श्रीरामायण पाठ — बालकाण्डम्/सर्गः ६६
श्रीमद्वाल्मीकियरामायणे बालकाण्डे षट्षष्ठितमः सर्गः ॥१-६६॥
श्लोक १ ततः प्रभाते विमले कृतकर्मा नराधिपः। विश्वामित्रं महात्मानमाजुहाव सराघवम् ॥१॥
- हिन्दी व्याख्या: तदनन्तर निर्मल प्रभात होने पर, नित्यकर्म से निवृत्त होकर राजा जनक ने राम और लक्ष्मण के साथ महात्मन् विश्वामित्र को बुलाया (सादर आमंत्रित किया)।
- English Translation: Then, when the clear dawn had arrived, the king (Janaka), having completed his daily duties, respectfully invited the great-souled Vishwamitra along with the two scions of Raghu.
श्लोक २ तमर्चयित्वा धर्मात्मा शास्त्रदृष्टेन कर्मणा। राघवौ च महात्मानौ तदा वाक्यमुवाच ह ॥२॥
- हिन्दी व्याख्या: धर्मात्मा राजा जनक ने शास्त्रोक्त विधि से उनका तथा दोनों महात्मा राघव (राम और लक्ष्मण) का सत्कार करके यह वचन कहा।
- English Translation: That righteous king, having honored him and the two great-souled Raghus according to scriptural rites, then spoke these words:
श्लोक ३ भगवन् स्वागतं तेऽस्तु किं करोमि तवानघ। भवानाज्ञापयतु मामाज्ञाप्यो भवता ह्यहम् ॥३॥
- हिन्दी व्याख्या: हे भगवन्! आपका स्वागत है। हे अनघ (पापरहित)! मैं आपके लिए क्या करूँ? आप मुझे आज्ञा दें, क्योंकि मैं आपकी आज्ञा का पालन करने योग्य हूँ।
- English Translation: "O Lord, welcome to you; what shall I do for you, O sinless one? Please command me, for I am indeed to be commanded by you."
श्लोक ४ एवमुक्तः स धर्मात्मा जनकेन महात्मना। प्रत्युवाच मुनिश्रेष्ठो वाक्यं वाक्यविशारदः ॥४॥
- हिन्दी व्याख्या: महात्मा जनक द्वारा ऐसा कहे जाने पर, वचन बोलने में कुशल मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्र ने उन्हें यह उत्तर दिया।
- English Translation: Thus addressed by the great-souled Janaka, the foremost of sages, who was skilled in speech, replied to him:
श्लोक ५ पुत्रौ दशरथस्येमौ क्षत्रियौ लोकविश्रुतौ। द्रष्टुकामौ धनुःश्रेष्ठं यदेतत्त्वयि तिष्ठति ॥५॥
- हिन्दी व्याख्या: राजा दशरथ के ये दोनों प्रसिद्ध क्षत्रिय पुत्र, जो लोकविख्यात हैं, उस श्रेष्ठ धनुष को देखना चाहते हैं जो आपके पास सुरक्षित है।
- English Translation: "These two renowned Kshatriya sons of Dasharatha desire to see the supreme bow that rests with you."
श्लोक ६ एतद् दर्शय भद्रं ते कृतकामौ नृपात्मजौ। दर्शनादस्य धनुषो यथेष्टं प्रतियास्यतः ॥६॥
- हिन्दी व्याख्या: हे राजन्! आपका कल्याण हो, आप इन्हें वह धनुष दिखाएँ। ये दोनों राजकुमार उस धनुष के दर्शन करके अपनी इच्छा के अनुसार लौट जाएंगे।
- English Translation: "Show this [bow], may you be blessed; having fulfilled their desire, these princes shall depart as they please after seeing this bow."
श्लोक ७ एवमुक्तस्तु जनकः प्रत्युवाच महामुनिम्। श्रूयतामस्य धनुषो यदर्थमिह तिष्ठति ॥७॥
- हिन्दी व्याख्या: विश्वामित्र द्वारा ऐसा कहे जाने पर राजा जनक ने महामुनि से कहा— यह धनुष यहाँ किस उद्देश्य से रखा है, इसका इतिहास सुनिए।
- English Translation: Thus addressed, Janaka replied to the great sage: "Hear the reason why this bow remains here."
श्लोक ८ देवरात इति ख्यातो निमेर्ज्येष्ठो महीपतिः। न्यासोऽयं तस्य भगवन् हस्ते दत्तो महात्मनः ॥८॥
- हिन्दी व्याख्या: हे भगवन्! निमि के ज्येष्ठ पुत्र, जो 'देवरात' के नाम से प्रसिद्ध थे, यह महान धनुष उन्हीं महात्मा की थाती (न्यास) के रूप में हमारे पूर्वजों के हाथ में सौंपा गया था।
- English Translation: "A renowned king named Devarata, the eldest son of Nimi—this was entrusted as a sacred deposit (nyasa) into the hands of that great-souled ancestor of ours, O lord."
श्लोक ९ दक्षयज्ञवधे पूर्वं धनुरायम्य वीर्यवान्। विध्वंस्य त्रिदशान् रोषात् सलीलमिदमब्रवीत् ॥९॥
- हिन्दी व्याख्या: पूर्वकाल में दक्ष के यज्ञ के विनाश के समय वीर (शिवजी) ने उस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर क्रोध में देवताओं को विध्वंस करते हुए हँसते हुए यह बात कही थी—
- English Translation: "In former times, at the destruction of Daksha's sacrifice, the mighty one (Shiva), having strung the bow and angrily shattering the gods, playfully spoke these words:"
श्लोक १० यस्माद् भागार्थिनो भागं नाकल्पयत मे सुराः। वरांगानि महार्हाणि धनुषा शातयामि वः ॥१०॥
- हिन्दी व्याख्या: "चूंकि यज्ञ के भाग के अधिकारी देवताओं ने मुझे मेरा भाग नहीं दिया, इसलिए मैं अपने इस धनुष से तुम सबके उत्तम और मूल्यवान अंगों को काट डालूँगा।"
- English Translation: "'Since you gods, entitled to shares, did not allot a share to me, I shall sever your precious and valuable limbs with this bow!'"
श्लोक ११ ततो विमनसः सर्वे देवा वै मुनिपुंगव। प्रसादयन्त देवेशं तेषां प्रीतोऽभवद् भवः ॥११॥
- हिन्दी व्याख्या: हे मुनिपुंगव! तब सभी देवता विमनस्क (दुःखी व भयभीत) हो गए और उन्होंने देवेश्वर (शिव) को प्रसन्न किया, जिससे भगवान भव (शिव) प्रसन्न हो गए।
- English Translation: "Then all the gods became distressed, O foremost of sages, and propitiated the lord of the gods, and Bhava (Shiva) became pleased with them."
श्लोक १२ प्रीतियुक्तस्तु सर्वेषां ददौ तेषां महात्मनाम्। तदेतद् देवदेवस्य धनूरत्नं महात्मनः ॥१२॥
- हिन्दी व्याख्या: प्रसन्न होकर उन्होंने उन सभी महात्माओं को वह महान धनुष दे दिया। वही यह महात्मा देवदेव (शिव) का श्रेष्ठ धनूरत्न है...
- English Translation: "Being full of gratification, he gave [it] to all those great souls. This indeed is that supreme jewel of a bow belonging to the great-souled god of gods..."
श्लोक १३ न्यासभूतं तदा न्यस्तमस्माकं पूर्वजे विभौ। अथ मे कृषतः क्षेत्रं लांगलादुत्थिता ततः ॥१३॥
- हिन्दी व्याख्या: ...जो हमारे पूर्वज (देवरात के वंशजों) के पास धरोहर (न्यास) के रूप में रखा गया था। इसके बाद, जब मैं खेत की जुताई कर रहा था...
- English Translation: "...which was deposited as a trust with our ancestor, O lord. Now, while I was ploughing the field..."
श्लोक १४ क्षेत्रं शोधयता लब्धा नाम्ना सीतेति विश्रुता। भूतलादुत्थिता सा तु व्यवर्धत ममात्मजा ॥१४॥
- हिन्दी व्याख्या: ...खेत की सफाई (शोधन) करते समय मुझे भूमि से एक कन्या प्राप्त हुई, जो संसार में 'सीता' नाम से विख्यात हुई। भूमि से प्रकट हुई वह मेरी पुत्री बड़ी होने लगी।
- English Translation: "...cleaning the field, she was found, famously known by the name Sita. Emerging from the earth, that daughter of mine grew up."
श्लोक १५ वीर्यशुल्केति मे कन्या स्थापितेयमयोनिजा। भूतलादुत्थितां तां तु वर्धमानां ममात्मजाम् ॥१५॥
- हिन्दी व्याख्या: भूमि से प्रकट होने के कारण अयोनिजा (योनि से उत्पन्न न होने वाली) मेरी उस कन्या के लिए मैंने 'वीर्यशुलक' (जो पराक्रम दिखाए, वही उसका शुल्क/पति हो) का नियम स्थापित किया।
- English Translation: "This daughter of mine, born not from a womb, was established by me with the condition of 'virya-shulka' (fee of valor). As that daughter of mine, risen from the earth, was growing up..."
श्लोक १६ वरयामासुरागत्य राजानो मुनिपुंगव। तेषां वरयतां कन्यां सर्वेषां पृथिवीक्षिताम् ॥१६॥
- हिन्दी व्याख्या: हे मुनिपुंगव! अनेक राजाओं ने आकर मेरी उस कन्या के लिए वरन (प्रस्ताव) किया। उन सभी पृथ्वी के राजाओं द्वारा कन्या के लिए आग्रह करने पर...
- English Translation: "...kings came and wooed her, O foremost of sages. When all those monarchs were courting the maiden..."
श्लोक १७ वीर्यशुल्केति भगवन् न ददामि सुतामहम्। ततः सर्वे नृपतयः समेत्य मुनिपुंगव ॥१७॥
- हिन्दी व्याख्या: ...मैंने उनसे कहा कि हे भगवन्! यह कन्या 'वीर्यशुल्क' है (बिना पराक्रम के नहीं दी जाएगी)। तब हे मुनिपुंगव! वे सभी राजागण एकत्रित होकर...
- English Translation: "...[declaring] 'O lord, she is virya-shulka,' I did not give my daughter. Then all those kings, coming together, O foremost of sages..."
श्लोक १८ मिथिलामप्युपागम्य वीर्यं जिज्ञासवस्तदा। तेषां जिज्ञासमानानां शैवं धनुरुपाहृतम् ॥१५ (sic: १८)॥
- हिन्दी व्याख्या: ...मिथिला में आए और अपना पराक्रम जानने की इच्छा प्रकट की। उनकी उस जिज्ञासा को शांत करने के लिए भगवान शिव का वह धनुष उनके सामने लाया गया।
- English Translation: "...arrived in Mithila, desiring to test their strength. For those desirous of testing it, Shiva's bow was brought forth."
श्लोक १९ न शेकुर्ग्रहणे तस्य धनुषस्तोलनेऽपि वा। तेषां वीर्यवतां वीर्यमल्पं ज्ञात्वा महामुने ॥१९॥
- हिन्दी व्याख्या: वे बलवान राजा उस धनुष को उठाने या उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने में असमर्थ रहे। हे महामुने! उन राजाओं का बल कम जानकर...
- English Translation: "They were unable either to grasp that bow or even to lift it. Realizing the strength of those mighty ones to be inadequate, O great sage..."
श्लोक २० प्रत्याख्याता नृपतयस्तन्निबोध तपोधन। ततः परमकोपेन राजानो मुनिपुंगव ॥२०॥
- हिन्दी व्याख्या: ...हे तपोधन! मैंने उन राजाओं को अस्वीकार कर दिया (कन्या देने से मना कर दिया)। तब हे मुनिपुंगव! अत्यंत क्रोध से भरे हुए वे सभी राजा...
- English Translation: "...those kings were rejected, know this, O ascetic wealth. Then, filled with supreme anger, O foremost of sages..."
श्लोक २१ अरुन्धन् मिथिलां सर्वे वीर्यसंदेहमागताः। आत्मानमवधूतं मे विज्ञाय नृपपुंगवाः ॥२१॥
- हिन्दी व्याख्या: ...अपने पराक्रम की ऐसी उपेक्षा देखकर संदेह में पड़ गए और राजाओं में श्रेष्ठ वे सभी राजा मिथिला को घेर कर बैठ गए।
- English Translation: "...doubtful of their own valor and knowing themselves to be slighted by me, all those best of kings besieged Mithila."
श्लोक २२ रोषेण महताविष्टाः पीडयन् मिथिलां पुरीम्। ततः संवत्सरे पूर्णे क्षयं यातानि सर्वशः ॥२२॥
- हिन्दी व्याख्या: महान रोष से युक्त होकर वे मिथिला पुरी को प्रताड़ित करने लगे। इस प्रकार एक वर्ष पूरा होने पर...
- English Translation: "Possessed by great wrath, they tormented the city of Mithila. Then, when a full year had passed..."
श्लोक २३ साधनानि मुनिश्रेष्ठ ततोऽहं भृशदुःखितः। ततो देवगणान् सर्वांस्तपसाहं प्रसादयम् ॥२३॥
- हिन्दी व्याख्या: ...मेरे पास जो भी साधन (सैन्य सामग्री आदि) थे, वे सब नष्ट होने लगे। तब हे मुनिश्रेष्ठ! मैं बहुत दुःखी हुआ और मैंने तपस्या के द्वारा सभी देवगणों को प्रसन्न किया।
- English Translation: "...my resources were completely exhausted, O foremost of sages. Thereupon I became deeply distressed, and through penance I propitiated all the hosts of gods."
श्लोक २४ ददुश्च परमप्रीताश्चतुरंगबलं सुराः। ततो भग्ना नृपतयो हन्यमाना दिशो ययुः ॥२४॥
- हिन्दी व्याख्या: तब अत्यंत प्रसन्न होकर देवताओं ने मुझे चतुर्विध सेना (चतुरङ्ग बल) प्रदान की। इसके बाद पराजित हुए और मारे जाते हुए वे सभी राजा चारों दिशाओं में भाग खड़े हुए।
- English Translation: "The gods, being supremely pleased, gave me a four-fold army. Then those defeated kings, being struck, fled in all directions."
श्लोक २५ अवीर्या वीर्यसंदिग्धाः सामात्याः पापकारिणः। तदेतन्मुनिशार्दूल धनुः परमभास्वरम् ॥२५॥
- हिन्दी व्याख्या: जो बलहीन, अपने बल पर संदेह करने वाले, मंत्रिपरिषद (मात्य) सहित और पापी थे, वे सब भाग गए। हे मुनिशार्दूल! वही यह परम भास्वर (दिव्य) धनुष है...
- English Translation: "Lacking valor, doubtful of their strength, along with their ministers and sinful ways [they fled]. Therefore, O tiger among sages, this supremely radiant bow..."
श्लोक २६ रामलक्ष्मणयोश्चापि दर्शयिष्यामि सुव्रत। यद्यस्य धनुषो रामः कुर्यादारोपणं मुने। सुतामयोनिजां सीतां दद्यां दाशरथेरहम् ॥२६॥
- श्लोक २६ (और अंतिम श्लोक): हे सुव्रत मुने! इसे मैं राम और लक्ष्मण को भी दिखाऊँगा। यदि राम इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा दें (या इसे झुकाकर बाण संधान करें), तो मैं दशरथनंदन राम को अपनी अयोनिजा पुत्री सीता ब्याह दूँगा।
- English Translation: "...I shall also show to Rama and Lakshmana, O strict observer of vows. If Rama should string this bow, O sage, I shall bestow my daughter Sita, born not from a womb, upon the son of Dasharatha."
