४०-१४॥

  • हिन्दी व्याख्या: हे रघुनन्दन! वह महागज विरूपाक्ष पर्वतों और वनों सहित संपूर्ण पृथ्वी को अपने मस्तक पर धारण किए हुए था।
  • English Translation: O Raghunandana, that great elephant Virupaksha supported the entire earth with its mountains and forests upon his head.

१५. यदा पर्वणि काकुत्स्थ विश्रमार्थं महागजः । खेदाच्चालयते शीर्षं भूमिकम्पस्तदा भवेत् ॥१-४०-१५॥

  • हिन्दी व्याख्या: हे काकुत्स्थ! जब कभी विश्राम के लिए या थकान के कारण वह महागज अपना मस्तक हिलाता है, तब पृथ्वी में भूकम्प आ जाता है।
  • English Translation: O Kakutstha, whenever that great elephant shakes his head for rest or due to fatigue, an earthquake occurs on earth.

१६. ते तं प्रदक्षिणं कृत्वा दिशापालं महागजम् । मानयन्तो हि ते राम जग्मुर्भित्त्वा रसातलम् ॥१-४०-१६॥

  • हिन्दी व्याख्या: हे राम! उन राजपुत्रों ने उस दिशापाल महागज की परिक्रमा की और उसका सम्मान करते हुए पृथ्वी को चीरकर आगे रसातल में प्रवेश किया।
  • English Translation: O Rama, those princes circumambulated that guardian elephant of the quarter, paid him respect, and continuing to cleave the earth, proceeded further into the netherworld.

१७. ततः पूर्वां दिशं भित्त्वा दक्षिणां बिभिदुः पुनः । दक्षिणस्यामपि दिशि ददृशुस्ते महागजम् ॥१-४०-१७॥

  • हिन्दी व्याख्या: इसके पश्चात पूर्व दिशा को भेदकर उन्होंने दक्षिण दिशा को खोदा। दक्षिण दिशा में भी उन्होंने एक महागज को देखा।
  • English Translation: Then, after piercing the eastern quarter, they cleaved the southern one. In the southern quarter as well, they beheld a mighty elephant.

१८. महापद्मं महात्मानं सुमहत्पर्वतोपमम् । शिरसा धारयन्तं गां विस्मयं जग्मुरुत्तमम् ॥१-४०-१८॥

  • हिन्दी व्याख्या: विशाल पर्वत के समान महात्मा 'महापद्म' नामक उस गज को मस्तक पर पृथ्वी का भार धारण करते देख वे उत्तम विस्मय को प्राप्त हुए।
  • English Translation: They experienced supreme wonder upon seeing the great-souled elephant named Mahapadma, who resembled a massive mountain and bore the earth upon his head.

१९. ते तं प्रदक्षिणं कृत्वा सगरस्य महात्मनः । षष्टिः पुत्रसहस्राणि पश्चिमां बिभिदुर्दिशम् ॥१-४०-१९॥

  • हिन्दी व्याख्या: महात्मा सगर के उन साठ हजार पुत्रों ने उसकी परिक्रमा करके पश्चिम दिशा को खोदना शुरू किया।
  • English Translation: Those sixty thousand sons of the noble-souled Sagara circumambulated him and then began to cleave the western quarter.

२०. पश्चिमायामपि दिशि महान्तमचलोपमम् । दिशागजं सौमनसं ददृशुस्ते महाबलाः ॥१-४०-२०॥

  • हिन्दी व्याख्या: पश्चिम दिशा में भी उन महाबली पुत्रों ने पर्वत के समान महान 'सौमनस' नामक दिग्गज को देखा।
  • English Translation: In the western quarter too, those mighty-souled princes beheld the great directional elephant named Saumanasa, who looked like a mountain.

२१. तं ते प्रदक्षिणं कृत्वा पृष्ट्वा चापि निरामयम् । खनन्तः समुपक्रान्ता दिशं सोमवतीं तदा ॥१-४०-२१॥

  • हिन्दी व्याख्या: उसकी परिक्रमा करके तथा उसका कुशल-क्षेम पूछकर उन्होंने उत्तर (सोमवती) दिशा की ओर खोदना शुरू किया।
  • English Translation: Having circumambulated him and inquired about his well-being, they proceeded to excavate toward the northern direction.

२२. उत्तरस्यां रघुश्रेष्ठ ददृशुर्हिमपाण्डुरम् । भद्रं भद्रेण वपुषा धारयन्तं महीमिमाम् ॥१-४०-२२॥

  • हिन्दी व्याख्या: हे रघुश्रेष्ठ! उत्तर दिशा में उन्होंने बर्फ के समान श्वेत, सुंदर शरीर वाले 'भद्र' नामक हाथी को इस पृथ्वी को धारण करते हुए देखा।
  • English Translation: O best of the Raghus, in the northern quarter they saw the elephant named Bhadra, white as snow and possessing a noble form, sustaining this earth.

२३. समालभ्य ततः सर्वे कृत्वा चैनं प्रदक्षिणम् । षष्टिः पुत्रसहस्राणि बिभिदुर्वसुधातलम् ॥१-४०-२३॥

  • हिन्दी व्याख्या: तब उन साठ हजार पुत्रों ने उस हाथी का स्पर्श और परिक्रमा करके पृथ्वी के तल को फिर से काटना शुरू किया।
  • English Translation: Then all those sixty thousand sons touched that elephant, circumambulated him, and began to cleave the surface of the earth once again.

२४. ततः प्रागुत्तरां गत्वा सागराः प्रथितां दिशम् । रोषादभ्यखनन् सर्वे पृथिवीं सगरात्मजाः ॥१-४०-२४॥

  • हिन्दी व्याख्या: इसके पश्चात सगर के वे सभी पुत्र प्रसिद्ध ईशान (पूर्वोत्तर) दिशा में जाकर क्रोधपूर्वक पृथ्वी को खोदने लगे।
  • English Translation: Thereafter, going to the well-known northeast quarter, all those sons of Sagara angrily began to dig up the earth.

२५. ते तु सर्वे महात्मानोऽभिमेगा महाबलाः । ददृशुः कपिलं तत्र वासुदेवं सनातनम् ॥१-४०-२५॥

  • हिन्दी व्याख्या: वे सभी महाबली और तीव्र वेग वाले महात्मा वहाँ सनातन भगवान वासुदेव (कपिल) को देखने लगे।
  • English Translation: Those high-souled, swift, and mighty princes beheld there the eternal Lord Vasudev in the form of Kapila.

२६. हयं च तस्य देवस्य चरन्तमविदूरतः । प्रहर्षमतुलं प्राप्ताः सर्वे ते रघुनंदन ॥१-४०-२६॥

  • हिन्दी व्याख्या: हे रघुनन्दन! उस देव (कपिल) के पास ही उनके यज्ञ का घोड़ा चरता हुआ दिखाई दिया, जिसे देखकर वे सभी अत्यंत प्रसन्न हुए।
  • English Translation: O Raghunandana, they also saw the sacrificial horse grazing not far from that deity, and they experienced incomparable joy.

२७. ते तं यज्ञहनं ज्ञात्वा क्रोधपर्याकुलेक्षणाः । खनित्रलाङ्गलधरा नानावृक्षशिलाधराः ॥१-४०-२७॥

  • हिन्दी व्याख्या: उन्हें यह जानकर कि यही हमारे यज्ञ का विध्वंस करने वाला (चोर) है, उनकी आँखें क्रोध से लाल हो गईं। उन्होंने खंती, हल, तथा विभिन्न वृक्षों और शिलाओं को उठा लिया।
  • English Translation: Knowing him to be the spoiler of their sacrifice, their eyes rolled with anger. They grasped spades, plows, and various trees and rocks.

२८. अभ्यधावन्त संक्रुद्धास्तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रुवन् । अस्माकं त्वं हि तुरगं यज्ञियं हृतवानसि ॥१-४०-२८॥

  • हिन्दी व्याख्या: वे अत्यंत क्रोधित होकर दौड़े और बोले—"रुक, रुक! तूने ही हमारे यज्ञ के घोड़े का अपहरण किया है।"
  • English Translation: Enraged, they rushed forward and shouted, "Stop, stop! You are the one who stole our sacrificial horse."

२९. दुर्मेधस्त्वं हि संप्राप्तान् विद्धि नः सगरात्मजान् । श्रुत्वा तद्वचनं तेषां कपिलो रघुनन्दन ॥१-४०-२९॥

  • हिन्दी व्याख्या: "हे दुर्मेति! तू जान ले कि हम सगर के पुत्र यहाँ आ पहुँचे हैं।" हे रघुनन्दन! उनके उन वचनों को सुनकर कपिल मुनि—
  • English Translation: "O foolish one, know that we, the sons of Sagara, have arrived here." O Raghunandana, hearing those words of theirs, sage Kapila—

३०. रोषेण महताविष्टो हुंकारमकरोत् तदा । ततस्तेनाप्रमेयेण कपिलेन महात्मना । भस्मराशीकृताः सर्वे काकुत्स्थ सगरात्मजाः ॥१-४०-३०॥

  • हिन्दी व्याख्या: —अत्यंत क्रोध से भरकर एक भयंकर 'हुंकार' किया। तब उन अप्रमेय (अमित तेजस्वी) महात्मा कपिल ने क्रोधित होकर सगर के उन सभी पुत्रों को एक ही क्षण में भस्म की ढेरी बना दिया।
  • English Translation: —filled with intense rage, uttered a fierce roar ("Hum"). Then, by that immeasurable and noble-souled Kapila, all those sons of Sagara, O Kakutstha, were instantly reduced to ashes.

इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे चत्वारिंशः सर्गः ॥१-४०॥