रामायणम्/बालकाण्डम्/सर्गः ९

रामायणम्/बालकाण्डम्/सर्गः ९


श्रीरामायण पाठ — बालकाण्डम्/सर्गः ९

श्रीमद्वाल्मीकियरामायणे बालकाण्डे नवमः सर्गः ॥१-९॥

1.

एतच्छ्रुत्वा रहः सूतो राजानमिदमब्रवीत् । श्रूयतां तत् पुरावृत्तं पुराणे च मया श्रुतम् ॥१-९-१॥

हिन्दी व्याख्या: यह सुनकर गुप्त रूप से सूत (सुमंत्र) ने राजा दशरथ से कहा—आप प्राचीन काल की वह घटना सुनें, जिसे मैंने पुराणों में सुना है। 

English Translation: Hearing this, the charioteer (Sumantra) secretly spoke to the king: "Listen to that ancient history which I have heard from the Puranas."

2.

ऋत्विग्भिरुपदिष्टोऽयं पुरावृत्तो मया श्रुतः । सनत्कुमारो भगवान् पूर्वं कथितवान् कथाम् ॥१-९-२॥

हिन्दी व्याख्या: ऋत्विजों द्वारा उपदिष्ट यह प्राचीन इतिहास मैंने सुना है। भगवान सनत्कुमार ने पूर्वकाल में यह कथा कही थी। 

English Translation: This ancient account, instructed by the officiating priests, was heard by me. The divine Sanatkumara narrated this story in ancient times.

3.

ऋषीणां संनिधौ राजंस्तव पुत्रागमं प्रति । काश्यपस्य च पुत्रोऽस्ति विभाण्डक इति श्रुतः ॥१-९-३॥

हिन्दी व्याख्या: हे राजन्! ऋषियों की सभा में आपके पुत्र की प्राप्ति के प्रसंग में उन्होंने यह कहा था कि काश्यप ऋषि के कुल में विभाण्डक नाम के प्रसिद्ध पुत्र हैं।

  English Translation: O king, in the assembly of sages, regarding the advent of your sons, he had stated that Kasyapa has a well-known son named Vibhandaka.

4.

ऋश्यशृङ्ग इति ख्यातस्तस्य पुत्रो भविष्यति । स वने नित्यसंवृद्धो मुनिर्वनचरः सदा ॥१-९-४॥

हिन्दी व्याख्या: विभाण्डक के 'ऋश्यशृङ्ग' नाम से प्रसिद्ध पुत्र होंगे। वे वन में ही सदा पले-बढ़े और वन में ही विचरने वाले मुनि होंगे।

  English Translation: His son will be famously known as Rishyasringa. He will be constantly reared in the forest and will always roam as a forest-dwelling sage.

5.

नान्यं जानाति विप्रेन्द्रो नित्यं पित्रनुवर्तनात् । द्वैविध्यं ब्रह्मचर्यस्य भविष्यति महात्मनः ॥१-९-५॥

हिन्दी व्याख्या: ब्राह्मण श्रेष्ठ ऋश्यशृङ्ग सदा अपने पिता की सेवा में रहने के कारण उनके अतिरिक्त और किसी को नहीं जानते। उन महात्मा का ब्रह्मचर्य व्रत दोनों प्रकार (आदि से अंत तक) से श्रेष्ठ होगा। 

English Translation: That foremost brahmana knows no one else due to his constant obedience to his father. The celibacy (brahmacharya) of that noble soul will be steadfast in both respects.

6.

लोकेषु प्रथितं राजन् विप्रैश्च कथितं सदा । तस्यैवं वर्तमानस्य कालः समभिवर्तत ॥१-९-६॥

हिन्दी व्याख्या: हे राजन्! यह बात लोकों में प्रथित है और ब्राह्मणों द्वारा हमेशा कही जाती है। इस प्रकार जीवन बिताते हुए उनका समय बीतता जाएगा। 

English Translation: O king, this is renowned in the worlds and always recounted by the brahmanas. As he lives thus, time will pass.

7.

अग्निं शुश्रूषमाणस्य पितरं च यशस्विनम् । एतस्मिन्नेव काले तु रोमपादः प्रतापवान् ॥१-९-७॥

हिन्दी व्याख्या: वे अग्नि और अपने यशस्वी पिता की सेवा करते रहेंगे। उसी समय प्रतापवान रोमपाद... 

English Translation: While he is serving the sacred fire and his illustrious father, at that very time, the valiant Romapada...

8.

अङ्गेषु प्रथितो राजा भविष्यति महाबलः । तस्य व्यतिक्रमाद् राज्ञो भविष्यति सुदारुणा ॥१-९-८॥

हिन्दी व्याख्या: अंग देश में प्रसिद्ध महाबलवान राजा होंगे। उन राजा के किसी अपराध (व्यतिक्रम) के कारण अत्यंत भयंकर... 

English Translation: ...will become a renowned and mighty king in the Anga country. Due to a transgression by that king, there will arise a most terrible...

9.

अनावृष्टिः सुघोरा वै सर्वलोकभयावहा । अनावृष्ट्यां तु वृत्तायां राजा दुःखसमन्वितः ॥१-९-९॥

हिन्दी व्याख्या: सभी लोकों को भयभीत करने वाली अत्यंत घोर अनावृष्टि (सूखा) होगी। जब अनावृष्टि हो जाएगी, तब राजा दुःख से संतप्त होकर... 

English Translation: ...and exceedingly severe drought, terrifying to all worlds. When the drought occurs, the king, filled with grief...

10.

ब्राह्मणाञ्छ्रुतसंवृद्धान् समानीय प्रवक्ष्यति व । भवन्तः श्रुतकर्माणो लोकचारित्रवेदिनः ॥१-९-१०॥

हिन्दी व्याख्या: शास्त्र-अध्ययन से संपन्न ब्राह्मणों को बुलाकर कहेंगे—आप लोग वेद-कर्म के ज्ञाता और लोक-व्यवहार को जानने वाले हैं। 

English Translation: ...will summon brahmanas rich in scriptural learning and say to them: "You are performers of sacred rites and knowers of worldly customs."

11.

समादिशन्तु नियमं प्रायश्चित्तं यथा भवेत् । इत्युक्तास्ते ततो राज्ञा सर्वे ब्राह्मणसत्तमाः ॥१-९-११॥

हिन्दी व्याख्या: अतः आप लोग ऐसा नियम या प्रायश्चित्त बतलाएँ जिससे वर्षा हो सके। राजा द्वारा ऐसा कहे जाने पर वे सभी श्रेष्ठ ब्राह्मण... 

English Translation: "Prescribe the discipline or expiation so that it may become effective." Thus addressed by the king, all those best of brahmanas...

12.

वक्ष्यन्ति ते महीपालं ब्राह्मणा वेदपारगाः । विभाण्डकसुतं राजन् सर्वोपायैरिहानय ॥१-९-१२॥

हिन्दी व्याख्या: वेद-पारंगत वे ब्राह्मण उस महीपाल (रोमपाद) से कहेंगे—हे राजन्! विभाण्डक के पुत्र ऋश्यशृङ्ग को सब उपायों से यहाँ ले आइए। 

English Translation: ...those brahmanas who have mastered the Vedas will say to the monarch: "O king, by all means bring the son of Vibhandaka here."

13.

आनाय्य तु महीपाल ऋष्यशृङ्गं सुसत्कृतम् । विभाण्डकसुतं राजन् ब्राह्मणं वेदपारगम् । प्रयच्छ कन्यां शान्तां वै विधिना सुसमाहितः ॥१-९-१३॥

हिन्दी व्याख्या: हे राजन्! विभाण्डक पुत्र वेदपारंगत ब्राह्मण ऋश्यशृङ्ग को अच्छी प्रकार सत्कार करके यहाँ ले आइए और विधि-विधान पूर्वक अपनी पुत्री 'शान्ता' का विवाह उनके साथ कर दीजिए। 

English Translation: "O monarch, having brought the well-honored son of Vibhandaka—the brahmana who has mastered the Vedas—bestow your maiden Shanta upon him in marriage according to proper ritual rites with a focused mind."

14.

तेषां तु वचनं श्रुत्वा राजा चिन्तां प्रपत्स्यते । केनोपायेन वै शक्यमिहानेतुं स वीर्यवान् ॥१-९-१४॥

हिन्दी व्याख्या: उनका वह वचन सुनकर राजा रोमपाद चिंता में पड़ जाएंगे कि उस तेजस्वी मुनि को यहाँ किस उपाय से लाया जा सकता है। 

English Translation: "Hearing their words, the king will fall into deep contemplation: by what means can that valiant sage be brought here?"

15.

ततो राजा विनिश्चित्य सह मन्त्रिभिरात्मवान् । पुरोहितममात्यांश्च प्रेषयिष्यति सत्कृतान् ॥१-९-१५॥

हिन्दी व्याख्या: तब बुद्धिमान राजा मंत्रियों के साथ निश्चित करके पुरोहित और आदरणीय अमात्यों को (उन्हें लाने के लिए) भेजेंगे। 

English Translation: "Then the steadfast king, conferring with his ministers, will send forth the honored royal priest and ministers."

16.

ते तु राज्ञो वचः श्रुत्वा व्यथिता विनताननाः । न गच्छेम ऋषेर्भीता अनुनेष्यन्ति तं नृपम् ॥१-९-१६॥

हिन्दी व्याख्या: वे लोग राजा का वचन सुनकर भयभीत और खिन्न मुख होकर कहेंगे—"हम ऋषि के भय के कारण वहाँ नहीं जा सकते।" तब वे राजा को समझाएंगे। 

English Translation: "Hearing the king's command, distressed and with bowed faces, they will say, 'We cannot go, fearing the sage,' and they will seek to persuade the king otherwise."

17.

वक्ष्यन्ति चिन्तयित्वा ते तस्योपायांश्च तान्क्षमान् । आनेष्यामो वयं विप्रं न च दोषो भविष्यति ॥१-९-१७॥

हिन्दी व्याख्या: वे लोग भली-भांति सोच-विचारकर उचित उपाय निकालेंगे और कहेंगे—हम उस विप्र को ले आएंगे और इसमें कोई दोष भी नहीं होगा।

  English Translation: "Pondering over it, they will suggest feasible methods, saying, 'We shall bring the brahmana, and there will be no sin incurred.'"

18.

एवमङ्गाधिपेनैव गणिकाभिर्ऋषेः सुतः । आनीतोऽवर्षयद् देवः शान्ता चास्मै प्रदीयते ॥१-९-१८॥

हिन्दी व्याख्या: इसी प्रकार अंगराज (रोमपाद) द्वारा गणिकाओं (वैश्यों/नर्तकियों) के माध्यम से ऋषि-पुत्र को लाया जाएगा, जिससे इंद्र वर्षा करेंगे और शान्ता का विवाह उनके साथ कर दिया जाएगा। 

English Translation: "In this manner, the sage's son will be brought by the ruler of Anga through courtesans, the god (Indra) will cause rain to fall, and Shanta will be given in marriage to him."

19.

ऋश्यशृङ्गस्तु जामाता पुत्रांस्तव विधास्यति । सनत्कुमारकथितमेतावद् व्याहृतं मया ॥१-९-१९॥

हिन्दी व्याख्या: वे ऋश्यशृङ्ग आपके जामाता बनकर आपके पुत्रों की उत्पत्ति का विधान करेंगे। सनत्कुमार द्वारा कही गई इतनी कथा मैंने आपसे कह दी है।

  English Translation: "Rishyasringa, becoming your son-in-law, will accomplish the birth of your sons." This much, as narrated by Sanatkumara, has been spoken by me.

20.

अथ हृष्टो दशरथः सुमन्त्रं प्रत्यभाषत। यथर्ष्यशृङ्गस्त्वानीतो येनोपायेन सोच्यताम् ॥१-९-२०॥

हिन्दी व्याख्या: यह सुनकर प्रसन्न हुए राजा दशरथ ने सुमंत्र से कहा—ऋश्यशृङ्ग को जिस उपाय से लाया गया था, वह पूरी कथा मुझे विस्तार से सुनाओ। 

English Translation: Thereupon, a joyful Dasharatha said to Sumantra: "Tell me by what specific method Rishyasringa was brought."


इति श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे नवमः सर्गः ॥१-९॥