चुभन

 

👉 चुभन

 

🔶 पुरानी साड़ियों के बदले बर्तनों के लिए मोल भाव करती शारदा ने अंततः दो साड़ियों के बदले एक टब पसंद किया। "नहीं दीदी, बदले में तीन साड़ियों से कम तो नहीं लूंगा।" बर्तन वाले ने टब को वापस अपने हाथ में लेते हुए कहा।

 

🔷 "अरे भैया, एक - एक बार की पहनी हुई तो हैं। बिल्कुल नये जैसी। एक टब के बदले में तो ये दो भी ज्यादा हैं, मैं तो फिर भी दे रही हूँ।" " नहीं नहीं, तीन से कम में तो नहीं हो पायेगा।" वह फिर बोला।

 

🔶 एक दूसरे को अपनी पसंद के सौदे पर मनाने की इस प्रक्रिया के दौरान गृह स्वामिनी को घर के खुले दरवाजे पर देखकर सहसा गली से गुजरती अर्द्ध विक्षिप्त महिला ने वहाँ आकर खाना माँगा।

 

🔷 आदतन हिकारत से उठी शारदा की नजरें उस महिला के कपड़ों पर गयी। अलग- अलग कतरनों को गाँठ बाँध कर बनायी गयी उसकी साड़ी उसके वृद्ध शरीर को ढँकने का असफल प्रयास कर रही थी। एकबारगी उसने मुंह बिचकाया पर सुबह -सुबह का याचक है सोचकर अंदर से रात की बची रोटियां मंगवायी।

 

🔶 उसे रोटी देकर पलटते हुए उसने बर्तन वाले से कहा "तो भैया क्या सोचा? दो साड़ियों में दे रहे हो या मैं वापस रख लूँ !"

 

🔷 बर्तन वाले ने उसे इस बार चुपचाप टब पकड़ाया और अपना गट्ठर बाँध कर बाहर निकला। अपनी जीत पर मुसकुराती हुई शारदा दरवाजा बंद करने को उठी तो सामने नजर गयी। गली के मुहाने पर बर्तन वाला अपना गट्ठर खोलकर उसकी दी हुई साड़ियों में से एक साड़ी उस वृद्धा को दे रहा था।

 

🔶 हाथ में पकड़ा हुआ टब उसे अब चुभता हुआ सा महसूस हो रहा था।....

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आधुनिक कोशिकीय जीव विज्ञान (Cell Biology), शरीर विज्ञान (Anatomy) और क्वांटम चेतना

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